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रिम्स पता करेगा गंभीर बीमारियों के अनुवांशिक कारण, एम्स दिल्ली व नीदरलैंड के शोधकर्ताओं का मिलेगा साथ, ये होंगे फायदे

Updated at : 08 Jun 2021 9:55 AM (IST)
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रिम्स पता करेगा गंभीर बीमारियों के अनुवांशिक कारण, एम्स दिल्ली व नीदरलैंड के शोधकर्ताओं का मिलेगा साथ, ये होंगे फायदे

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, ब्रेन स्ट्रोक, हृदय व स्मृति (मेमोरी) की बीमारी के अानुवांशिक कारणों पर होगा. शोध की दूसरी कड़ी मेें झारखंड के शहरी व ग्रामीण आदिवासी आबादी को भी शामिल किया जायेगा.

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Rims Ranchi Latest News रांची : देश के शहरी व सुदूर ग्रामीण इलाके में रहनेवाले लोगों की अानुवांशिक बीमारी पर रिम्स राष्ट्रीय स्तर पर शोध करने जा रहा है. शोध में रिम्स को नीदरलैंड व एम्स दिल्ली के शोधकर्ताओं का सहयोग मिलेगा. शोध के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने रिम्स को शोध कार्य के लिए पहली किस्त के रूप में 67 लाख रुपये का अनुदान भेज दिया है.

शोध का मुख्य केंद्र शहर व ग्रामीण इलाकों की आबादी में होनेवाली गंभीर बीमारी :

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, ब्रेन स्ट्रोक, हृदय व स्मृति (मेमोरी) की बीमारी के अानुवांशिक कारणों पर होगा. शोध की दूसरी कड़ी मेें झारखंड के शहरी व ग्रामीण आदिवासी आबादी को भी शामिल किया जायेगा.

जानकारी के अनुसार, एम्स दिल्ली में इस शोध कार्य की जिम्मेदारी पद्मश्री डॉ कामेश्वर प्रसाद को मिली थी, लेकिन निदेशक के रूप में रिम्स मेें याेगदान देने के बाद शोध कार्य में रिम्स के डॉक्टरों को जुड़ने का मौका मिल गया. शोध कार्य के लिए रिम्स प्रबंधन ने डॉ गणेश व डॉ अमित को भी नियुक्त कर लिया है. एम्स दिल्ली में शोध के लिए एकत्र 8000 सैंपल की जांच रिपोर्ट को इसमें शामिल किया गया है.

इसमें से 1100 सैंपल का जीनोटाइप डाटा रिम्स के रिसर्च विंग को प्राप्त हो गया है. रिसर्च की दूसरी कड़ी मेें झारखंड के लोगाें को शामिल करने के बाद रिम्स के डॉक्टर राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाकर इन गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजाें की पूरी हिस्ट्री लेंगे. पीड़ित परिवार में इस बीमारी से होनेवाले अन्य लोगों की जानकारी भी एकत्र करेंगे, जिससे अानुवांशिक बीमारी का पता लगाया जा सके.

देश भर में रिम्स की बेहतर होगी छवि

रिम्स में राष्ट्रीय स्तर के शोध कार्य होने से रिम्स की छवि देश के मानस पटल पर बेहतर होगी. देश के विभिन्न संस्थानों में काम करनेवाले डॉक्टर भी रिम्स से जुड़ना चाहेंगे. वहीं नीट के माध्यम से एमबीबीएस व पोस्ट ग्रेजुएट के सफल विद्यार्थी भी रिम्स में नामांकन लेने में रुचि दिखायेंगे. वर्तमान समय में सेंट्रल कोटा से बेहतर रैंक लानेवाले विद्यार्थी रिम्स में नामांकन लेना नहीं चाहते हैं. कई बार सेंट्रल कोटा की सीट इस कारण खाली रह जाती है.

क्या कहते हैं रिम्स निदेशक

भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने 67 लाख का अनुदान दिया है. यह पहली किस्त है. शोध में गंभीर बीमारी बीपी, डायबिटीज, ब्रेन स्ट्रोक बीमारी के अनुवांशिक कारणों का पता लगाया जायेगा. दूसरी कड़ी में हम झारखंड के शहरी व आदिवासी आबादी को भी शामिल करेंगे.

डॉ कामेश्वर प्रसाद, निदेशक, रिम्स

Posted By : Sameer Oraon

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