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Jharkhand Panchayat Chunav 2022: झारखंड पंचायत चुनाव का मामला क्यों पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, पढ़िए ये है वजह

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पंचायत चुनाव कराने से पहले राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्टिंग करानेवाली कमेटी का गठन अनिवार्य है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand Panchayat Chunav 2022: सुप्रीम कोर्ट
Jharkhand Panchayat Chunav 2022: सुप्रीम कोर्ट
फाइल फोटो

Jharkhand Panchayat Chunav 2022: झारखंड के गिरिडीह से सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने झारखंड पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. इसमें झारखंड सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को पार्टी बनाया गया है. याचिका में कहा है कि झारखंड सरकार पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिये बगैर पंचायत चुनाव कराना चाहती है, जबकि ट्रिपल टेस्ट के तहत कमीशन गठित कर पिछड़ा वर्ग का इंपीरियल डाटा इकट्ठा करना है.

ट्रिपल टेस्टिंग के लिए कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पंचायत चुनाव कराने से पहले राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनाव में आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्टिंग करानेवाली कमेटी का गठन अनिवार्य है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में ही महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव पर रोक लगाते हुए ट्रिपल टेस्टिंग के लिए कमेटी गठित की है.

पिछड़ा वर्ग की आबादी 55 फीसदी

गिरिडीह से सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी द्वारा झारखंड पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गयी याचिका में बताया गया है कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग की आबादी 55 फीसदी है. इसके बावजूद राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिये बगैर पंचायत चुनाव कराना चाहती है.

आरक्षण बढ़ाकर चुनाव कराने की मांग इधर, झारखंड प्रदेश तेली समाज एवं छोटा नागपुरिया तेली उत्थान समाज का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल सोमवार को राज्यपाल रमेश बैस से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने ओबीसी का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत कराने के बाद राज्य में पंचायत चुनाव कराने की मांग की. इसके अलावा छोटानागपुरिया तेली को आदिवासी का दर्जा, राज्य के विधानसभा क्षेत्र का पुनः परिसीमन कर 140 करने, राज्य में जातीय जनगणना कराने, 1932 के खतियान पर नियोजन नीति बनाने, छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राज्य में भी तेल घानी बोर्ड का गठन करने की मांग की गयी. प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद, भाजपा विधायक ढुल्लू महतो , झारखंड प्रदेश तेली समाज के अध्यक्ष अरुण साहु एवं उदासन नाग, प्रदीप साहू आदि शामिल थे.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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