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झारखंड में इन क्षेत्रों को घोषित किया गया ‘साइलेंस जोन’, जानें क्या हैं इसके मायने

Updated at : 18 Oct 2023 4:48 PM (IST)
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झारखंड में इन क्षेत्रों को घोषित किया गया ‘साइलेंस जोन’, जानें क्या हैं इसके मायने

उपायुक्त कार्यालय की विधि व्यवस्था शाखा से जारी इस आदेश में कहा गया है कि आपातकालीन स्थिति को छोड़कर किसी भी स्थिति में रात के 10 बजे से सुबह छह बजे तक किसी प्रकार का ढोल, नगाड़ा आदि वाद्य यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा.

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झारखंड की राजधानी रांची में कई जिलों को साइलेंस जोन घोषित कर दिया गया है. रांची के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था शाखा) की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि अस्पतालों के 100 मीटर के दायरे में स्थित सभी क्षेत्र साइलेंस जोन होंगे. इन इलाकों में कुछ पाबंदियों का भी जिक्र किया गया है. साथ ही कहा गया है कि अगर इन इलाकों में वाद्य यंत्र या लाउडस्पीकर बजाया जाता है, तो उसकी ध्वनि नियंत्रित होनी चाहिए. किस इलाके में कितनी ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर आदि बज सकेंगे, उसके बारे में भी स्पष्ट कर दिया गया है. आदेश में कहा गया है कि झारखंड हाईकोर्ट परिसर, रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, निर्मला कॉलेज, योगदा सत्संग कॉलेज, बीआईटी मेसरा के 100 मीटर के दायरे में 50 और 40 डेसिबल से अधिक ऊंची आवाज में कोई वाद्य यंत्र नहीं बजेंगे. इंडस्ट्रियल एरिया में इसकी सीमा 70 से 75 डेसिबल और आवासीय इलाकों में 45 से 55 डेसिबल तय किया गया है. वहीं, वाणिज्यिक इलाकों में इसकी सीमा 55 से 65 डेसिबल तक रखी गई है. दुर्गा पूजा को देखते हुए यह फैसला किया गया है. झारखंड में दुर्गा पूजा 20 से 24 अक्टूबर के बीच मनाई जाएगी. राजधानी रांची में दुर्गा पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है.

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शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेंगे थाना प्रभारी

उपायुक्त कार्यालय की विधि व्यवस्था शाखा से जारी इस आदेश में कहा गया है कि आपातकालीन स्थिति को छोड़कर किसी भी स्थिति में रात के 10 बजे से सुबह छह बजे तक किसी प्रकार का ढोल, नगाड़ा आदि वाद्य यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा. आदेश में कहा गया है कि वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सुबह छह बजे से रात के 10 बजे तक के लिए तय ध्वनिमानकों में इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़ अन्य क्षेत्रों के लिए तय लिमिट से अधिकतम 10 डेसिबल आवाज की वृद्धि की गई है. इंडस्ट्रियल एरिया में पहले से ही अधिकतम ध्वनि सीमा 75 डेसिबल तय है. इसमें किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है. आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर तय सीमा से अधिक ऊंची आवाज में कहीं लाउडस्पीकर या वाद्य यंत्र बजाने की शिकायत मिलती है, तो सभी थाना प्रभारी को तत्काल जांच करने एवं नियम का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने का अधिकार है.

साइलेंस जोन में आएंगे ये इलाके

झारखंड हाईकोर्ट परिसर, रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, निर्मला कॉलेज, योगदा सत्संग महाविद्यालय धुर्वा, बीआईटी मेसरा, रांची जिला के 26 अस्पताल, झारखंड विधानसभा, प्रोजेक्ट बिल्डिंग, नेपाल हाउस सचिवालय, झारखंड राज्य के सभी जिलों/अनुमंडलों में स्थित जिला व्यवहार न्यायालय/अनुमंडल व्यवहार न्यायालय, झारखंड के 24 जिलों में स्थित 50 एवं उससे अधिक बेड वाले प्राइवेट अस्पताल, जो आयुष्मान भारत योजना के तहत रजिस्टर्ड हैं, राज्य के सभी सदर अस्पतालों के 100 मीटर की दूरी तक जो क्षेत्र हैं, वो साइलेंस जोन घोषित किए गए हैं. इन इलाकों में ध्वनि सीमा 50 डेसिबल तय की गई है.

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इंडस्ट्रियल एरिया

इंडस्ट्रियल में झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार, रियाडा भवन, नामकुम औद्योगिक क्षेत्र, रांची के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पुराने एवं नए औद्योगिक क्षेत्र, झारखंड नगर निवेशन एवं उन्नयन न्यास अधिनियम, 2002 (अंगीकृत) में में घोषित जमशेदपुर (यूए) मास्र प्लान एवं झारखंड क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण अधिनियम 1981 में घोषित रांची मास्टर प्लान, 2037 में अधिसूचित आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों क्रमश: आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक घोषित क्षेत्र घोषित हैं. आवासीय इलाकों में 55 डेसिबल से ऊंची आवाज में कोई लाउडस्पीकर नहीं बजा पाएगा, वाणिज्यिक क्षेत्र में यह सीमा 65 डेसिबल और औद्योगिक क्षेत्र में 75 डेसिबल होगी.

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रेसिडेंशियल एरिया

अशोक नगर, सीएमपीडीआई कॉलोनी, कांके रोड, मेकॉन कॉलोनी, श्यामली, डोरंडा, एचइसी रेसिडेंशियल कॉलोनी धुर्वा, सीसीएल कॉलोनी, गांधी नगर को रेसिडेंशियल एरिया घोषित किया गया है. इन इलाकों में 55 डेसिबल से ऊंची आवाज में कोई माइक या लाउडस्पीकर नहीं बजा पाएगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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