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DRDA Employee News : डीआरडीए को केंद्र नहीं देगा पैसा, इतने कर्मियों की नौकरी खतरे में, जानें क्या है इसके पीछे का कारण

By Prabhat Khabar Print Desk
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Ranchi News, drda jharkhand job, drda employee news रांची : केंद्र सरकार अप्रैल 2021 से जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के कर्मचारियों के वेतन व भत्ता मद में अपना हिस्सा नहीं देगी. राज्य को इसकी सूचना दे दी गयी है. केंद्र के इस फैसले से डीआरडीए में संविदा पर नियुक्त 500 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गयी है. डीआरडीए के प्रशासनिक खर्च का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार देती है. अभी केंद्र सरकार सालाना औसतन 10 करोड़ रुपये देती है.

डीआरडीए का गठन वर्ष 1999 से पहले हुआ था. इसका मुख्य उद्देश्य केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए चलायी जानेवाली योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतरी के लिए विशेषज्ञ के रूप में सलाह देना है. सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों में डीआरडीए की उपयोगिता के आकलन के लिए गुजरात के आनंद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट (आइआरएमए) से स्वतंत्र रूप से अध्ययन कराया.

इसी अध्ययन की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार ने डीआरडीए के प्रशासनिक खर्चों में अपनी भागीदारी बंद करने के लिए राज्य को सूचित किया है. साथ ही कहा है कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं का गठन हो चुका है. इसलिए वह आइआरएमए की रिपोर्ट में सुझाये गये विकल्पों के अनुरूप या तो डीआरडीए को बंद करे या उसे पंचायती राज संस्थाओं में मिला दे. साथ ही डीआरडीए में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस कर दे.

फिलहाल हर साल 10 करोड़ रुपये डीआरडीए को देती है केंद्र सरकार

केंद्र ने आइआरएमए से कराया था डीआरडीए की उपयोगिता का आकलन

संस्था ने डीआरडीए को कमजोर संस्था बताया

जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को बंद कर दिया जाये

पंचायती राज संस्थाओं में मिला दिया जाये

गरीबी उन्मूलन योजनाओं में डीडीओ के रूप में काम लिया जाये

डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग एंड मॉनिटरिंग इकाई के रूप में काम लिया जाये

राज्य डीआरडीए में किसे कितना मासिक वेतन

प्रोजेक्ट अफसर 56 हजार रुपये

प्रोजेक्ट इकोनामिस्ट 49 हजार रुपये

असिसटेंट प्रोजेक्ट अफसर 33 हजार रुपये

असिसटेंट इंजीनियर 33 हजार रुपये

अन्य कर्मचारी 20-30 हजार रुपये

क्या लिखा है आइआरएमए की रिपोर्ट में

आइआरएमए ने चार अप्रैल 2020 को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसमें डीआरडीए को एक कमजोर संस्था बताया गया है. साथ ही कहा गया है कि संस्था के पास गरीबी उन्मूलन की योजनाओं में सरकार के विभागों को विशेषज्ञ के रूप में राय देने की क्षमता नहीं है. डीआरडीए अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है. फिलहाल सभी केंद्रीय योजनाओं को उसकी अपनी संरचनाओं के सहारे लागू किया जा रहा है. पंचायती राज संस्थाओं का गठन हो चुका है. एेसी स्थिति में डीआरडीए की उपयोगिता नहीं के बराबर है. केंद्र सरकार द्वारा डीआरडीए को पैसा नहीं देने तथा Hindi News से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.

कर्मचारियों को अन्यत्र समायोजित करें

केंद्र ने कहा है कि डीआरडीए में कार्यरत अन्य कर्मचारियों को उनकी योग्यता के अनुरूप दूसरी जगह समायोजित करें. अगर समायोजन संभव न हो, तो उन्हें दूसरी योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि से जोड़ दें. इन कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्त आदि राज्य अपने अपने नियम के आलोक में तय करे. इधर, राज्य सरकार संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण या समायोजन के मुद्दे पर अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है.

Posted By : Sameer Oraon

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