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चाईबासा में नक्सलियों के बम हमला से शहीद हुए 3 जवान को CM हेमंत सोरेन ने दी श्रद्धांजलि, जानें क्लेमोर बम की जद में कैसे आये जवान

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
रांची के झारखंड जगुआर हेडक्वार्टर में शहीद जवानों को नमन करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.
रांची के झारखंड जगुआर हेडक्वार्टर में शहीद जवानों को नमन करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.
ट्विटर.

Jharkhand News, Ranchi News, Chaibasa News, रांची / चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा स्थित टोकलो के लांजी जंगल में नक्सलियों के डायरेक्शनल क्लेमोर बम से हमला करने के मामले में 3 जवान शहीद हुए, वहीं 3 जवान घायल हो गये हैं. घायलों को हवाई मार्ग से रांची लाया गया, वहीं शहीद हुए 3 जवान का पार्थिव शरीर रांची के झारखंड जगुआर हेडक्वार्टर लाया गया. इस दौरान शहीद हुए जवानों को सीएम हेमंत सोरेन ने श्रद्धासुमन अर्पित किये.

गुरुवार को चाईबासा के टोकलो स्थित लांजी जंगल में नक्सलियों के डायरेक्शनल क्लेमोर बम की चपेट में कॉबिंग ऑपरेशन में शामिल STF (झारखंड जगुआर) और CRPF 197 बटालियन के जवान आ गये. मौके पर 2 जवान शहीद हो गये, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य जवान भी कुछ देर बाद शहीद हो गये. शहीद हुए जवानों में STF (झारखंड जगुआर) के हवलदार साहिबगंज निवारी देवेंद्र पंडित के अलावा सिमडेगा निवासी आरक्षी किरण सुरीन और पलामू निवासी हरिद्वार साह थे. वहीं खूंटी निवासी आरक्षी दीप टोपनो और लातेहार निवासी निक्कू उरांव गंभीर रूप से घायल हैं जबकि CRPF 197 बटालियन के एक रेडियो ऑपरेटर बाला गुरुंग आंशिक रूप से घायल हो गये हैं.

इधर, शहीद जवानों का पार्थिव शरीर रांची के कांके स्थित सुकुरहुट्टू में झारखंड जगुआर का हेडक्वार्टर पहुंचा. शव के पहुंचते ही उपस्थित सभी की आंखें नम हो गयी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी झारखंड जगुआर हेडक्वार्टर पहुंच कर तीनों शहीदों को नमन किये. इस दौरान सीएम श्री सोरेन ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए परमात्मा से वीर शहीदों की आत्मा को शांति प्रदान कर परिवार को दुःख की घड़ी सहन करने की शक्ति देने की कामना की.

जवान कैसे आये चपेट में

भाकपा माओवादियों ने टोकलो थानांतर्गत लांजी गांव के पास जंगल के पहाड़ी पर पुलिस बलों पर घात लगाकर डायरेक्शनल क्लेमोर बम से हमला कर दिया. गुरुवार की सुबह करीब 8.30 बजे जब झारखंड जगुआर (STF) और CRPF 197 बटालियन के 60 जवान लांजी पहाड़ में चढ़ रहे थे. इस क्रम में पहाड़ी के 50 मीटर के ऊपर चढ़ने पर एक जोरदार धमका हुआ और क्लेमोर बम के रेंज में 5 जवान आ गये. इनमें से 3 जवान थोड़ी देर बाद शहीद हो गये.

बम के ज्यादा छर्रे लगने से आरक्षी किरन सुरीन और हरिद्वार साह की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि गंभीर रूप से घायल STF (झारखंड जगुआर) के हवलदार देवेंद्र कुमार पंडित इलाज के लिए रांची ले जाने के क्रम में शहीद हो गये. वहीं, क्लेमोर बम विस्फोट होते ही नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग भी कर दिया. इसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गयी. करीब एक घंटे तक चली इस मुठभेड़ के क्रम में जवानों की माकूल जवाबी फायरिंग की वजह से पुलिस को भारी पड़ता देख नक्सली भाग खड़े हुए. इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन भी चलाया.

जहां पर विस्फोट हुआ था, उसके आसपास कुछ ग्रामीण भी मौजूद थे, जबकि 300 मीटर की दूरी पर एक युवक को भागते देखा गया. जवानों की हमला से उक्त अनजान युवक जंगल का फायदा उठा कर भागने में सफल हुआ. संदेह के आधार पर सुरक्षा बलों ने 3 ग्रामीण को हिराहत में लिया है. घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा- तफरी मच गयी.

आनन- फानन में घायलों को बेहतर इलाज के लिये एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया. घटना की सूचना मिलते ही डीआईजी राजीव रंजन, सीआरपीएफ 60 बटालियन के कमाडेंट आनंद जेराई, एसपी अजय लिंडा घटना स्थल पहुंच कर जायजा लिया. घटना स्थल से पुलिस ने करीब तीन मीटर तार, जेसीबी मशीन का लगभग चार फीट लंबा पाइप व छोटे- छोटे 12 MM रड के टुकड़े बरामद किये. DIG और SP ने कहा कि है जवानों का शहादत बेकार नहीं जायेगा. इसका माकूल जवाब दिया जायेगा.

11 फरवरी से जवानों का चल रहा कैंप

लांजी गांव में 11 फरवरी से जवानों का कैंप लगाया गया. अभियान के हर तीसरे दिन 60 जवान लांजी पहाड़ी से उतरते और दूसरा टीम उन्हें रिलिफ देने के लिए चढ़ऐ. लांजी पहाड़ पर चढ़ने और उतरने में जवानों को 2 घंटे का समय लगता है. दो दिनों तक जवान पहाड़ के ऊपर लांजी गांव में रह कर नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाते थे. रिलीफ देने के लिए झारखंड जगुआर और CRPF के जवान के पहाड़ी पर चढ़ते ही हमला किया गया.

पहली बार क्लेमोर बम के रेंज में आयी पुलिस

नक्सलियों ने क्लेमोर बम का करीब 15 साल पहले सारंडा में प्रयोग किया था. नक्सलियों ने उस समय भी क्लेमोर बमों को पेड़ों के ऊपर लटका दिया था, लेकिन पुलिस की पैनी नजर से यह बम नहीं बच पाया था. लिहाजा क्लेमोर बम से नक्सली उस समय जवानों को अपना निशाना नहीं पाये पाये थे. ऐसा पहली बार हुआ है, जब क्लेमोर बम से जवान को निशाना बनाया गया है.

क्या है क्लेमोर बम

नक्सली आमतौर पर इस बम का इस्तेमाल जंगल और पहाड़ियों में पुलिस को घात पहुंचाने के लिए करते हैं. इस बम को पेड़ की डालियों के सहारे लटका दिया जाता है. फिर दो तोरों को सटाकर इसके रेंज में आने वाले व्यक्ति को निशाना बना दिया जाता है. कुछ क्लेमोर बम ऐसे भी होते हैं कि पेड़ लटकते बम से टकराने के बाद इसका स्पीलिंटर उन्हें भेद देता है.

ऐसे लगा रखे बम

आमतौर पर क्लेमोर बम का मुंह नीचे की ओर रखा जाता है, लेकिन यहां नक्सलियों ने तकनीक अपनाते हुए पहाड़ी और पेड़ के बीच 2 फीट के रॉड का सहारा लिया. नक्सलियों ने इस क्लेमोर बम का मुंह ऊपर की ओर कर रखा था. जैसे ही जवान पहाड़ी पर चढ़ने लगे दूर बैठे नक्सलियों ने दो तारों को सटाकर विस्फोट कर दिया.

जवानों की आंखें हो गयी थी नम

अपने आंखों के सामने जवानों को शहीद होते देख अन्य जवानों की आंखें नम हो गयी थी. घटना के बाद लांजी पहाड़ी के एक किमी की परिधि पर जवानों ने मोर्चा ले रखा था. आला अधिकारियों का आना- जाना लगा रहा. अधिकारी घटना स्थल पहुंच कर जवानों के मनोबल पर ऊंचा करने का काम कर रहे थे. बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व महाराजा प्रमाणिक दस्ता के साथ लांजी पहाड़ी में मुठभेड़ हुआ. इस घटना में कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हुआ था. इसके बाद से CRPF और झारखंड जगुआर के जवान लांजी गांव और पहाड़ी में लगातार सर्च अभियान चला रहे थे.

ट्राई जक्शन में अनल और महाराज प्रमाणिक दस्ते का वर्चस्व हो गया था खत्म

DIG राजीव रंजन सिंह और एसपी अजय कुमार लिंडा ने बताया कि जिस जगह पर इस घटना हुई है, वह पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला- खरसावां व खूंटी जिले के ट्राई जंक्शन है. उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक माह से प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था. पिछले माह के 7 एवं 8 फरवरी को उक्त क्षेत्र में भाकपा (माओवादी) के सीसीएम अनल उर्फ पतिराम मांझी तथा जेसीएम महाराज प्रमाणिक दस्ते के साथ जिला बल, CRPF और कोबरा बटालियन के साथ मुठभेड़ भी हुई थी. उसके बाद उक्त क्षेत्रों में अनल उर्फ पतिराम मांझी तथा जेसीएम महाराज प्रमाणिक दस्ता के लोगों का वर्चस्व समाप्त हो गया था.

Posted By : Samir Ranjan.

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Published Date

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