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Jharkhand: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- कब तक प्रदूषित हवा-पानी से त्रस्त रहेगी रांची, प्रदूषण बोर्ड है कि नहीं

Updated at : 21 Jun 2024 8:02 AM (IST)
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jharkhand high court

झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. कहा है कि आखिर कब तक रांची के लोग प्रदूषित हवा व पानी से त्रस्त रहेंगे. यहां प्रदूषण बोर्ड है या नहीं.

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Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य के जल स्रोतों व नदियों के अतिक्रमण और साफ-सफाई को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान लालपुर इलाके में गंदे पानी की आपूर्ति और बड़ा तालाब के पानी के प्रदूषित होने पर फिर तल्ख टिप्पणी की.

झारखंड सरकार का दावा हर वर्ष हो जाता है फेल

खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि आखिर कब तक रांची के लोग प्रदूषित हवा व पानी से त्रस्त रहेंगे? परेशानी झेलते रहेंगे. ऐसा लग रहा है कि राज्य में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई अस्तित्व नहीं है. खंडपीठ ने आगे कहा कि रांची में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर वर्ष 2011 से जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है, सरकार की ओर से कई शपथ पत्र दायर कर राजधानी के लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी देने तथा गर्मी के मौसम में पानी की समस्या नहीं होने का दावा किया जाता रहा है, लेकिन यह दावा हर वर्ष फेल हो जाता है.

जलस्रोतों की सफाई का बार-बार किया जाता है दावा

रांची में कांके डैम, बड़ा तालाब जैसे जल स्रोत की सफाई का दवा किया जाता है, लेकिन हर छह माह के बाद फिर वही पानी में गंदगी की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में विशेषज्ञ से राय लेकर रांची के बड़ा तालाब सहित अन्य जल स्रोतों के पानी को शुद्ध बनाये रखने की पहल करनी चाहिए. इससे पूर्व रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने बताया कि सीवरेज का गंदा पानी नल में जलापूर्ति के साथ आ जा रहा है, जिसे जल्द ठीक कर लिया जायेगा. शहर में सीवरेज-ड्रेनेज बन रहा है.

कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए प्रधान सचिव और निगम के प्रशासक

सुनवाई के दौरान पेयजल व स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव और रांची नगर निगम के प्रशासक सशरीर उपस्थित थे. खंडपीठ ने लालपुर, सर्कुलर रोड स्थित अप्सरा होटल के पीछे न्यू कॉलोनी में गंदे पानी की आपूर्ति को रोकने तथा नियमित व स्वच्छ जलापूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही मॉनसून को देखते हुए नालियों की सफाई की भी जरूरत बतायी. खंडपीठ ने अगली सुनवाई के दौरान नगर विकास विभाग के सचिव को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 26 जून को होगी.

विधानसभा नियुक्ति मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड विधानसभा में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने प्रार्थी, राज्य सरकार और झारखंड विधानसभा का पक्ष सुना.

याचिकाकर्ता ने की सीबीआई से जांच कराने की मांग

सभी पक्षों की दलील पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. साथ ही संबंधित पक्षों को 22 जून तक लिखित बहस प्रस्तुत करने को कहा. प्रार्थी की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजीव कुमार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया. वहीं, राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन ने प्रार्थी की दलील का विरोध किया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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