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Jharkhand Economic Survey: झारखंड के लोगों की आय 10 साल में 207 फीसदी बढ़ी, इतनी हो गयी पर कैपिटा इनकम

झारखंड भले गरीब प्रदेशों में गिना जाता हो, लेकिन यहां के लोगों की आय में लगातार वृद्धि हुई है. झारखंड सरकार के वित्त विभाग की ओर से जारी एक रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि महज 10 साल में प्रति व्यक्ति आय 207 फीसदी बढ़ गयी है. यानी आय दोगुनी से ज्यादा हो गयी है.

Jharkhand Economic Survey: झारखंड सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण आज आयेगा. झारखंड विधानसभा में बजट पेश किये जाने से पहले हर साल आर्थिक सर्वेक्षण सदन के पटल पर रखा जाता है. पिछले 10 साल में झारखंड में प्रति व्यक्ति आय में 207 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है. वर्ष 2011-12 में झारखंड के आम आदमी की आय 41,254 रुपये थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 85,485 रुपये हो गयी.

10 साल में 3 साल घटी लोगों की कमाई

झारखंड सरकार के वित्त विभाग के सेंटर फॉर फिस्कल स्टडीज, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की ओर से प्रकाशित झारखंड इकॉनोमिक सर्वे 2021-22 पुस्तिका में यह जानकारी दी गयी है. ये आंकड़े उस साल यानी वर्ष 2021-22 के मूल्य पर आधारित हैं. अगर पिछले 10 साल के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि तीन साल ऐसे भी आये, जब झारखंड में प्रति व्यक्ति आय में गिरावट भी दर्ज की गयी.

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जब पर कैपिटा इनकम में आयी 14.80 फीसदी की गिरावट

वर्ष 2012-13 और वर्ष 2013-14 के दौरान प्रति व्यक्ति आय में 14.80 फीसदी की गिरावट आयी थी. वर्ष 2012-13 में झारखंड की पर कैपिटा इनकम 47,360 रुपये थी, जो वर्ष 2013-14 में घटकर 41,254 रुपये रह गयी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6,106 रुपये कम थी. इसी तरह वर्ष 2015-16 में 4,547 रुपये (8.62 फीसदी) घटकर 52,754 रुपये रह गयी. वर्ष 2014-15 में झारखंड की पर कैपिटा इनकम 7,301 रुपये थी.

कोरोना काल में भी इतनी कम हो गयी लोगों की कमाई

वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के संक्रमण के दौरान जब सप्लाई चेन पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी. पूरी दुनिया जब थम गयी, तब भी प्रति व्यक्ति आय में गिरावट आयी. जी हां, वर्ष 2020-21 में झारखंड में लोगों की कमाई 2.85 फीसदी यानी 2,152 रुपये घट गयी. इस साल लोगों की कमाई 75,587 रुपये आंकी गयी, जो वर्ष 2019-20 में 77,739 रुपये थी.

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2014-15 में 28 फीसदी बढ़ी पर कैपिटा इनकम

झारखंड में पर कैपिटा इनकम सबसे ज्यादा वर्ष 2014-15 में बढ़ी. इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में प्रति व्यक्ति आय 28 फीसदी यानी 16,047 रुपये बढ़ी, जो अब तक का सबसे अधिक है. वर्ष 2012-13, वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19 और वर्ष 2021-22 में प्रति व्यक्ति आय 10 फीसदी से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ी. इन वर्षों में लोगों की कमाई क्रमश: 12.89 फीसदी, 12.10 फीसदी, 11.06 फीसदी, 10.52 फीसदी और 11.58 फीसदी रही. इस बीच वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय 2.98 फीसदी की दर से बढ़ी.

फिर 26वें नंबर पर खिसका झारखंड

वर्ष 2000-01 में झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में 26वें नंबर पर था. वर्ष 2011-12 में इसकी रैंकिंग में सुधार हुआ और यह 2 पायदान चढ़कर 24वें स्थान पर आ गया. लेकिन, वर्ष 2018-19 में एक बार फिर अपना प्रदेश झारखंड 2 पायदान खिसककर 26वें नंबर पर आ गया.

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प्रति व्यक्ति आय बढ़ने की रफ्तार

  • वर्ष 2011-12 से 2018-19 के बीच 9 फीसदी

  • वर्ष 2018-19 और 2019-20 के बीच 3.1 फीसदी

  • वर्ष 2019-20 और 2020-21 के बीच -2.8 फीसदी

  • वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के बीच 13.1 फीसदी

झारखंड में प्रति व्यक्ति आय का ब्योरा

झारखंड में प्रति व्यक्ति आय
वर्ष रुपये वर्तमान मूल्य पर कितनी बढ़ी पर कैपिटा इनकम (रुपये में) कितनी बढ़ी पर कैपिटा इनकम (फीसदी में)
2011-12 “41 254″
2012-13 “47 360″ “6 106″ 12.89%
2013-14 “41 254″ “-6 106″ -14.80%
2014-15 “57 301″ “16 047″ 28.00%
2015-16 “52 754″ “-4 547″ -8.62%
2016-17 “60 018″ “7 264″ 12.10%
2017-18 “67 484″ “7 466″ 11.06%
2018-19 “75 421″ “7 937″ 10.52%
2019-20 “77 739″ “2 318″ 2.98%
2020-21 “75 587″ “-2 152″ -2.85%
2021-22 “85 485″ “9 898″ 11.58%
Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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