Jharkhand Budget Session: वित्त मंत्री ने सदन में पेश की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, 3 मार्च को आयेगा बजट

Jharkhand Budget Session: झारखंड विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री डाॅ रामेश्वर उरांव ने वित्तीय वर्ष 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन में पेश किया. इस दौरान GSDP में 8.8 फीसदी के वृद्धि का अनुमान है. वही, 3 मार्च को राज्य का बजट पेश किया जायेगा.
Jharkhand Budget Session: वित्तीय वर्ष 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट बुधवार को वित्त मंत्री डाॅ रामेश्वर उरांव ने सदन में पेश किया. इस दौरान चालू वित्तीय वर्ष के ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (Gross State Domestic Product- GSDP) में 8.8 फीसदी के वृद्धि का अनुमान है. साथ ही बताया गया कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) में झारखंड का GSDP दो फीसदी से भी कम है. दूसरी ओर, तीन मार्च को राज्य का बजट पेश होगा. अगले वित्तीय वर्ष के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किये जाने का अनुमान है.
बुधवार को सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए वित्त मंत्री डाॅ उरांव ने पिछले दो साल में विकास दर में गिरावट आयी है. कहा कि इससे पहले वित्तीय वर्ष 2004- 2005 से लेकर 2011 के बीच 6.6 फीसदी की दर से बढ़ी थी. वहीं, वित्तीय वर्ष 2011-12 से लेकर 2018-19 के बीच 6.2 फीसदी की दर से ही बढ़ी. इसके अलावा पिछले दो वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 में विकास दर में गिरावट आयी है.
राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए गुरुवार यानी तीन मार्च को बजट पेश करेगी. अगले वित्तीय वर्ष के लिए राज्य सरकार द्वारा एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किये जाने का अनुमान है. सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट अनुमान तैयार करने के दौरान पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मिले राजस्व और केंद्रीय सहाय्य अनुदान के ग्रोथ रेट को ध्यान में रखने का निर्देश दिया था. सरकार के इस निर्देश के आलोक में चालू वित्तीय वर्ष के बजट आकार में अधिकतम 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान किया गया है.
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कृषि क्षेत्र में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है. इस क्षेत्र में नयी योजना के रूप में ‘एग्री स्मार्ट विलेज’ को शामिल किये जाने का अनुमान है. शिक्षा के क्षेत्र में नयी योजना के रूप में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को शामिल किया गया है. इसका लाभ राज्य के मूल निवासियों को मिलेगा. अगले वित्तीय वर्ष में राज्य के अनुसूचित जनजाति के सरकारी कर्मचारियों को गृह ऋण वापसी की समय सीमा बढ़ाने के मुद्दे को शामिल किया जाना था. हालांकि इस मामले में सरकार बजट पूर्व किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पायी है. अनुसूचित जनजाति के सरकारी कर्मचारियों को गृह ऋण वापस करने के लिए पांच साल का समय निर्धारित है.
Posted By: Samir Ranjan.
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