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झारखंड में डीजीपी नियुक्ति विवाद : JMM के दावे पर BJP प्रवक्ता अजय साह का बड़ा हमला

Updated at : 06 Feb 2025 8:39 PM (IST)
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ajay shah bjp

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय साह (फाइल फोटो)

Jharkhand DGP Controversy: अनुराग गुप्ता को झारखंड का डीजीपी बनाये जाने के खिलाफ प्रदेश भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है. बाबूलाल मरांडी के बाद अब प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने झामुमो पर हमला बोला है.

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Jharkhand DGP Controversy: झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्ति का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पलटवार किया था. कहा था कि कई राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के बाद राज्य मंत्रिपरिषद ने एक निर्णय लिया था और उसी के आलोक में डीजीपी की नियुक्ति हुई थी. अब भाजपा के प्रवक्ता अजय साह ने झामुमो पर बड़ा हमला बोला है. बृहस्पतिवार (6 फरवरी 2025) को अजय साह ने झामुमो को घेरते हुए आरोप लगाया कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति असंवैधानिक तरीके से की गयी है. उन्होंने सत्ताधारी दल जेएमएम के प्रवक्ता पर तथ्यहीन और गोल-मटोल जवाब देने का आरोप लगाया. कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणी छोड़कर सरकार मुद्दों पर बात करे.

डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना – साह

भाजपा के प्रवक्ता ने हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना हुई है. उन्होंने पूछा कि केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की अनदेखी क्यों की गयी. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार गैरकानूनी फैसले ले रही है. अजय साह भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी का जवाब देने की बजाय झामुमो के प्रवक्ता बाबूलाल मरांडी पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हैं.

डीजीपी की नियुक्ति में यूपीएससी की भूमिका महत्वपूर्ण – अजय साह

अजय साह ने कहा कि झामुमो प्रवक्ता का बाबूलाल मरांडी पर कटाक्ष करना यह बताता है कि झामुमो ने भी इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया है कि अनुराग गुप्ता की झारखंड के डीजीपी के रूप में नियुक्ति असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया में यूपीएससी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. यूपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे डीजीपी चयन प्रक्रिया के लिए अधिकृत किया है.

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‘गंभीर मसले पर तथ्यपरक जवाब दे सरकार’

भाजपा प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि यूपीएससी के सदस्य को चयन पैनल में शामिल किये बिना डीजीपी की नियुक्ति संविधान का सीधा उल्लंघन है. प्रकाश सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि डीजीपी की नियुक्ति केवल यूपीएससी पैनल की सिफारिशों के आधार पर ही होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन को छिपाने के लिए गोल-मोल बातें कर रही है. उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और इस पर तथ्यपरक और पारदर्शी जवाब दिया जाना चाहिए.

जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा झामुमो – भाजपा

अजय साह ने कहा कि डीजीपी की नियुक्ति के लिए सेवा विस्तार या सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की पूरी शक्ति केंद्र के पास है. हालांकि, झामुमो प्रवक्ता ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया. इससे यह स्पष्ट होता है कि वे केवल तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश में डीजीपी की नियुक्ति नियम विरुद्ध नहीं – अजय साह

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में हाल ही में डीजीपी की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यूपीएससी पैनल के माध्यम से की गयी. जेएमएम प्रवक्ता को उत्तर प्रदेश का ठीक से अध्ययन करना चाहिए. उत्तर प्रदेश सरकार ने नियम विरुद्ध डीजीपी की नियुक्ति नहीं की है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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