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झारखंड ने मांगे कोरोना टीका के 50 हजार डोज, मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की मांग

Updated at : 08 Apr 2023 4:54 AM (IST)
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झारखंड ने मांगे कोरोना टीका के 50 हजार डोज, मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की मांग

कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक की. इस दौरान झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कोरोना टीका के 50 हजार डोज की मांग केंद्रीय मंत्री से की.

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Jharkhand News: कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की. इसमें झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी शामिल हुए़ उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि राज्य में अभी 51 एक्टिव केस हैं. सभी में हल्के लक्षण पाये गये हैं, जिनका होम आइसोलेशन में इलाज हो रहा है. मंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए राज्य के पास पर्याप्त टीका नहीं है, इसलिए तत्काल टीका का 50 हजार डोज उपलब्ध कराया जाये.

आरटीपीसीआर लैब की स्वीकृति प्रदान कराने का आग्रह

मंत्री श्री गुप्ता ने आईसीएमआर से खूंटी, लोहरदगा, कोडरमा और पाकुड़ में कोविड जांच के लिए आरटीपीसीआर लैब की स्वीकृति प्रदान कराने का आग्रह किया. इसके अलावा डॉ मांडविया को बताया गया कि कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर नौ अप्रैल को सभी डीसी, सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधि और प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जायेगी. 10 और 11 अप्रैल को सभी सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में कोविड की तैयारी को लेकर मॉक ड्रिल होगा. सभी जिलों में ऑक्सीजन, बेड, मेडिसिन और ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता की समीक्षा की जायेगी. वहीं, धनबाद व जमशेदपुर में नये सरकारी नर्सिंग कॉलेज खालने, ब्लड सेपरेशन मशीन और पीएसए प्लांट के रखरखाव के लिए एनएचएम से राशि उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया गया.

कोरोना के नये वैरिएंट XBB.1.16 का खतरा बढ़ा

कोरोना के नये वैरिएंट XBB.1.16 के बढ़ते खतरा को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने राज्यों को कोरोना से निबटने के लिए तैयार रहने को कहा है. इधर, झारखंड में रोजाना सिर्फ 1000-1500 सैंपल की ही जांच हो रही है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच होने से कोरोना के नये वैरिएंट की पहचान हो जाती, लेकिन जांच नहीं हो पा रही है़ वहीं, रिम्स के जीनोम सीक्वेंसिंग विभाग का कहना है कि उनके पास पर्याप्त सैंपल ही नहीं है, जिसकी जांच करायी जाये. जांच के लिए कम से कम 96 सैंपल होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में विभाग के पास सिर्फ दो सैंपल ही है.

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रिम्स को इंसाकॉग की सदस्यता मिली

रिम्स के जेनेटिक एंड जीनोमिक्स विभाग को भारतीय सार्स-कोविड-टू जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इंसाकॉग) की सदस्यता मिल गयी है. सदस्यता मिलने के साथ ही अब विभाग को कोरोना सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट प्रतिदिन आइसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय को देनी होगी. जांच नहीं होने पर भी इंसाकॉग को अवगत कराना होगा.

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