झारखंड के महालेखाकार ने शिवशक्ति इंटरप्राइजेज को माइनिंग लीज आवंटित करने के मामले में क्यों मांगी रिपोर्ट

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प्रधान महालेखाकार की ओर से खान आयुक्त को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि शिवशक्ति इंटरप्राइजेज ने साहिबगंज में माइनिंग लीज के लिए नौ सितंबर 2017 को आवेदन दिया था

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महालेखाकार (एजी) ने शिवशक्ति इंटरप्राइजेज को माइनिंग लीज आवंटित करने के मामले में हुई गड़बड़ी के सिलसिले में खान आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है. मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ पिंटू की इस कंपनी को माइनिंग लीज आवंटित करने के लिए जिला खनन पदाधिकारी ने उपायुक्त को भेजे गये प्रस्ताव में खान आयुक्त के कोर्ट के आदेश का गलत उल्लेख किया. साथ ही उपायुक्त ने इसे स्वीकार करते हुए लीज आवंटन के आवेदन को स्वीकृत कर लिया. नियमानुसार, इस मामले में पिंटू के पुराने आवेदन को शामिल करने के बदले नये सिरे से नीलामी होनी चाहिए.

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प्रधान महालेखाकार की ओर से खान आयुक्त को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि शिवशक्ति इंटरप्राइजेज ने साहिबगंज में माइनिंग लीज के लिए नौ सितंबर 2017 को आवेदन दिया था. उसे सात अक्तूबर 2017 को एलओआइ (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया गया. नियमानुसार, एलओआइ मिलने के 180 दिनों के अंदर सिया (दि स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी) से इंवायरमेंटल क्लियरेंस लेकर लीज स्वीकृति के लिए जमा करना है.

इस निर्धारित समय सीमा के अंदर माइनिंग प्लान व इंवायरमेंटल क्लियरेंस नहीं जमा करने पर एलओआइ रद्द माना जाता है. पिंटू ने इस नियम के विपरीत करीब दो साल बाद यानी 15 अक्तूबर 2019 को सिया में इंवायरमेंटल क्लियरेंस के लिए आवेदन दिया. सिया ने आठ नवंबर 2019 को पिंटू की कंपनी के पक्ष में इंवायरमेंटल क्लियरेंस जारी किया.

इसके बाद सरकार ने सितंबर 2020 के अंतिम सप्ताह में झारखंड माइनर मिनरल कनसेशन रूल में संशोधन कर दिया. इसमें यह प्रावधान किया गया अगर 180 दिनों में माइनिंग प्लान व इंवायरमेंटल क्लियरेंस जमा करने में आवेदक की कोई गलती नहीं हो और लीज से संबंधित आवेदन का निबटारा नहीं किया गया हो, तो आयुक्त मेरिट के आधार पर फैसला ले सकते हैं.

नियम में संशोधन के 21 दिन के बाद रिवीजन का आवेदन : रूल में किये गये इस संशोधन के 21 दिनों बाद, 19 अक्तूबर 2020 को पिंटू ने खान आयुक्त के कोर्ट में रिवीजन के लिए आवेदन दिया. आयुक्त ने इस मामले को उपायुक्त को रेफर कर दिया. उपायुक्त ने जिला खनन पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी. इसके बाद जिला खनन पदाधिकारी ने पिंटू की कंपनी को लीज देने के लिए 30 दिसंबर 2020 को उपायुक्त अपना प्रस्ताव भेजा.

इसमें तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया. जिला खनन पदाधिकारी ने लिखा कि खान आयुक्त ने 22 दिसंबर 2020 को अपने आदेश में यह पाया कि देर से इंवायरमेंटल क्लियरेंस मिलने में आवेदक की कोई गलती नहीं है. उपायुक्त ने इसे स्वीकार करते हुए पिंटू की कंपनी के पक्ष में तीन फरवरी 2021 को लीज स्वीकृत कर दिया. इस पूरे प्रकरण हुई गड़बड़ी के मद्देनजर महालेखाकार ने यह जानना चाहा है कि क्या सितंबर 2020 में माइनिंग मिनरल कनसेशन रूल में किया गया संशोधन पिछली तिथि से प्रभावी होगा? साथ ही यह भी जानना चाहा है कि क्या माइनिंग लीज के लिए नये सिरे से नीलामी की प्रक्रिया से बचने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.

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