JAC में नियम विरुद्ध कार्य का आरोप, वित्तपोषित शिक्षण संस्थाओं ने दी हाइकोर्ट जाने की चेतावनी
रांची स्थित झारखंड अधिविद्य परिषद का कार्यालय. फाइल फोटो.
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) में अनियमितताओं के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है. अधिकारियों को तत्काल हटाने और लंबित मांगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर वे सड़कों पर उतरने को तैयार हैं.
Ranchi News: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) में अधिनियम और नियमावली के अनुरूप काम नहीं होने का आरोप लगाते हुए झारखंड राज्य वित्तपोषित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है. मोर्चा ने JAC में वित्त पदाधिकारी, एकेडमिक ऑफिसर और विशेष कार्य पदाधिकारी के पद पर कार्यरत अधिकारियों को तत्काल हटाने की मांग की है.
जैक में कार्यरत 10 अधिकारियों को हटाने की मांग
मोर्चा का आरोप है कि नियुक्ति के समय इन अधिकारियों के पास अधिनियम के अनुसार निर्धारित अर्हता नहीं थी. इसके बावजूद वे पिछले करीब 10 वर्षों से JAC में कार्यरत हैं और वेतन प्राप्त कर रहे हैं. मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों को नहीं हटाया गया, तो चालू सप्ताह में झारखंड हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जायेगी. मोर्चा का कहना है कि यह मामला तीन बार विधानसभा में भी उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
शिक्षक दिवस पर लोक भवन के सामने होगा प्रदर्शन
विभिन्न मांगों और समस्याओं के विरोध में मोर्चा ने पांच सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर लोक भवन के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए 18 अगस्त से मोर्चा के प्रतिनिधियों का राज्यस्तरीय दौरा शुरू होगा. इस दौरान विभिन्न जिलों में शिक्षाकर्मियों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों से संपर्क कर प्रदर्शन में भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जायेगा.
संगठनों के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक
यह निर्णय सोमवार को चारों घटक संगठनों के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक में लिया गया. बैठक में रघुनाथ सिंह, फजलुल कदीर अहमद, संजय कुमार, नरोत्तम सिंह, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, गणेश महतो, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, अरविंद सिंह, मनीष कुमार, मनोज तिर्की, अनिल तिवारी, रघु विश्वकर्मा और विनय उरांव समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.
प्रस्वीकृति समिति और वित्त समिति के काम पर भी सवाल
मोर्चा ने JAC की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल उठाये हैं. उसका आरोप है कि JAC में प्रस्वीकृति समिति और वित्त समिति का गठन या संचालन प्रभावी रूप से नहीं हो रहा है. सीटों का निर्धारण नहीं किया जा रहा है और नियमों के अनुसार समितियों की बैठकें भी नहीं हो रही हैं.
स्कूल-कॉलेजों की प्रस्वीकृति का मामला लंबित
मोर्चा के अनुसार, समय पर शासी निकाय का गठन नहीं होने के कारण 50 से अधिक स्कूल-कॉलेजों की प्रस्वीकृति का मामला लंबित है. इसके अलावा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में पिछले छह माह से अधिक समय से करीब 30 स्कूल-कॉलेजों की प्रस्वीकृति से जुड़े मामले लंबित हैं. इससे संबंधित संस्थानों के प्राचार्य, शिक्षक और कर्मचारी लगातार परेशान हैं.
75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि का मामला भी लंबित
वित्तपोषित शिक्षण संस्थाओं ने 75 प्रतिशत अनुदान में वृद्धि से संबंधित संलेख पर अब तक कैबिनेट की सहमति नहीं मिलने का भी विरोध किया है. मोर्चा का आरोप है कि इस संबंध में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है. इसके अलावा, कार्मिक विभाग की ओर से जारी पत्र पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा अब तक कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया गया है. मोर्चा ने सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना को लेकर सदन में दिये गये आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर भी नाराजगी जतायी है.
JAC में उपाध्यक्ष और 13 बोर्ड सदस्यों के पद रिक्त
मोर्चा ने JAC के बोर्ड में रिक्त पदों को लेकर भी सवाल उठाया है. उसके अनुसार, JAC में उपाध्यक्ष का पद पिछले 18 माह से खाली है. वहीं 15 मई 2026 से JAC बोर्ड के 13 सदस्यों के पद भी रिक्त हैं. 19 सदस्यीय बोर्ड में फिलहाल केवल पांच सदस्य बचे हैं. मोर्चा का कहना है कि उपाध्यक्ष और बड़ी संख्या में सदस्यों के पद खाली रहने के कारण नीतिगत निर्णय प्रभावित हो रहे हैं. बोर्ड का कोरम भी पूरा नहीं हो पा रहा है. इसके चलते कई महत्वपूर्ण कार्यों पर असर पड़ रहा है.
छह माह से समितियों की बैठक नहीं
मोर्चा के अनुसार, JAC की वित्त समिति और स्थापना समिति की बैठकें पिछले छह माह से नहीं हुई हैं. इसका सीधा असर परिषद से जुड़े कामकाज पर पड़ रहा है. संगठन का आरोप है कि परीक्षक नियुक्ति, मॉडरेशन बोर्ड के गठन और अन्य प्रक्रियाओं में भी JAC अधिनियम, नियमावली और परीक्षा नियमावली का पालन नहीं किया जा रहा है. नये पाठ्यक्रम या सिलेबस में बदलाव से जुड़े काम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं. समितियों की बैठक नहीं होने और बोर्ड में पर्याप्त सदस्यों के नहीं रहने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने का दावा किया गया है.
स्कूल-कॉलेजों के काम प्रभावित होने का दावा
मोर्चा ने कहा है कि JAC की वर्तमान व्यवस्था का सबसे अधिक असर स्कूल-कॉलेजों पर पड़ रहा है. प्रस्वीकृति के मामलों के लंबित रहने से संस्थानों के प्राचार्य, शिक्षक और कर्मचारी परेशान हैं और उन्हें अपने काम के लिए बार-बार JAC कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
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मोर्चा ने शुरू की आंदोलन की तैयार
अब मोर्चा ने एक ओर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाइकोर्ट जाने की चेतावनी दी है. पांच सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन और उससे पहले शुरू होने वाला राज्यस्तरीय दौरा इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा. दूसरी तरफ, आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या JAC का पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है. इसलिए मोर्चे के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
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