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झारखंड में IPL के मैचों पर लग रहा है करोड़ों का सट्टा, नशे की तरह युवाओं में तेजी से बढ़ रही है इसकी लत

Updated at : 12 Apr 2024 10:07 PM (IST)
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झारखंड में IPL के मैचों पर लग रहा है करोड़ों का सट्टा, नशे की तरह युवाओं में तेजी से बढ़ रही है इसकी लत

IPL Betting

झारखंड में IPL के मैचों पर करोड़ों का सट्टा लग रहा है. नशे की तरह युवाओं में इसकी लत तेजी से बढ़ रही है. सट्टे का पूरा कारोबार मोबाइल के जरिये चल रहा है.

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रांची: मटका की तर्ज पर अब झारखंड में आइपीएल मैचों पर करोड़ों रुपये का सट्टा रोज लग रहा है. नशे की तरह युवाओं में सट्टे की लत भी तेजी से बढ़ रही है. टीमों की जीत, टीमों द्वारा बनाए गए कुल रन, अलग-अलग खिलाड़ियों के रन, प्रत्येक बॉल पर बनने वाले रन, आउट होने वाले खिलाड़ी आदि पर दांव लगाया जा रहा है. सटोरियों में बड़ी संख्या युवाओं की है. विभिन्न साइटों व मोबाइल ऐप के अलावा बुकियों द्वारा भी खाता खोल कर सट्टा खेलाया जा रहा है. सट्टे का पूरा कारोबार मोबाइल के जरिये चल रहा है.

सिंडिकेट कर रहा है अवैध कारोबार
राज्य में आइपीएल सट्टे का अवैध कारोबार सिंडिकेट कर रहा है. सिंडिकेट के बुकी कमीशन के आधार पर सट्टेबाजी का पैसा जमा करते हैं और दांव जीतने पर बढ़ी हुई रकम लौटाते भी हैं. बुकी को मोहल्लों के हिसाब से जिम्मा दिया जाता है. बुकी द्वारा नकद, फोन पे, गूगल पे व पेटीएम आदि के माध्यम से रुपये लिये जाते हैं. सट्टा खेलने के लिए बुकी को एडवांस देकर अपना अकाउंट खुलवाना पड़ता है. एडवांस की राशि 100 रुपये से एक लाख रुपये तक हो सकती है. खाता खोलने और उसके बाद सट्टे में हर बार लगायी जाने वाली राशि का कमीशन भी बुकी को मिल जाता है.

युवाओं को फंसा रहे हैं सूदखोर
युवाओं को सट्टे में पैसा लगाने के लिए सूदखोर भी प्रोत्साहित करते हैं. छोटे स्तर पर छिप कर सूद का काम करने वाले स्थानीय लोग युवाओं को भारी ब्याज पर सट्टा खेलने के लिए रुपये उधार देते हैं. बाद में ब्याज समेत पूरी रकम लौटाने का दबाव बनाते हैं. दबाव की वजह से पहले युवा दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेते हैं और फिर बाद में अपने घर के अलावा परिचितों के यहां भी चोरी करने से भी गुरेज नहीं करते हैं.

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हाइटेक सटोरिये पुलिस की पकड़ से बाहर
आइपीएल सट्टे का बाजार काफी हाइटेक है. इंटरनेट पर सट्टा लगाने के लिए दर्जनों प्लेटफॉर्म मौजूद हैं. स्थानीय स्तर पर भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर सट्टा खेलाया जा रहा है. ज्यादातर प्लेटफॉर्म का मुख्यालय भारत से बाहर बताया जाता है. इसके बलावा बुकी भी लगातार सिमकार्ड भी बदलते हैं. इन कारणों से सटोरिये पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. राज्य में अब तक सट्टे के अवैध कारोबार का खुलासा नहीं किया जा सका है.

केस स्टडी : 01
अपर बाजार के प्रतिष्ठित व्यवसायी के पुत्र को आइपीएल सट्टे की लत लग गयी. शुरू में उसने कुछ रकम जीती. मैच के दौरान वह फोन पर लगातार व्यस्त रहता. फिर लालच में आकर बड़ा दांव खेलने लगा. हारने पर दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिया. फिर सूदखोरों से पैसे उठा कर सट्टे में लगाने लगा. कुछ दिनों बाद उसके घर पर अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का आना-जाना शुरू हो गया. अभिभावकों के पूछने पर लड़के ने घर वालों को सट्टे और उधार के बारे में बताया. घर वालों ने लड़के को कभी सट्टा न खेलने की कसम खिला कर उधार चुकाया. मगर कुछ दिनों बाद फिर से उधार लौटाने का तकादा करने लोग घर पहुंचने लगे. पता चला उधार ली गयी राशि लाखों में है. लड़के को पूछने पर वह याद नहीं होने और खुद की जान देने की बात करने लगा. सामाजिक कारणों से व्यवसायी पुलिस के पास नहीं जाकर लड़के को अपने रिश्तेदार के पास राज्य के बाहर भेज दिया. अब भी सूदखोर लड़के की तलाश करते हुए घरवालों से राशि की मांग कर रहे हैं.

केस स्टडी : 02
शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाला कांके रोड निवासी छात्र काफी उदास रहने लगा. उसने घर से निकलना बंद कर दिया. बीमारी का बहाना बना कर कई दिनों तक स्कूल नहीं गया. दिन भर अपने कमरे में बंद रहने लगा. माता-पिता के काफी पूछने पर उसने बताया कि वह काफी दिनों से आइपीएल में सट्टा लगाता रहा है. शुरू में जीता. जीत के पैसों से दोस्तों के साथ पार्टी की. लेकिन फिर वह हारने लगा. पैसे नहीं रहने पर घर से कुछ सामान भी चोरी कर बेच दिया. उसने बताया कि सट्टा खेलने के दौरान कुछ लोगों से जान-पहचान हुई. उन्होंने सूद पर पैसे उधार दिये. अब वो लाखों रुपये का ब्याज जोड़ कर पैसे वापस लौटाने का दबाव बना रहे हैं. पैसे नहीं देने पर मारने-पीटने की धमकी भी दे रहे हैं. लड़के के पिता एक निजी कंपनी में काम करते हैं. उनको समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाये.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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