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झारखंड के हीरामन ने तैयार किये कोरवा भाषा की डिक्शनरी, 'मन की बात' में पीएम मोदी ने सराहा

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : पीएम मोदी ने कोरवा भाषा की डिक्शनरी तैयार करने पर गढ़वा के हीरामन कोरवा के कार्यों की सराहना की.
Jharkhand news : पीएम मोदी ने कोरवा भाषा की डिक्शनरी तैयार करने पर गढ़वा के हीरामन कोरवा के कार्यों की सराहना की.
सोशल मीडिया.

Jharkhand news, Ranchi news, रांची : झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत रंका के सिंजो गांव निवासी हीरामन कोरवा (35 वर्ष) ने 12 साल की कड़ी मेहनत से कोरवा भाषा की डिक्शनरी तैयार की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में हीरामन के कार्यों की सराहना की है. हीरामन द्वारा तैयार कोरवा भाषा के इस डिक्शनरी की खास बात है कि दैनिक जीवन में उपयोग किये जाने वाले कई शब्दों को इसमें शामिल किया है. कोरवा भाषा को संरक्षित और समृद्ध करने में मदद मिलने के उद्देश्य से हीरामन ने इस डिक्शनरी को तैयार किया है.

पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में गढ़वा के हीरामन के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह देश के लिए एक अच्छा उदाहरण है. हीरामन ने काेरवा जनजाति के लिए जो कार्य किया, वह प्रशंसनीय है. हीरामन कोरवा ने आदिम जनजाति कोरवा भाषा के संरक्षण के उद्देश्य से कोरवा भाषा की डिक्शनरी तैयार की है.

12 साल में तैयार हुई डिक्शनरी

बता दें कि हीरामन ने 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद कोरवा डिक्शनरी को तैयार किया है. 50 पन्नों के इस डिक्शनरी में घर-गृहस्थी से जुड़े शब्द से लेकर, अनाज, सब्जी, फल, पशु-पक्षी, रंग, दिन, महीना, खाद्य पदार्थ सहित अन्य कोरवा भाषा के शब्द और उसके अर्थ को इस डिक्शनरी में शामिल किया है.

पेशे से पारा टीचर हैं हीरामन

पेशे से पार टीचर हीरामन कोरवा को बचपन से ही कोरवा जनजाति के लिए कुछ करने की इच्छा थी. विलुप्त होते कोरवा जनजाति और लोगों के बीच कोरवा भाषा को भूलने की टीस हमेशा बरकरार रही. हीरामन बचपन से ही कोरवा भाषा को एक जगह लिखने की कोशिश शुरू की. आर्थिक तंगी होने के कारण हीरामन को कोरवा भाषा के डिक्शनरी को तैयार करने में करीब 12 साल लग गये. हीरामन के मुताबिक, आदिम जनजाति कल्याण केंद्र, गढ़वा और पलामू के मल्टी आर्ट एसोसिएशन के सहयोग से इस डिक्शनरी को लोगों के बीच लाया जा सका.

कोरवा जनजाति की आबादी

बता दें कि देश में जनजातियों की आबादी करीब 8.2 फीसदी है. झारखंड में 32 जनजातियां हैं, जिसमें 9 जनजातियां विलुप्त हो रहे कोरवा सहित अन्य जनजातियों की श्रेणी में आती है. वर्ष 1911 में बिहार में कोरवा जनजाति की जनसंख्या 13,920 थी. वहीं, वर्ष 1931 में इसकी जनसंख्या में गिरवाट आयी और संख्या 13,021 पहुंच गयी. लेकिन, वर्ष 1961 में इसकी जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई और संख्या 21,162 पहुंच गयी. वर्ष 1971 में इसकी जनसंख्या 18,717 पहुंच गयी. वर्ष 1981 की जनगणना में कोरवा जनजाति की आबादी 21,940 थी. वहीं, झारखंड बनने के बाद वर्ष 2011 की जनगणना में राज्य में कोरबा जनजाति की आबादी 35,606 है.

Posted By : Samir Ranjan.

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