Shibu Soren Birthday : शिबू सोरेन के जन्मदिन पर बोले हेमंत सोरेन, झारखंड में क्षमता की कमी नहीं, चेतना से ही आगे बढ़ेगा राज्य
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 Jan 2021 7:07 AM
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्मदिन पर उनके संघर्ष से जुड़ी तीन पुस्तकों का सीएम ने किया लाेकार्पण
Hemant soren, hemant soren book launch रांची : झारखंड में क्षमता की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ चेतना की. सभी में चेतना आ जाये, तो राज्य को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है. ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को आर्यभट्ट सभागार में राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के जन्मदिन पर उनके संघर्ष से जुड़ी तीन पुस्तकाें के लाेकार्पण समारोह में कहीं.
इस मौके पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने मंच पर ही जन्मदिन का केक भी काटा. सीएम हेमंत ने उन्हें केक भी खिलाया. मौके पर गुरुजी के दूसरे पुत्र व विधायक बसंत सोरेन भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में आज का दिन गुरुजी और पुस्तक के लेखक अनुज कुमार सिन्हा का है. लेखक ने इस वीर भूमि के इतिहास को संजो कर युवाओं के साथ-साथ बच्चों को भी इतिहास को समझाने का प्रयास किया है. सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार झारखंड की आंतरिक और बाह्य क्षमता को करीब से देख रही है.
यह प्रयास किया जा रहा है कि जिस उद्देश्य से हमारे पूर्वजों ने अलग झारखंड राज्य के लिए जंग लड़ी, इतिहास बनाया, उन सपनों को कैसे पूरा किया जाये. राज्य में क्षमता की नहीं, बल्कि चेतना की कमी है. अगर वह चेतना हम जगा पाये, तो निश्चित रूप से झारखंड आनेवाले समय में आंतरिक और बाह्य क्षमता से देश के अग्रणी राज्यों से आगे जा सकता है.
सीएम ने कहा कि झारखंड छोटा प्रदेश जरूर है, लेकिन यहां निवास करनेवाले हर समुदाय और वर्ग में गर्व करनेवाली शक्ति मौजूद है. झारखंड में निवास करनेवाले लोगों ने संघर्ष किया है. संघर्ष के प्रारंभिक दिनों में शिक्षा का अभाव था. यही वजह रही कि कई लोगों की गाथा सहेज कर नहीं रखी गयी, लेकिन समाज में कई ऐसे लोग भी रहे, जिन्होंने इस संघर्ष को करीब से देखा, समझा और उसे संजोकर रखने का प्रयास किया. कुछ लोग अपने संघर्ष की ऐसी छाप लोगों के दिलों में छोड़ते हैं कि उन्हें कागजों में उतारना गौरव की बात होती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में हमेशा से संघर्ष की परंपरा रही है. शोषण के खिलाफ हमेशा आवाज उठायी गयी. जब देश आजादी के सपने नहीं देखता था, उस समय से यहां के लोगों ने संघर्ष का इतिहास लिखना प्रारंभ किया था. यहां के लोगों में संघर्ष करने की शैली अलग-अलग रही, जिसमें उन्होंने अपनी दक्षता का प्रदर्शन कर जंग जीता है.
इन पुस्तकों का हुआ लोकार्पण : राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की जीवनी पर आधारित हैं यें पुस्तकें
दिशाेम गुरु : शिबू साेरेन (हिंदी)
ट्राइबल हीराे : शिबू साेरेन (अंग्रेजी)
सुनाे बच्चो, आदिवासी संघर्ष के नायक शिबू साेरेन (गुरुजी) की गाथा (चित्रकथा)
कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक व वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा व प्रकाशक पीयूष कुमार ने भी अपने विचार रखे. समारोह में मंत्री चंपई सोरेन, डॉ रामेश्वर उरांव, मिथिलेश कुमार ठाकुर, बन्ना गुप्ता, बादल, सत्यानंद भोक्ता, विधायक मथुरा महतो, मंगल कालिंदी, इरफान अंसारी और ममता देवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.
राज्यसभा सदस्य शिबू सोरेन ने कहा कि सकारात्मक प्रयास करने से ही बदलाव होगा. उन्होंने कहा कि पुस्तक में महाजनी आंदोलन के संबंध में लिखा गया है. इस प्रथा का अंत भी हुआ. झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन किया, जिसकी बदौलत आज हम सब अलग झारखंड राज्य में हैं. लेकिन अभी तक आदिवासियों, किसानों, मजदूर कमोबेश लाभान्वित नहीं हो सके हैं.
श्री सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ उनके द्वारा चलाये गये आंदोलन की विस्तार से जानकारी दी . उन्होंने बताया कि कैसे उस वक्त आदिवासियों की जमीन होती थी, पर उपज पर महाजनों का कब्जा होता था. पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहां के आदिवासी महाजनों के चंगुल में फंसे हुए थे. उन्होंने लोगों को एकजुट किया. फिर महाजनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए धान काटो अभियान चलाया था. महाजनों द्वारा मुकदमे किये गये, पर हजारों लोगों के आंदोलन में शामिल होने के कारण केस कोर्ट में ठहर नहीं पाता था. उन्हें जेल भी जाना पड़ा. उनके साथ बड़ी संख्या में लोग जेल गये.
सरकार को भी झुकना पड़ा. बाद में महाजनों ने भी इन बातों को समझा और फिर खेतों में फसलों पर अधिकार खेत मालिक का ही होने लगा. महाजनों को जीने-खाने भर अनाज दिया जाता था. उन्होंने बताया कि सैकड़ों मुकदमे लड़े गये. फिर एक दिन मेहनत करनेवालों के खेत से धान खलिहान में और फिर खलिहान से घर आया.
श्री सोरेन ने बताया कि शिक्षा को लेकर भी जागरूकता से संबंधित कई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. शराब-हड़िया के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया गया. इसकी रोकथाम के लिए प्रयास बोलने से नहीं, करने से होगा. श्री शिबू सोरेन ने कहा कि जंगलों को संरक्षित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जंगल संरक्षण के लिए भी उन्होंने आंदोलन किया. पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है. जंगल बचाओ आंदोलन जरूरी है. जंगल रहेगा, तभी सभी रहेंगे.
Posted By : Sameer Oraon
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