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डेढ़ लाख प्रवासियों को घर पहुंचाया, अब झारखंड के लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी में हेमंत सोरेन सरकार

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.
फाइल फोटो

रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सुदूरवर्ती क्षेत्रों में लॉकडाउन में फंसे अपने नागरिकों को एयरलिफ्ट करने का फैसला किया है. इसके लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से विमान सेवा को मंजूरी देने की अपील की है. झारखंड सरकार ने सबसे पहले अपने प्रवासी श्रमिकों को अपने लाने की पहल की थी.

हेमंत सोरेन के आग्रह पर ही तेलंगाना से झारखंड तक पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन चली थी. इसके बाद अन्य राज्यों ने भी ऐसा आग्रह किया और देश के 25 लाख से अधिक प्रवासी अब तक ट्रेन से अपने घर पहुंच चुके हैं. अब सरकार 100 जोड़ी ट्रेनें शुरू करने जा रही है, जो लोगों को अपने घर पहुंचने में मदद करेगी.

झारखंड सरकार ने अपने घर आ रहे प्रवासियों के लिए विशेष इंतजाम किये. स्पेशल ट्रेन से अलग-अलग राज्यों से यहां पहुंचे प्रवासियों और श्रमिकों को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की. वह भी बिल्कुल मुफ्त. राज्य से सटी सीमाओं पर फंसे लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के अलावा उन लोगों के लिए भी प्रशासन को वाहन के इंतजाम करने के निर्देश दिये, जो पैदल अपने घर जा रहे थे.

राज्य सरकार ने लोगों को अपने घर पहुंचाने का पूरा खर्च वहन किया है. ट्रेन टिकट से लेकर झारखंड में उनके घर तक पहुंचाने के लिए किसी से पैसे नहीं लिये. अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि अंडमान-निकोबार, लद्दाख और उत्तर पूर्व के राज्यों में फंसे झारखंड के श्रमिकों को लाने के लिए चार्टर्ड प्लेन के संचालन की अनुमति दें.

हेमंत सोरेन ने गृह मंत्री से कहा है कि इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से श्रमिकों को बस या ट्रेन से लाना संभव नहीं है. इसलिए वह चाहते हैं कि अपने राज्य के लोगों को एयरलिफ्ट करके उनके घर तक पहुंचायें, ताकि वे संकट की इस घड़ी में अपने लोगों के करीब रहें. हेमंत सोरेन ने 12 मई, 2020 को भी गृह मंत्री अमित शाह से ऐसी ही अपील की थी.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के करीब डेढ़ लाख श्रमिक, छात्र व अन्य लोगों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है. लद्दाख में करीब 200, पूर्वोत्तर के राज्यों में करीब 450 श्रमिक अब भी फंसे हुए हैं. इन्हें सड़क मार्ग से लाना संभव नहीं है. इसलिए सरकार चाहती है कि इन्हें हवाई जहाज से वापस लाया जाये. राज्य सरकार चार्टर्ड विमान का खर्च वहन करने के लिए तैयार है.

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