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झारखंड: पद्मश्री बलबीर दत्त की पुस्तक 'भारत विभाजन और पाकिस्तान के षड्यंत्र' का हरिवंश ने किया लोकार्पण

Updated at : 25 Sep 2023 7:56 PM (IST)
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झारखंड: पद्मश्री बलबीर दत्त की पुस्तक 'भारत विभाजन और पाकिस्तान के षड्यंत्र' का हरिवंश ने किया लोकार्पण

राज्सभा के उपसभापति हरिवंश ने पुस्तक लोकार्पण के मौके पर कहा कि देश में दो ही पत्रकार मुझे मिले, जिनके पास निजी तथ्य हैं. प्रामाणिक दस्तावेज हैं. एक बलबीर दत्त हैं और दूसरे पटना के सुरेंद्र किशोर हैं. बलबीर दत्त ने अपनी किताब में प्रामाणिकता के साथ लिखा है कि देश के बंटवारे में जिन्ना एक माध्यम थे.

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रांची: राज्सभा के उपसभापति हरिवंश ने पद्मश्री बलबीर दत्त की पुस्तक ‘भारत विभाजन और पाकिस्तान के षड्यंत्र’ का लोकार्पण किया. रांची के चेंबर भवन में आयोजित पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अथक साधना, शोध, तप, अध्ययन और संधान के बाद बनी है. बलबीर दत्त की पहचान भी वही है. बहुत डूबकर, खोजकर, अध्ययन और शोध के बाद वो चीजों को लिखते हैं. उसी क्रम में इस पुस्तक की रचना की गयी है. यह पुस्तक नयी पीढ़ी के लिए और वैसे सभी लोगों के लिए उपयोगी है, जो अपने काम को अच्छी तरह से संपन्न करना चाहते हैं. यह हमारे अतीत ही नहीं, वर्तमान और भविष्य को भी प्रभावित करता है. हरिवंश ने कहा कि बलबीर दत्त का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ. विभाजन के दंश को उन्होंने करीब से देखा है. इसलिए उनकी किताब में प्रामाणिकता और दर्द साफ झलकता है. इतिहास लेखन में बहुत सारी चीजें छोड़ दी गयी हैं. हमें इतिहास को समझने के लिए बहुत सारे दृष्टिकोण रखने चाहिए क्योंकि ब्रिटेन और बाकी देश भारत का विभाजन कराने में जुटे हुए थे. आज भी जब बड़े मौके आते हैं, तो पश्चिम के देश किसी भी रूप में यह नहीं चाहते हैं कि पूर्व के देश अपनी ताकत और अस्मिता के साथ दुनिया के शीर्ष पर पहुंचें.

बलबीर दत्त व सुरेंद्र किशोर के पास प्रामाणिक दस्तावेज

राज्सभा के उपसभापति हरिवंश ने पुस्तक लोकार्पण के मौके पर कहा कि देश में दो ही पत्रकार मुझे मिले, जिनके पास निजी तथ्य हैं. प्रामाणिक दस्तावेज हैं. एक बलबीर दत्त हैं और दूसरे पटना के सुरेंद्र किशोर हैं. बलबीर दत्त ने अपनी किताब में प्रामाणिकता के साथ लिखा है कि देश के बंटवारे में जिन्ना एक माध्यम थे. औजार थे. वैसे अंग्रेजों ने अपनी लंबी योजना के तहत मुस्लिम लीग की स्थापना करायी थी. पुस्तक रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है. उन्होंने कहा कि इतिहास लेखन में बहुत सारी चीजें छोड़ दी गयी हैं. हमें इतिहास को समझने के लिए बहुत सारे दृष्टिकोण रखने चाहिए क्योंकि ब्रिटेन और बाकी देश भारत का विभाजन कराने में जुटे हुए थे. आज भी जब बड़े मौके आते हैं, तो पश्चिम के देश किसी भी रूप में यह नहीं चाहते हैं कि पूर्व के देश अपनी ताकत और अस्मिता के साथ दुनिया के शीर्ष पर पहुंचें और उसमें पाकिस्तान उनका साझेदार बनता है.

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भारत विरोध के वजूद पर टिका है पाकिस्तान

हजारों वर्षों की सभ्यता वाला भारत उनकी आंखों में चूभता रहता है और यही कारण है कि हमेशा से इसे कमजोर करने की साजिश होती रही है. राज्सभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि उसका माध्यम पाकिस्तान बनता है. भारत विरोध के वजूद पर पाकिस्तान टिका है. जब बलबीर दत्त की किताब को पढ़ेंगे, तो इसके प्रमाण मिलेंगे.

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बलबीर दत्त की पुस्तक है वर्तमान और भविष्य का दर्पण

हरिवंश ने बलबीर दत्त की पुस्तक को वर्तमान और भविष्य का दर्पण बताया. उन्होंने कहा कि पुस्तकें ही जीवन, समाज और देश को बदलती हैं. इस पुस्तक में एक मैसेज आज के पत्रकारों के लिए भी है कि किस तरह से प्रामाणिकता के साथ चीजें लिखी जाती हैं. सभी को बलबीर दत्त से प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे एक पत्रकार भाषा और तथ्यों को लेकर सजग होता है.

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इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत: बलबीर दत्त

अपनी पुस्तक भारत विभाजन और पाकिस्तान के षड्यंत्र के लोकार्पण के मौके पर पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि अब समय आ गया है कि इतिहास का पुनर्लेखन किया जाना चाहिए. बहुत सारे तथ्य इतिहास में छूट गये हैं. उसे समय और नयी पीढ़ी के सामने लाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के विभाजन के पीछे मोहम्मद अली जिन्ना का हाथ है, लेकिन इस बात को बहुत कम ही लोग जानते हैं कि जिन्ना तो केवल एक मोहरा थे. इस खेल के पीछे तो अंग्रेजों का हाथ रहा है. ऐसे कई तथ्य आज भी इतिहास में दबा दिए गए हैं, जिनको आज सामने लाने की दरकार है.

विभाजन का दंश जिसने करीब से देखा, वही दर्द समझ सकता है: इंदर सिंह नामधारी

झारखंड के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि विभाजन के दंश को जिसने करीब से देखा है, उसके दर्द को वही समझ सकता है. उन्होंने बताया कि जब देश का विभाजन हो रहा था, उस समय वह मात्र 7 साल के थे और बलबीर दत्त 12 साल के थे. हम दोनों ने विभाजन को करीब से देखा है. उस मंजर को हम कभी नहीं भूल सकते हैं. कैसे लोगों का कत्लेआम कर दिया जा रहा था. पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने मौजूदा राजनीति पर चिंता जाहिर की और कहा कि अगर देश को आगे ले जाना है, तो धर्म और जाति की राजनीति से ऊपर उठना होगा.

लोकार्पण कार्यक्रम में ये थे मौजूद

रांची के चेंबर भवन में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में राज्सभा सांसद महुआ माजी, रांची विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन के निदेशक विनोद कुमार समेत अन्य मौजूद थे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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