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अल्प संख्यक कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मियों को सातवां वेतन मान दें:हाइकोर्ट

Updated at : 18 May 2024 2:57 PM (IST)
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अल्प संख्यक कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मियों को सातवां वेतन मान दें:हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट की जस्टिस अनुभा रावत चाैधरी की अदालत ने अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों व कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ देने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की.

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वरीय संवाददाता (रांची). झारखंड हाइकोर्ट की जस्टिस अनुभा रावत चाैधरी की अदालत ने अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों व कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ देने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की. प्रार्थी व राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थी की दलील को स्वीकार करते हुए राज्य में संचालित अल्पसंख्यक कॉलेज के सभी शिक्षकों व कर्मचारियों को सातवां वेतनमान पुनरीक्षण का लाभ देने का आदेश दिया. यह भी कहा कि सभी शिक्षाकर्मियों को एक अप्रैल 2021 से सारे बकाया का लाभ भी दिया जाये. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता ए अल्लाम ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि सातवें वेतनमान का लाभ सभी कर्मियों को देने का आदेश केंद्र सरकार ने निकाला था. राज्य सरकार ने भी मार्च माह में सातवां पुनरीक्षित वेतनमान को लेकर आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों व कर्मचारियों को छोड़ कर यह लाभ सभी को देय होगा. अधिवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार का उक्त आदेश गलत है. अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों व कर्मचारियों को भी सातवां वेतनमान का लाभ एक अप्रैल 2021 के प्रभाव से दिया जाना चाहिए. उल्लेखनीय है कि करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रशेखर प्रसाद ने याचिका दायर कर सातवां वेतनमान देने की मांग की थी.राहुल गांधी पर लगा 1000 रुपये का जुर्माना : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में चाईबासा की एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देनेवाली कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान प्रार्थी राहुल गांधी की ओर से बार-बार समय मांगे जाने को लेकर अदालत ने उन पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया. 12 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी को अंतिम अवसर दिया था. इससे पूर्व सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से दो सप्ताह का समय देने का आग्रह किया गया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी राहुल गांधी ने याचिका दायर कर चाईबासा की निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती दी है. यह मामला वर्ष 2018 का है. राहुल गांधी द्वारा तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से आहत होकर भाजपा के नेता प्रताप कटियार ने चाईबासा की अदालत में शिकायतवाद दर्ज कराया था. बाद में मामले को चाईबासा की एमपी-एमएलए की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था. एमपी एमएलए कोर्ट ने मामले में राहुल गांधी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था.

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