प्रवासी मजदूरों से डरने की जरूरत नहीं, घर लौटे चार लाख श्रमिकों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव

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प्रवासी मजदूरों से डरने की जरूरत नहीं, घर लौटे चार लाख श्रमिकों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव

four lakhs migrant labourers returned jharkhand only 0.13 percent of them are Corona positive : बात अगर आंकड़ों की करें तो झारखंड लौटने के लिए लगभग साढ़े सात लाख प्रवासी श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से लगभग चार लाख वापस लौट चुके हैं. ऐसे में चार लाख में से 526 श्रमिकों का कोरोना संक्रमित निकलना कोई डराने वाले आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि प्रतिशत की बात करें तो वापस लौटे प्रवासी मजदूरों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव हैं.

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रांची : मई महीने में जब प्रवासी मजदूर अपने राज्य वापस लौटना शुरु हुए तो झारखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी. झारखंड में कुल 726 कोरोना संक्रमितों में से 526 प्रवासी मजदूर हैं. यानी कुल केस के 72 प्रतिशत से भी अधिक प्रवासी मजदूर हैं. बात अगर आंकड़ों की करें तो झारखंड लौटने के लिए लगभग साढ़े सात लाख प्रवासी श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से लगभग चार लाख वापस लौट चुके हैं. ऐसे में चार लाख में से 526 श्रमिकों का कोरोना संक्रमित निकलना कोई डराने वाले आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि प्रतिशत की बात करें तो वापस लौटे प्रवासी मजदूरों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव हैं.

झारखंड में अभी कोरोना मरीजों का आंकड़ा 726 है, हालांकि राज्य में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा अभी तक मात्र पांच ही है. प्रदेश में कोरोना के कुल एक्टिव मामले 401 हैं. कल प्रदेश में 55 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं.

जिलावार प्रवासी मजदूरों की संख्या की बात करें तो सबसे ज्यादा मामले पूर्वी सिंहभूम से हैं. यहां अबतक 122 कोरोना संक्रमित मिल हैं, जिनमें से 100 प्रवासी मजदूर हैं. कल भी यहां से 13 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं. उसके बाद हजारीबाग जिला है, जहां कुल संक्रमित 82 हैं, जिनमें से 77 प्रवासी मजदूर हैं. तीसरे स्थान पर धनबाद है, जहां से कुल 70 संक्रमित मिले हैं और जिनमें से 64 प्रवासी मजदूर हैं.

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चौथे स्थान पर गढ़वा जिला है, जहां कुल संक्रमित 62 हैं और जिनमें से 59 प्रवासी मजदूर हैं. पांचवें स्थान पर कोडरमा जिला है, जहां से 46 प्रवासी मजदूर मिले हैं. रामगढ़ जिले में भी कुल संक्रमित 44 है और वे सभी प्रवासी मजदूर हैं. बात अगर रांची जिले की करें तो यह अबतक कुल 138 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 26 प्रवासी मजदूर हैं. गुमला जिले में भी कुल 22 कोरोना संक्रमित हैं जिनमें से 21 प्रवासी मजदूर हैं.

गौरतलब है कि प्रवासी मजदूरों का यह आंकड़ा दो मई से तीन जून तक का है. कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के दौरान जब देश में लॉकडाउन शुरू हुआ तो प्रवासी मजदूरों के पास काम नहीं था, जिसके कारण वे अपने-अपने घर वापस लौट गये. इस क्रम में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई मजदूर तो हजारों किलोमीटर पैदल चलकर आये हैं.

Posted By : Rajneesh Anand

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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