रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने धुर्वा डैम, कांके डैम, रूक्का डैम, हरमू नदी व बड़ा तालाब के अतिक्रमण व साफ-सफाई को लेकर दायर विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पक्ष सुना. इसके बाद राज्य सरकार व रांची नगर निगम को निर्देश दिया कि भुसूर नदी (हिनू नदी) की जमीन से अतिक्रमण हटाने के बाद सेटेलाइट कॉलोनी से लेकर स्वर्णरेखा नदी तक दोनों किनारों की घेराबंदी की जाये. घेराबंदी का कार्य छह माह के भीतर पूरा हो. बड़ा तालाब से गाद निकालने (डिसिल्टिंग) को लेकर अनुपालन रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने कहा कि जो भी अतिक्रमण हटाया जाये, उसका खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाये. जिला स्कूल के पास जलमीनार की जर्जर स्थिति पर सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. वहीं प्रदूषित जलापूर्ति को लेकर 127 शिकायतों पर राज्य सरकार व रांची नगर निगम को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने कहा कि जलापूर्ति में कहां से प्रदूषित जल मिल रहा है, उसकी पहचान कर उसका त्वरित निराकरण किया जाये. खंडपीठ ने राज्य सरकार व रांची नगर निगम को निर्देशों का अनुपालन करते हुए स्टटेस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने चार फरवरी की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व में प्रार्थी अधिवक्ता खुशबू कटारूका की ओर से बताया गया था कि बड़ा तालाब में गाद व कचरा को हटाने के लिए विशेषज्ञों की टीम की रिपोर्ट सरकार की ओर से अब तक प्रस्तुत नहीं की गयी है. सरकार ने सितंबर माह में ही नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी रूड़की को इसका काम दिया था. रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव व अन्य ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि झारखंड हाइकोर्ट स्वत: संज्ञान से जलस्रोतों के अतिक्रमण व साफ-सफाई पर सुनवाई कर रही है. वहीं अधिवक्ता खुशबू कटारूका ने बड़ा तालाब को लेकर जनहित याचिका दायर की है. राजीव कुमार सिंह ने कांके डैम, गेतलसूद व धुर्वा डैम के अतिक्रमण को लेकर जनहित याचिका दायर की है.
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