झारखंड में बिजली का लोड फुल, फिर भी बत्ती गुल

Published at :20 Jun 2023 7:41 AM (IST)
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झारखंड में बिजली का लोड फुल, फिर भी बत्ती गुल

मौसम की मार के कारण पूरा संताल परगना बिजली की किल्लत झेल रहा है. ऐसे में बिजली की मांग घट गयी है, जिसकी वजह से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) को अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंज को बेचनी पड़ रही है.

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झारखंड की आम जनता को किसी भी परिस्थिति में सुचारु बिजली नसीब नहीं हो रही है. अब तक लोग गर्मी से त्रस्त थे और मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही थी. राजधानी में तो बिजली की कटौती अब भी जारी है. वहीं, मॉनसून की दस्तक के साथ आंधी-पानी की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित होने लगी है. मौसम की मार के कारण पूरा संताल परगना बिजली की किल्लत झेल रहा है. ऐसे में बिजली की मांग घट गयी है, जिसकी वजह से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) को अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंज को बेचनी पड़ रही है. मुख्यालय पूरे राज्य में फुल लोड बिजली मिलने का दावा कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य के कई हिस्सों की बिजली गुल है.

3000 मेगावाट तक पहुंच जा रही मांग

गर्मी के कारण राज्य के सभी ट्रांसफॉर्मर पर लोड बढ़ जा रहा है. दिन के समय तो बिजली की मांग 3000 मेगावाट तक पहुंच जा रही है. ग्रिडों पर भारी दबाव है, जिसके कारण कहीं लाइन ट्रिप कर जा रही है, जिससे ट्रांसफॉर्मर जल रहे हैं. पिछले 19 दिनों में राज्यभर में लगभग 10 हजार ट्रांसफॉर्मर जल गये, जिनकी मरम्मत की गयी है. इधर, जेबीवीएनएल पावर एक्सचेंज के तहत रोजाना 300 से 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीद रहा है. इसके बावजूद बिजली की किल्लत बनी हुई है.

मांग घटी, 300 मेगावाट बेचनी पड़ी

संताल परगना और कोल्हान के कई इलाकों में सोमवार को आंधी-तूफान की वजह से बिजली की मांग कम हो गयी है. खराब मौसम के कारण चाईबासा में 10 घंटे से बिजली बंद है. जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में 21 से 22 घंटे बिजली दी जा रही है. जानकारी के अनुसार, सोमवार को शाम 7:00 बजे तक राज्य में 1734 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी. इसमें 590 मेगावाट पावर एक्सचेंज के तहत अतिरिक्त बिजली खरीदी गयी थी. लेकिन मांग 1369 मेगावाट की थी. इसलिए जेबीवीएनएल ने 300 मेगावाट बिजली पावर एक्सचेंज को बेच दिया.

रांची में हर घंटे ट्रिपिंग, संताल भी बेहाल

राजधानी के लोग हर घंटे होनेवाली ट्रिपिंग से परेशान हैं. हालत यह है कि लोगों को लगातार एक घंटा बिजली नहीं मिल पा रही. दुमका में 10 दिनों से बिजली आपूर्ति चरमरायी हुई है. यहां 18 घंटे भी आपूर्ति नहीं हो पाती है. गुमला को 20 मेगावाट बिजली चाहिए, जबकि यहां दो से तीन मेगावाट ही बिजली मिल रही है. यानी यहां के लोगों को बमुश्किल आठ से नौ घंटे ही बिजली मिल रही है. सिमडेगा और लातेहार में औसतन 17 से 18 घंटे ही बिजली मिल रही है. लातेहार जिले को 30 मेगावाट बिजली की जरूरत है. लेकिन वर्तमान समय मे जिले को 18 मेगावाट बिजली मिल रही है. पलामू जिले को 90 की जगह 65 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो रही है.

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