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D-Pharma Exam: 69 साल के वृद्ध ने भी दी परीक्षा, सेटिंग नहीं तो हुए फेल

Updated at : 22 Jan 2023 9:45 AM (IST)
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D-Pharma Exam: 69 साल के वृद्ध ने भी दी परीक्षा, सेटिंग नहीं तो हुए फेल

डी-फार्मा का सर्टिफिकेट लेने की जुगाड़ में लग गये. कोई उम्र सीमा नहीं होने के कारण इस परीक्षा में 50 से 69 साल तक के लोग शामिल हुए. सख्ती होने पर फाइनल ईयर में सभी बुजुर्ग विद्यार्थी फेल हो गये हैं.

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रांची, राजीव पांडेय : दवा दुकानों में फार्मासिस्ट रखने की बाध्यता के कारण फार्मेसी के कोर्स की डिमांड बढ़ी है. लेकिन, ईमानदारी से किसी फार्मासिस्ट को दुकान में रखने के बजाय कई दवा दुकानदार खुद ही विभिन्न संस्थानों में नामांकन लेकर डी-फार्मा का सर्टिफिकेट लेने की जुगाड़ में लग गये. कोई उम्र सीमा नहीं होने के कारण इस परीक्षा में 50 से 69 साल तक के लोग शामिल हुए. पहले आयोजित हुई परीक्षाओं में कई लोग सर्टिफिकेट लेने में सफल भी हो गये. परीक्षा में हो रही गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद इस बार स्वास्थ्य विभाग ने खुद परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी ले ली. सत्र 2019-2021 के फर्स्ट ईयर की परीक्षा में जहां शत-प्रतिशत लोग पास हो गये थे.

वहीं फाइनल ईयर की परीक्षा में सख्ती होने पर ऐसे सभी उम्रदराज लोग फेल हाे गये हैं. जानकारी के अनुसार, इस इस डी-फार्मा की परीक्षा में 50 से 69 साल की उम्रवाले विद्यार्थियों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा थी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किये गये रिजल्ट के अनुसार, जमशेदपुर के सरदार पटेल कॉलेज ऑफ फार्मेसी में 69 साल के लोगों ने परीक्षा दी. वहीं, रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी से 62 से 59 साल की उम्र के लोगों ने परीक्षा दी है. फर्स्ट ईयर में सभी विद्यार्थी पास हो गये. जबकि, सख्ती होने पर फाइनल ईयर में सभी बुजुर्ग विद्यार्थी फेल हो गये हैं. ऐसे दर्जनों उदाहरण प्रभात खबर के पास मौजूद हैं.

विभाग ने मांगा फर्स्ट ईयर का रिजल्ट

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी डी-फार्मा के फाइनल ईयर के रिजल्ट में सिर्फ सात फीसदी विद्यार्थी ही पास हुए हैं. ऐसे में विभाग ने फेल हो चुके विद्यार्थियों के फर्स्ट ईयर की कॉपी भी काउंसिल से मांगी है. कॉपी मांगने का उद्देश्य इन विद्यार्थियों की परफार्मेंस पता करना है, ताकि परीक्षा और परीक्षाफल में हुई गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके.

निजी नर्सिंग कॉलेजों के लिए भी तैयार हुआ प्रस्ताव

राज्य के निजी नर्सिंग कॉलेज के लिए भी स्वास्थ्य विभाग नये सिरे से प्रस्ताव तैयार कर रहा है. इस प्रस्ताव में निजी नर्सिंग कॉलेजों को जेसीइसीइबी के माध्यम से नामांकन लेना होगा. 50 फीसदी सीट पर ओपन सिस्टम और 50 फीसदी सीट पर मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से नामांकन होगा. इसके लिए भी न्यूनतम अर्हता अंक तय किया गया है, जिसमें समय-समय पर बदलाव किया जा सकता है.

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जेसीइसीइबी के जरिये नामांकन की तैयारी

डी-फार्मा सहित अन्य फार्मेसी कोर्स में निष्पक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रयास शुरू कर दिया है. इसके मुताबिक सरकारी और निजी फार्मेसी कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (जेसीइसीइबी) के जरिये पूरी की जायेगी. निजी संस्थान में 50 फीसदी सीट पर नामांकन ओपन सिस्टम के जरिये होगा. जबकि 50 फीसदी सीट पर नामांकन मैनेजमेंट कोटा से होगा. जेसीइसीइबी के माध्यम से नामांकन होने पर उम्र सहित सभी प्रकार की बाध्यता निजी कॉलेजों को माननी पड़ेगी. स्वास्थ्य विभाग का यह प्रस्ताव विधि विभाग के पास है. वहां से अनुमति मिलने के बाद इसे कैबिनेट में लाया जायेगा.

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