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Weather Alert: बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवात, जानें झारखंड में कहां होगी भारी बारिश

Updated at : 13 Jul 2023 5:43 PM (IST)
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Weather Alert: बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवात, जानें झारखंड में कहां होगी भारी बारिश

बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है. इसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा. रांची स्थित मौसम केंद्र ने झारखंड के कई हिस्सों में 3 दिन तक भारी वर्षा और वज्रपात की चेतावनी जारी की है. किन-किन जिलों में वर्षा होगी, पूरी जानकारी यहां देखें...

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बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है. इसका असर झारखंड में भी पड़ने के संकेत हैं. इसकी वजह से कई जगहों पर भारी वर्षा हो सकती है. मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थिति मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक ने बताया है कि पश्चिमोत्तर बंगाल की खाड़ी में 16 जुलाई 2023 के आसपास एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन तैयार हो सकता है.

इन जगहों से गुजर रहा मानसून ट्रफ

मौसम विभाग ने बताया है कि इस वक्त मानसून ट्रफ जैसलमेर, दिल्ली, लखनऊ, मुजफ्फरपुर, बालूरघाट होते हुए अरुणाचल प्रदेश और असम से गुजर रहा है. रांची स्थित मौसम केंद्र ने झारखंड राज्य के लिए मौसम की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 16 जुलाई को राज्य के उत्तर-पश्चिमी भागों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है.

13 से 16 जुलाई तक वज्रपात की आशंका

इतना ही नहीं, कुछ इलाकों में वज्रपात होने की आशंका भी जतायी गयी है. मौसम केंद्र के मुताबिक, झारखंड में 13 जुलाई से 16 जुलाई तक वज्रपात और बादल गरजने के संकेत हैं. मौसम केंद्र के अलर्ट के मुताबिक, 13 जुलाई को राज्य में कुछ जगहों पर मेघ गरजेंगे. वज्रपात भी हो सकती है. 14 जुलाई को भी यही स्थिति रहेगी.

15 जुलाई को इन जिलों में होगी वर्षा

मौसम विभाग के मुताबिक, 15 जुलाई को दक्षिण-पूर्वी हिस्से में यानी पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा के अलावा पलामू, गढ़वा और चतरा में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है. इस दौरान कुछ जगहों पर वज्रपात होने के भी आसार हैं.

17 जुलाई तक रांची में होगी बारिश

राजधानी रांची के मौसम की बात करें, तो 17 जुलाई तक रांची में बारिश होती रहेगी. 13 जुलाई को आसमान में बादल छाये रहेंगे. एक से दो बार हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा हो सकती है. 14, 15 और 16 जुलाई को भी मौसम के ऐसे ही बने रहने की संभावना है. यानी बादल छाये रहेंगे. दो बार या इससे ज्यादा बार हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा हो सकती है.

इतना रहेगा रांची का अधिकतम और न्यूनतम तापमान

इसके बाद 17 जुलाई को मध्यम दर्जे की वर्षा होने की संभावना मौसम विभाग ने जतायी है. मौसम केंद्र की मानें, तो इस दौरान रांची का अधिकतम तापमान 13 जुलाई के 31 डिग्री से घटकर 29 डिग्री तक आ सकता है. वहीं, न्यूनतम तापमान में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, ऐसा मौसम विभाग का मानना है. वर्तमान में रांची का न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेंटीग्रेड है.

मानसून में सामान्य से 45 फीसदी कम हुई बारिश

बता दें कि झारखंड में मानसून के दौरान सामान्य से 45 फीसदी कम बारिश हुई है. आमतौर पर 1 जून से 23 जुलाई के बीच झारखंड में 316.7 मिलीमीटर वर्षा को सामान्य वर्षापात माना जाता है. लेकिन, इस वर्ष सिर्फ 174.1 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो सामान्य से बहुत कम है.

13 से 17 जुलाई तक के लिए मौसम विभाग का येलो अलर्ट

बहरहाल, मौसम विभाग ने 13 जुलाई से 17 जुलाई तक के लिए येलो अलर्ट जारी कर दिया है. इसलिए आम लोगों से लेकर किसान तक को सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत है. खराब मौसम के दौरान बहुत जरूरी न हो, तो खबर से बाहर न निकलें. किसान खेतों की ओर न जायें, क्योंकि वज्रपात होने की आशंका है.

सुरक्षित और सतर्क रहें

इतना ही नहीं, अगर आप घर से बाहर निकल चुके हैं और ऐसा लगता है कि आकाशीय बिजली गिर सकती है, तो आप सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें. किसी पेड़ के नीचे या बिजली के पोल के पास खड़े न हों. मवेशियों को भी इन सबसे से दूर रखें.

मानसून में मन मोह लेता है झरनों का सौंदर्य

बता दें कि झारखंड एक छोटा राज्य है. यहां मानसून के सीजन में झरनों का सौंदर्य सबका मन मोह लेता है. झारखंड की राजधानी और इसके आसपास के इलाकों में कई मनमोहक झरने हैं. झारखंड पहाड़ों, घाटियों, नदियों और वनों के लिए प्रसिद्ध है. रांची का मौसम लोगों को खूब भाता है. जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था, तब रांची बिहार की उपराजधानी यानी गर्मियों की राजधानी हुआ करती थी.

झारखंड का तापमान पहुंच गया था 45 डिग्री

बता दें कि इस साल गर्मियों में झारखंड का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मानसून की बारिश शुरू होने के बाद मौसम का मिजाज थोड़ा बदला है. लोगों ने गर्मी से राहत ली है. हालांकि, इस सीजन में लोगों को ऊमस का भी सामना करना पड़ता है. ज्ञात हो कि झारखंड में शहरों का तापमान थोड़ा अधिक होता है, लेकिन गांवों में मौसम कूल होता है.

मनमोहक होता है बरसात में झारखंड का मौसम

बरसात का समय झारखंड में बहुत ही मनमोहक होता है. जून से सितंबर तक झारखंड में आप बरसाती मौसम का आनंद ले सकते हैं. इस दौरान आप इस खूबसूरत प्रदेश की असीमित खूबसूरती देख सकते हैं. झारखंड के प्रमुख पहाड़ी क्षेत्रों में जून से जुलाई के महीनों में जंगली फूलों की बहार आती है, जो मौसम को और भी खूबसूरत बनाते हैं. इन दिनों, आप झारखंड के जलप्रपातों और नदी घाटों पर होने वाले ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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