सुरक्षित डिजिटल भारत के लिए साइबरपीस और एनयूएसआरएल रांची ने वेलनेस सेंटर लॉन्च किया

Updated at : 06 Apr 2026 3:15 PM (IST)
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Ranchi News

साइबर सिक्युरिटी सांकेतिक तस्वीर ( image: Canva)

Ranchi News: साइबरपीस और एनयूएसआरएल रांची ने ‘एनयूएसआरएल रांची–साइबरपीस वेलनेस सेंटर’ लॉन्च किया. यह केंद्र साइबर अपराध पीड़ितों को कानूनी, तकनीकी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करेगा, एआई-आधारित खतरों से निपटेगा और छात्रों, शोधकर्ताओं तथा समुदायों के लिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रत्यास्थता सुदृढ़ करने का मंच बनेगा.

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Ranchi News: रांची, 6 अप्रैल 2026: जब भारत और व्यापक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में साइबर अपराधों – जैसे डिजिटल गिरफ्तारी, फिशिंग, पहचान की चोरी और एआई-आधारित धोखाधड़ी में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, ऐसे समय में साइबरपीस ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल), रांची के सहयोग से एनयूएसआरएल परिसर में ‘एनयूएसआरएल रांची – साइबरपीस वेलनेस सेंटर’ की स्थापना की घोषणा की है. यह पहल भारत की साइबर सुदृढ़ता को बढ़ाने और उसके डिजिटल शासन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. 

जारी आंकड़ों के अनुसार

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, एशिया भर में उपभोक्ताओं ने वर्ष 2024 में ठगी के मामलों में लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेला, जबकि डीपफेक-सक्षम धोखाधड़ी में 1,500% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो एआई-संचालित साइबर खतरों के तीव्र विकास को दर्शाती है. इसके अतिरिक्त, पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय संगठित ठगी नेटवर्क अब प्रतिवर्ष लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं, जो साइबर-सक्षम धोखाधड़ी के औद्योगिक पैमाने को रेखांकित करता है. सिर्फ आसियान (ASEAN) क्षेत्र में ही, 68% ठगी पीड़ितों ने वित्तीय नुकसान की रिपोर्ट दी, जबकि 84% उपभोक्ताओं का मानना है कि ठगी के मामलों में वृद्धि हो रही है, जो संस्थागत समर्थन प्रणालियों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है. यह घोषणा एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल तथा साइबरपीस के अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में की गई. यह पहल रांची को साइबर सुरक्षा सुदृढ़ता के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करती है और अकादमिक जगत, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा नागरिक समाज के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है. 

पीड़ित-केंद्रित समग्र समाधान

एनयूएसआरएल रांची–साइबरपीस वेलनेस सेंटर साइबर अपराधों और तकनीकी दुरुपयोग की विस्तृत श्रृंखला का समाधान करेगा. इसमें फिशिंग, यूपीआई और बैंकिंग घोटाले, पहचान की चोरी, डीपफेक, अकाउंट टेकओवर, साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन शोषण और बच्चों को लक्षित अपराध शामिल हैं. केंद्र पीड़ितों को घटना की पहचान, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास तक व्यापक समर्थन प्रदान करेगा. 

उभरते एआई खतरों और डिजिटल सुरक्षा सुदृढ़ता पर फोकस

सेंटर उभरते एआई-आधारित खतरों जैसे वॉयस क्लोनिंग, स्वचालित धोखाधड़ी और सिंथेटिक मीडिया के दुरुपयोग का मुकाबला करेगा. इसके साथ ही डेटा उल्लंघन, हैकिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर और गलत सूचना जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी, तकनीकी और मनोवैज्ञानिक सहायता के एकीकृत ढांचे के माध्यम से समुदायों में डिजिटल सुरक्षा और प्रत्यास्थता को मजबूत किया जाएगा. 

आज का दिन रांची के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है : प्रो. डॉ अशोक आर पाटिल

इस अवसर पर प्रो. डॉ अशोक आर पाटिल, कुलपति, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) ने कहा, “आज का दिन रांची के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. यह बहु-विषयक सुविधा साइबर सुरक्षा के पारंपरिक, प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए साइबर प्रत्यास्थता (Cyber Resilience) की अधिक मानवीय दृष्टि को अपनाती है. एनयूएसआरएल रांची–साइबरपीस वेलनेस सेंटर एक समग्र, एकल-स्रोत संसाधन के रूप में कार्य करेगा, जो ऑनलाइन संकट के लिए निवारक और उपचारात्मक समाधान प्रदान करेगा, साथ ही झारखंड में डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा. ”

एकीकृत सहायता प्रणालियों के माध्यम से सुदृढ़ डिजिटल समाज

मेजर विनीत कुमार, संस्थापक एवं ग्लोबल प्रेसिडेंट, साइबरपीस ने कहा कि जैसे-जैसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में साइबर खतरे अधिक जटिल और व्यापक होते जा रहे हैं, एकीकृत सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. एनयूएसआरएल रांची–साइबरपीस वेलनेस सेंटर हमारे उस संकल्प को दर्शाता है, जिसके तहत हम कानूनी, तकनीकी और मनोवैज्ञानिक सहायता को एक साथ जोड़कर एक सुदृढ़ डिजिटल समाज का निर्माण करना चाहते हैं. यह मॉडल साइबर न्याय के केंद्र में पीड़ितों को रखता है और सरकार, शिक्षाविदों, उद्योग तथा नागरिकों को एक साथ लाकर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है.

छात्रों, शोधकर्ताओं और विधि विशेषज्ञों के लिए अवसर

एनयूएसआरएल रांची के साथ यह सहयोग साइबर न्यायशास्त्र और नीतिगत विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और विधि विशेषज्ञों को वास्तविक साइबर अपराध चुनौतियों से जुड़ने का अवसर मिलता है. यह केंद्र क्षमता निर्माण, बहु-विषयक अनुसंधान और नीतिगत वकालत के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में भी कार्य करेगा, जो डिजिटल क्षेत्र में अधिक उत्तरदायी और सुदृढ़ विधिक ढांचे के निर्माण में योगदान देगा. 

साइबर कानून और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में नेतृत्व

यह साझेदारी साइबरपीस और एनयूएसआरएल को साइबर कानून, साइबर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी शासन के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है और सुरक्षित, संरक्षित तथा एक सुरक्षित, संरक्षित और सुदृढ़ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्रयासों में योगदान देती है. 

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Priya Gupta

लेखक के बारे में

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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.

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