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बीआइटी मेसरा के प्रोफेसर ने बनाया कोरोना की जांच के लिए मैटेरियल, भुवनेश्वर में सफल हो चुका है परीक्षण

बीआइटी मेसरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अभिमन्यु देव ऐसा मैटेरियल तैयार किया जिसकी मदद से सस्ते में कोरोना जांच व दवा तैयार हो सकेगी. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उसके इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. बता दें कि इसका आईएलएस भुवनेश्वर में हो चुका है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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बीआइटी मेसरा के प्रोफेसर ने बनाया कोरोना की जांच के लिए मैटेरियल
बीआइटी मेसरा के प्रोफेसर ने बनाया कोरोना की जांच के लिए मैटेरियल
File Photo

Coronavirus in jharkhand Update ( मिथलेश झा ) रांची : बीआइटी मेसरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अभिमन्यु देव ने एक ऐसा मैटेरियल तैयार किया है, जिससे सस्ते में कोरोना की जांच होगी. साथ ही इसी मैटेरियल से कोरोना के इलाज की दवा भी तैयार होगी. डॉ देव ने अगस्त 2020 में इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया था. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से उनके प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. डीएनए बेस्ड एप्टामर आधारित उनके जांच किट का भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (आईएलएस) में सफल परीक्षण हो चुका है.

हालांकि, इस डीएनए बेस्ड मैटेरियल को बीआइटी मेसरा में ही तैयार किया गया है. फार्मास्यूटिकल साइंस एंड टेक के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ देव ने कहा है कि आईएलएस भुवनेश्वर में कोरोना जांच का सफल परीक्षण हो चुका है. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह वरदान साबित होनेवाला है, क्योंकि इस मैटेरियल से कोरोना की जांच पर अधिकतम 300 रुपये खर्च आयेगा. डॉ देव ने कहा है कि इसी मैटेरियल से कोरोना के इलाज की दवा भी बन जायेगी. इस दिशा में भी काम चल रहा है. दवा बनानेवाली कंपनियों से इस पर बातचीत हो रही है.

कैसे काम करता है कोरोना जांच किट :

डॉ अभिमन्यु देव ने बताया कि उनका जांच किट स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री आधारित है. इसमें क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों जांच कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री एक उपकरण है, जिसमें डीएनए बेस्ड सॉल्यूशन और वायरस को डाला जाता है. वायरस को डालते ही सॉल्यूशन वायरस को बाइंड करना शुरू कर देता है. जितनी ज्यादा बाइंडिंग होती है, उतना ही अधिक कलर सामने आता है. इससे पता चलता है कि कितना अधिक वायरस लोड है.

दवा की तरह हो सकता है इस्तेमाल : डॉ अभिमन्यु ने कहा है कि इस मैटेरियल का इस्तेमाल दवा की तरह भी हो सकेगा. इसी तकनीक से कोरोना के इलाज की दवा भी बन सकती है. उन्होंने कहा कि आरबीडी प्रोटीन के माध्यम से वायरस हमारे सेल में इंटर करता है. डायग्नोसिस सॉल्यूशन आरबीडी को पकड़ता है.

Posted By : Sameer Oraon

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