Coronavirus Outbreak : सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की खैर नहीं, सब पर है साइबर पुलिस की पैनी नजर

Updated at : 23 Mar 2020 12:42 PM (IST)
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Coronavirus Outbreak : सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की खैर नहीं, सब पर है साइबर पुलिस की पैनी नजर

FILE - In this Aug. 11, 2019, file photo an iPhone displays the apps for Facebook and Messenger in New Orleans. Facebook says the U.S. Department of Homeland Security will be violating the company's rules if agents create fake profiles to monitor the social media of foreigners seeking to enter the country. (AP Photo/Jenny Kane, File)

Coronavirus Outbreak: रांची : सोशल मीडिया (Facebook, Twitter, WhatsApp, Instagram, YouTube) पर तरह-तरह के और हर तरह के पोस्ट करने वाले सावधान रहें. यदि गलती से भी आपने कोरोना वायरस को लेकर किसी तरह की अफवाह को अपने अकाउंट से शेयर या फॉरवर्ड किया, तो आपको जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

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रांची : सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम) पर तरह-तरह के और हर तरह के पोस्ट करने वाले सावधान रहें. यदि गलती से भी आपने कोरोना वायरस को लेकर किसी तरह की अफवाह को अपने अकाउंट से शेयर या फॉरवर्ड किया, तो आपको जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

रांची साइबर पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों पर उसकी पैनी नजर है. यदि किसी ने कोरोना वायरस के संबंध में झूठी या असत्यापित खबर फैलाने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.

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रांची साइबर पुलिस ने कहा है कि कोरोना वायरस के बारे में अफवाह फैलाने या फर्जी खबरों को शेयर करने वालों को ‘महामारी रोग अधिनियम 1897’ की धारा 3 के तहत जिम्मेदार ठहराया जायेगा और आइपीसी की धारा 188 के तहत उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. इसके बाद उस शख्स को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

इसलिए किसी भी तरह की सूचना आपके पास आये, तो उसे पढ़ लें. यदि फॉरवर्ड करना चाहते हैं या अपने अकाउंट से शेयर करना चाहते हैं, तो पहले उसका सत्यापन कर लें. यदि यह सूचना गलत हुई और आपने अपने शेयर या फॉरवर्ड कर दिया, तो पुलिस आपके खिलाफ न केवल मुकदमा दर्ज करेगी, बल्कि आपको गिरफ्तार भी कर सकती है.

उल्लेखनीय है कि जानलेवा कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरे झारखंड की सीमाएं सील कर दी गयी हैं. पूरे प्रदेश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है. राजधानी समेत कई जिलों में भोंपू के माध्यम से प्रशासन लोगों को लॉकडाउन के बारे में जानकारी दे रही है. साथ ही उनसे अपील की जा रही है कि लोग अपने घरों में ही रहें. बहुत जरूरी न हो, तो घर से बाहर न निकलें.

हालांकि, अत्यावश्यक सेवाओं को लॉकडाउन से छूट प्राप्त है. यदि कोई बीमार व्यक्ति है, तो उसे अस्पताल ले जाने की छूट होगी. परचून की दुकानों पर लॉकडाउन लागू नहीं होगा. दूध व अन्य जरूरी सामग्री की बिक्री पर भी किसी तरह की रोक नहीं है. इस दौरान राशन व दवाओं की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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