झारखंड में महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में है कोरोना का संक्रमण, 59 फीसदी महिलाएं हो चुकी हैं स्वस्थ

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 May 2020 2:41 PM

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Chennai: Medics work on samples for COVID-19 rapid tests at Rajiv Gandhi Government General Hospital during the nationwide lockdown to curb the spread of coronavirus, in Chennai, Saturday, April 18, 2020. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI18-04-2020_000082A)

कोरोना वायरस के बारे में यह कहा जाता रहा है कि इसका संक्रमण महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा है, तो झारखंड में यह बात सच मालूम होती है, क्योंकि यहां कुल 522 केसों में से सिर्फ 82 महिलाएं हैं और 440 पुरुष हैं. यानी कुल केस का लगभग 16 प्रतिशत महिलाएं हैं.

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रांची : झारखंड में अबतक कोरोना वायरस के कुल 522 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 301 एक्टिव केस हैं, 216 स्वस्थ हो चुके हैं और पांच लोगों की अबतक कोरोना के संक्रमण से मौत हुई है.

कोरोना वायरस के बारे में यह कहा जाता रहा है कि इसका संक्रमण महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा है, तो झारखंड में यह बात सच मालूम होती है, क्योंकि यहां कुल 522 केसों में से सिर्फ 82 महिलाएं हैं और 440 पुरुष हैं. यानी कुल केस का लगभग 16 प्रतिशत महिलाएं हैं.

वहीं बात अगर स्वस्थ होकर घर गये लोगों की करें तो कुल 216 लोगों में से कुल 168 पुरुष हैं, जबकि 48 महिला है. यानी कुल स्वस्थ हुए लोगों में 22 प्रतिशत महिलाएं हैं. अबतक कुल संक्रमित महिलाओं में से लगभग 59 प्रतिशत घर स्वस्थ होकर जा चुकी हैं. ऐसे में झारखंडी महिलाओं के लिए यह आंकड़ा सुखद है.

बात अगर जिलावार संक्रमण की करें तो झारखंड के 23 जिलों में कोरोना का प्रसार हो चुका है. रांची जिले में अबतक कुल 129 लोग संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 101 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, 26 एक्टिव केस है और दो लोगों की मौत हो चुकी है.

बोकारो जिला में अबतक कुल 20 केस सामने आये हैं जिनमें से 15 स्वस्थ हो चुके हैं, पांच एक्टिव केस है और एक व्यक्ति की मौत हुई है. हजारीबाग में कुल संक्रमित 55 हैं, जिनमें से 36 एक्टिव केस है, जबकि 19 ठीक हो चुके हैं. यहां किसी व्यक्ति के मौत की खबर नहीं है.

धनबाद जिले में अबतक 14 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 10 एक्टिव केस हैं और चार लोग स्वस्थ हो चुके हैं. गिरिडीह में कुल 17 मामले हैं जिनमें से 13 एक्टिव केस है, तीन स्वस्थ है और एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है.

सिमडेगा जिले में कुल केस 10 है जिनमें से दो व्यक्ति स्वस्थ हो चुका है और आठ व्यक्ति का अभी इलाज चल रहा है. कोडरमा में कुल केस 34 है जिनमें से 30 एक्टिव केस है, तीन स्वस्थ हो चुके हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है.

देवघर में अभी तक पांच केस सामने आये थे और पांचों स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं, यानी यहां रिकवरी रेट सौ प्रतिशत है. गढ़वा में अभी मामले अधिक हैं और यहां कुल 57 केस में से 35 स्वस्थ हुए हैं और 22 अभी इलाजरत हैं. पलामू में कुल एक्टिव केस दो है, 15 लोग स्वस्थ हो चुके हैं यानी यहां कुल 17 केस अबतक सामने आये हैं.

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जामताड़ा में अबतक कुल दो मामले आये हैं और दोनों ही स्वस्थ हो चुके हैं. गोड्‌डा में कुल एक मामला सामने आया है और वह स्वस्थ हो चुका है. दुमका में कुल दो केस आये थे और दोनों ठीक हो चुके हैं. पाकुड़ में कुल चार केस हैं और चारों अभी इलाजरत हैं. देखा जाये तो संताल परगना के छह जिलों में से पांच में कोरोना की पैठ है, लेकिन स्थिति भयावह नहीं है, क्योंकि यहां के पांच जिलों में कुल 14 केस अबतक सामने आये हैं जिनमें से 10 स्वस्थ हो चुके हैं और सिर्फ चार केस एक्टिव हैं.

पूर्वी सिंहभूम में अभी कुल 38 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 37 केस एक्टिव हैं और एक मरीज स्वस्थ हो चुका है. पश्चिम सिंहभूम में कुल 15 मामले हैं और 15 लोगों का अभी इलाज हो रहा है. वहीं लातेहार में अबतक 10 केस सामने आये हैं जिनमें से छह एक्टिव है और चार स्वस्थ हो चुके हैं.

लोहरदगा जिले में अभी तक कुल तीन मामला सामने आया है और तीनों ही अभी इलाजरत हैं. रामगढ़ में शुरुआती दिनों में केस नहीं था लेकिन अभी 15 मरीज यहां है और सभी का इलाज हो रहा है.

गुमला में अभी संक्रमण के कुल 20 मामले हैं और सभी अस्पताल में हैं. सरायकेला जिले में कुल चार केस हैं और सभी एक्टिव हैं. चतरा जिले में एक केस सामने आया था और वह स्वस्थ हो चुका है. रांची के पड़ोसी जिले खूंटी में कोरोना के तीन मामले हैं और तीनों ही इलाजरत हैं.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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