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मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

By PankajKumar Pathak
Updated Date

हम दो महीनों से ज्यादा वक्त से घरों के अंदर बंद हैं. हमें दोस्तों के साथ - साथ उन जगहों की भी याद आती है जहां अच्छा वक्त कटता था. हमारी तरह हमारा शहर भी हमें याद करता होगा. जैसे हमें इस शहर की आदत हो गयी है, वैसे ही उसे भी तो हमारी आदत हो गयी होगी. आज शहर आपसे कुछ कहना चाहता है.

हर शहर हमें बताना चाहते हैं कि हमारी तरह पाबंदियों में रहते हुए उन्हें दो महीने से ज्यादा हो गया. चौथे चरण के लॉकडाउन में हम दोनों को ( आपको और मुझे) थोड़ी आजादी मिली, तो लोग मेरी सड़कों पर नजर आये इन दो महीनों में मुझमें भी थोड़ा बदलाव हुआ है. इनमें से कुछ बदलाव अच्छे हैं, तो कुछ बुरे मैं इन दो महीनों में अकेला पड़ गया हूं . मेरी सड़कें खाली हैं, इन दो महीनों में मैंने क्या महसूस किया है, मैं वही आपसे बताना चाहता हूं.

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मैं झारखंड की राजधानी रांची हूं. मेरी तरह कई शहर इस लॉकडाउन में बदल गये होंगे . किसी की झील साफ हो गयी, कहीं नदियां साफ हो गयी किसी शहर का प्रदूषण कम हो गया, तो किसी ने इस बंदिश में खुद को और बेहतर कर लिया. मैंने भी दूसरे शहरों की तरह काफी बदलाव महसूस किया.

22 मार्च से सड़कें सुनसान हो गयी लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया. मेरी सड़क पर लेकिन तेज रफ्तार वाली गाड़ियां चलती रहीं. लोगों का चुपचाप इस तरह घर में दुबकना परेशान करता था मुझे सबसे ज्यादा चिंता होती थी जब सड़क पर साइरन बजाते हुए एंबुलेंस पार होते थे.

मैं जानता इस बीमारी के डर ने लोगों को बदल दिया है मैं कभी - कभी आजाद महसूस करता तो सड़क पर चेहरा ढके लोग नजर आते थे मुझे. मेरी सड़क से कई मजदूर साइकिल में, पैदल ही गुजर रहे थे लेकिन धूप में गर्म होती मेरी सड़क पर जब वह पैदल चलते थे उनके गर्म तलवों की तकलीफ को मैं भी महसूस कर पाता था.

यहां मैं हमेशा बच्चों का इंतजार करता हूं

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मुझमें कई ऐसी जगहें हैं जहां हर दिन भीड़ लगी रहती है लोगों की भीड़ इतनी की कभी- कभी मेरा सांस लेना मुश्किल हो जाता है आज उन जगहों पर लोग नहीं है कोई नहीं है, दूर- दूर तक झांकता हूं तो इक्का दुक्का लोग नजर आते हैं. मैं शुरुआत से हरिओम टावर के हिस्से पर बच्चों का इंतजार करता हूं. दसवीं, 12 वीं के बाद कोई इंजीनियर, कोई डॉक्टर, कोई आईएस ऑफिसर , कोई सरकारी नौकरी का सपना लेकर मेरी इस दहलीज पर कदम रखता है.

मैं अक्सर उन बच्चों की परेशानियां सुनता था जब बताते थे कि उन्हें मैथ का यह टीचर पसंद है, वह टीचर पसंद नहीं है. मैंने अपनी इसी जमीन पर कई बच्चों की परेशान होकर मौत भी देखी है. मैंने हमेशा उन्हें रोका है, समझाया है . गुस्से में कभी - कभी सोचता था कि अच्छा होता अगर बच्चे ही नहीं आते. कहते हैं ऊपर वाला कभी- कभी सुन लेता है शायद उस दिन की मेरी तकलीफ ऊपर वाले ने सुन ली आज अपने ही इस हिस्से को लेकर अकेला खड़ा हूं. बच्चों का इंतजार करता हूं, उनकी हंसी याद करता हूं. दोस्तों के साथ कोने पर खड़े होकर क्या बात करते थे सब सुनता था अब उनकी आने की आहट का इंतजार कर रहा हूं.

न्यूक्लियस मॉल जहांआपने मुझसे प्यार का इजहार किया 

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मेरे हिस्से में शहर का सबसे बड़ा मॉल कुछ सालों पहले ही तो आया है. मुझे याद है फिल्म स्टार ने आकर इस मॉल का उद्धाटन किया था. आपको याद है उस दिन मेरी इस जमीन पर कितनी भीड़ थी. इतनी भीड़- इतनी भीड़ की पैर रखने की जगह नहीं. उस दिन मैं समझ गया था कि मेरा यह हिस्सा हमेशा गुलजार रहने वाला है. आप परिचित तो हैं न्यूक्लियस मॉल से आप मेरे पास रहते हैं तो इस मॉल को तो जानते हीं होंगे.

यहीं तो आपने मुझसे पहली बार अपने प्यार का इजहार किया था . "आई लव रांची" के बोर्ड के साथ आपमें से कई लोगों के मोबाइल के पास तस्वीरें भी होंगी. जब- जब आपने मुझसे प्यार का इजहार किया है तब- तब मैंने भी आपको जवाब दिया है. आज इस जगह पर आपके प्यार की निशानी तो है लेकिन आप नहीं है. मॉल की सुरक्षा में खड़े कुछ गार्ड हैं जो कभी - कभी मुझसे बात कर लेते हैं लेकिन आपकी याद आती है.

वो जगहें जहां मेरा सांस लेना मुश्किल था.

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मुझमें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और ऑटो स्टैंड है हालांकि ऑटो वालों ने पता नहीं कैसे खुद ही यह आजादी ले ली कि उन्हें जहां मन करेगा वह गाड़ी रोक लेंगे आज इस लॉकडाउन की वजह से कोई ऑटो सड़क पर नहीं है ना ही उन्हें पहले जैसी मनमानी की इजाजत है. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सुनसान पड़े हैं हालांकि कई लोग हैं जो मेरे इस हिस्से में आकर यह देखकर जाते हैं कोई जरूरत मंद तो नहीं है. शाम के वक्त कई गाड़ियां यह देखकर जाती हैं कि कोई भूखा तो नहीं सो रहा. मैं आज उन लोगों से बहुत खुश हूं जो इस तकलीफ में मुझे गले लगाकर सड़क पर सोने वालों की चिंता करते दिखे.

मेरे बचपन की तस्वीर यहीं की है ना आपके पास

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मेरी कोई पुरानी तस्वीर है आपके पास होगी तो मेरे इसी हिस्से की होगी. हालांकि मेरी पहचान अब फिरायालाल से होने लगी है, मेन रोड से होने लगी है, अलबर्ट एक्का चौक से होने लगी है. मेरे इस हिस्से में हमेशा लोगों की भीड़ होती है. मुझमें भले ही बड़े- बड़े मॉल खुल गये हैं लेकिन आज भी दूसरे शहरों से गांव से आने वाले लोग यहीं से खरीदारी करते हैं. शाम के वक्त आइसक्रीम और फास्ट फूड के लिए ही तो यहां मेरी पहचान है.

राजनीति नहीं युवाओं से मेरे इस हिस्से की पहचान हो

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मेरे इस हिस्से की पहचान राजनीतिक है मोरहाबादी मैदान आपको रैली के लिए याद आयेगा लेकिन मैं जानता हूं कि मेरे इस हिस्से में आजकल शाम के वक्त राजनीति की नहीं चाय के चुस्कियों की , जिंदगी की चर्चा होती है. शाम के वक्त ढेर सारे युवा मेरे पास आते हैं. चाय, फास्ट फूड और मैदान में चहलकदमी करते हैं. इस लॉकडाउन में दूकानें बंद पड़ी हैं. मैदान में अब सब्जियों का बाजार लगाने लगे हैं लोग. मैं पहले युवाओं के भविष्य की योजनाओं और उनकी निजी बातचीत सुनता था आजकल सब्जियों का मोलभाव और किसानों की तकलीफें सुन रहा हूं.

यहां महकती थी मेंहदी की महक

मैं आपका शहर, इस दो महीने के लॉकडाउन में आपसे कुछ कहना चाहता हूं

मैं अक्सर लोगों से कहता हूं कि मेरे इस हिस्से में गाड़ी लेकर मत आना अक्सर भीड़ रहती है. कई लोग मजाक में कहते हैं कि अच्छे ड्राइवर की पहचान तभी है जब अपर बाजार और रंगरेज गली में गाड़ी लेकर जाओ लेकिन मैं हमेशा उन्हें रोकता रहा.मेरे इस हिस्से में कई दुकान है यहां शायद ही ऐसा कुछ है जो नहीं मिलेगा.

महंगे मॉल से पहले इस पूरा मॉल ही तो मानते थे लोग. बच्चे के जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक का सामान मेरे इन इलाकों में मिल जायेगा आपको. रंगरेज गली में हमेशा हंसी और मेहंगी की महक मेरी सड़कों में घूली रहती थी. कई नये ड्रेस की डिजाइन की तस्वीर दिखाकर दुकान- दुकान भटकते देखा है मैंने लड़कियों को. आज इन इलाकों में आप कोई भी बड़ी गाड़ी लेकर आओ ना दुकानें खुली हैं ना मेहंदी की खुशबू है ना खिलखिलाहट है, खामोशी है.

एक वादा करो ..

मैं सब पहले जैसा नहीं चाहता. मैं शहर हूं आपकी कमी महसूस करता हूं लेकिन मैं पहले जैसा प्रदूषण नहीं चाहता. आपका कहीं भी कचरे फेंक देने की आदत अभी भी आपसे छिन लेना चाहता हूं. मैं अपने बच्चों का आज भी हरिओम टावर में इंतजार कर रहा हूं. मैं आपसे दोबारा अपने प्यार का इजहार करने के लिए उसी न्यूक्लियस मॉल के उस बोर्ड पर आपका इंतजार कर रहा हूं. मैं अपनी उन सड़कों पर आपकी दौड़ती भागती जिंदगी का इंतजार कर रहा हूं लेकिन इस वादे के साथ की मैं आपका जितना ख्याल रखता हूं. आप भी मेरा रखेंगे. वादा रहा, तो जल्द लौटिये इंतजार कर रहा हूं .

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