रिम्स निदेशक को विरमित करने पर सीएम की मंजूरी
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Jun 2020 11:53 PM
रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह को विरमित करने की संचिका पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंजूरी दे दी है. निदेशक ने खुद को विरमित करने के लिए मार्च में ही आग्रह किया था.
रांची : रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह को विरमित करने की संचिका पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंजूरी दे दी है. निदेशक ने खुद को विरमित करने के लिए मार्च में ही आग्रह किया था. उनकी नियुक्ति एम्स बठिंडा (पंजाब) में हो चुकी है. इसलिए उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जतायी थी. स्वास्थ्य सचिव ने भारत सरकार से कोरोना संकट काल तक उन्हें रिम्स में सेवा देने के लिए आग्रह किया था, जिसकी मंजूरी मिल गयी थी. विगत कुछ दिनों से निदेशक और स्वास्थ्य मंत्री के बीच खींचतान चल रही थी.
मंत्री लंबे समय से ही उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे. इधर, कोरोना की रफ्तार कम होने पर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने दोबारा संचिका तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भेजी था, जिस पर सहमति दे दी गयी है. मंत्री ने नियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया थास्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने रिम्स में थर्ड व फोर्थ ग्रेड में हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था. साथ ही इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था. मंत्री ने यह आदेश विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद दिया था.
इसे आधार बनाते हुए निदेशक को हटाने की अनुशंसा मुख्यमंत्री से की थी. साथ ही रिम्स के किसी वरीय चिकित्सक को निदेशक का प्रभार देने की अनुशंसा की थी. नियुक्ति को लेकर जांच कमेटी ने गड़बड़ी पकड़ी थीरिम्स में थर्ड और फोर्थ ग्रेड की 45 अलग-अलग पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता की शिकायत मुख्यमंत्री से की गयी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने जांच कमेटी गठित कर दी.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एम्स के अनुरूप योग्यता निर्धारण की गयी, पर अलग-अलग पद पर खास लोगों को लिए सुविधानुसार योग्यता का निर्धारण किया गया. कमेटी ने लिखा है कि प्रबंधन ने कई पदों के लिए 500 बेड हॉस्पिटल में पांच वर्षों का कार्यानुभव रखा है, जबकि कई पदों के लिए इसे हटा दिया गया है.
इससे यह साफ होता है कि रिम्स अधिकारियों ने सुविधानुसार पद विशेष के लिए योग्यता का निर्धारण किया है. योग्यता निर्धारण में शासी परिषद या सरकार की अनुमति भी नहीं ली गयी. जांच कमेटी ने यह भी लिखा है कि जांच के दौरान नियुक्त अभ्यर्थियों का स्थानीय प्रमाण पत्र भी नहीं दिखाया गया.
Post by : Pritish Sahay
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