मृत्युंजय शर्मा की पुस्तक ब्रोकन प्रॉमिसेज का लोकार्पण

Updated at : 29 Apr 2024 1:07 AM (IST)
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मृत्युंजय शर्मा की पुस्तक ब्रोकन प्रॉमिसेज का लोकार्पण

लेखक मृत्युंजय शर्मा की पुस्तक ब्रोकन प्रॉमिसेज का लोकार्पण रविवार को आड्रे हाउस में हुआ. लोकार्पण राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, विकास भारती के संस्थापक पद्मश्री अशोक भगत और वेस्टलैंड बुक्स की मीनाक्षी ठाकुर ने किया.

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रांची. लेखक मृत्युंजय शर्मा की पुस्तक ब्रोकन प्रॉमिसेज का लोकार्पण रविवार को आड्रे हाउस में हुआ. लोकार्पण राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, विकास भारती के संस्थापक पद्मश्री अशोक भगत और वेस्टलैंड बुक्स की मीनाक्षी ठाकुर ने किया. इस मौके हरिवंश ने कहा कि मृत्युंजय ने बिहार पर अंग्रेजी में पुस्तक लिखी है. हमारे देश में किसी भी अंग्रेजी मीडिया ने बिहार के हालात पर जो लिखा है, उनका नैरेटिव कुछ और है. विश्व में भी अंग्रेजी मीडिया ने भारत के बारे में जो नैरेटिव चलाया है, वह काफी बायस्ड है. द्वितीय विश्व युद्ध के समय में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल ने लिखा था कि इतिहास को जितना पीछे देख सकते हो देखो और भविष्य बनाने की प्रेरणा वहीं से लो. यह कथन आज बिहार और झारखंड दोनों पर ही लागू होता है. उन्होंने बिहार के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में आयी गिरावट के बारे में विस्तार से बताया. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बीते 20 सालों में बिहार और झारखंड में कुछ बदलाव हुए हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड में कानून व्यवस्था और आधारभूत संरचना की स्थिति में सुधार आयेगा, तभी कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है. पुस्तक के लेखक मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि 1990 में बिहार में जो हालात थे, वह दुनिया की किसी भी त्रासदी से कम नहीं थी. उस दौर में बिहार में 60 नरसंहार हुए, जिसमें 600 लोग मारे गये. बिहार में सामाजिक न्याय के बारे में जो बातें कही गयी हैं, वह छद्म क्रांति है. पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि यह पुस्तक बिहार की सोशियो पॉलिटिकल डायरी है. बिहार ऐसा राज्य रहा है, जहां बहुत से सामाजिक व राजनीतिक प्रयोग होते रहे हैं. यह पुस्तक कई कालखंडों और घटनाचक्र को समेटे हुए है. बिहार के संदर्भ में 1911 से 1990 तक की घटनाओं को समेटा गया है. बिहार के सामाजिक आंदोलन, सरकारों का उदय और पतन, जेपी आंदोलन आदि का जिक्र है. खासतौर पर यह भी बताया गया है कि बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद के उदय के बाद से बिहार कैसे पतन के गर्त में गया.

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