बोकारो की लापता 14 वर्षीय बच्ची मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई को बनाया प्रतिवादी, 27 जुलाई को अगली सुनवाई

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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: बोकारो की 14 वर्षीय लापता बच्ची मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रतिवादी बनाया है. कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार को सीबीआई को तकनीकी सहयोग देने का निर्देश दिया. मामले की जांच फिलहाल सीआईडी कर रही है. अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: बोकारो की 14 वर्षीय लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद यह आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जांच के दौरान सीबीआई को किसी प्रकार की तकनीकी सहायता की आवश्यकता पड़ती है, तो राज्य सरकार उसे हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराए.

सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे महाधिवक्ता

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय अदालत में उपस्थित रहे. वहीं, प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की और अधिवक्ता रितु नंदा ने पक्ष रखा. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तिथि निर्धारित की है.

सीआईडी कर रही है मामले की जांच

फिलहाल इस बहुचर्चित मामले की जांच झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) कर रही है. पिछली सुनवाई में सीआईडी ने अदालत को जांच की प्रगति से अवगत कराया था. सीआईडी की ओर से बताया गया था कि बिहार के गोपालगंज जिले में एक बच्ची की पहचान को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिला है.

बिहार के गोपालगंज में मिली बच्ची की झलक

जांच एजेंसी के अनुसार, गोपालगंज में मिली बच्ची का चेहरा बोकारो से लापता किशोरी से लगभग 90 प्रतिशत तक मेल खाता है. हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल चेहरे की समानता के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इसलिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों से विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि यह शत-प्रतिशत पुष्टि की जा सके कि दोनों बच्चियां एक ही हैं या नहीं.

करीब छह साल से लापता है बच्ची

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है. 14 वर्षीय बच्ची 16 अक्टूबर 2020 से लापता है. परिजनों की शिकायत पर पिंड्राजोरा थाने में मामला दर्ज किया गया था. लंबे समय बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर परिजनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

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हाईकोर्ट कर रहा मामले की निगरानी

हाईकोर्ट लगातार इस मामले की निगरानी कर रहा है और जांच एजेंसियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मांग रहा है. अब सीबीआई को प्रतिवादी बनाए जाने के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसी की विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा. अदालत की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी, जिसमें जांच की ताजा स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है.

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Kumarvishwat Sen

लेखक के बारे में

By Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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