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बिरसा मुंडा कारा के 60 कैदी बनेंगे इलेक्ट्रीशियन, जुड़ेंगे स्वारोजगार से, जानें कैसे हुआ ये संभव

Updated at : 28 Feb 2022 7:47 AM (IST)
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बिरसा मुंडा कारा के 60 कैदी बनेंगे इलेक्ट्रीशियन, जुड़ेंगे स्वारोजगार से, जानें कैसे हुआ ये संभव

बिरसा कारा के 60 कैदी अब इलेक्ट्रीशियन बनेंगे, जेल से बाहर आने के बाद वो खुद स्वरोजगार से जुड़ेंगे. उन्होंने तीन महीने इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उनकी परीक्षा भी हुई.

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रांची : बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, रांची स्थित स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर में 60 कैदियों ने तीन महीने का इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उनकी परीक्षा भी हुई. इलेक्ट्रीशियन की डिग्री मिलने के बाद अब वह जेल से बाहर आने के बाद स्वरोजगार से जुड़ेंगे.

श्री श्री रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम ट्रस्ट आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से बंदियों को प्रशिक्षण दिया गया है. आर्ट ऑफ लिविंग होटवार जेल में पिछले तीन साल से स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर चला रहा है. इसमें अब तक 375 से ज्यादा बंदियों ने प्रशिक्षण पाया है.

प्रशिक्षण के बाद परीक्षा में उत्तीर्ण होनेवाले प्रशिक्षणार्थियों को सरकारी प्रमाण पत्र दिये जाते हैं. जेल से बाहर निकलने के बाद उन्हें जॉब या स्वरोजगार शुरू करने में भी मदद की जाती है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और वह अपने परिवार का भरन-पोषण ठीक से करेंगे.

शुरू में होती है थोड़ी दिक्कत :

इलेक्ट्रीशियन के प्रशिक्षक बिंदुसार ने बताया कि शुरुआत में बंदियों को प्रशिक्षण देने में दिक्कत होती है. उन्हें बैठ कर पढ़ने की आदत नहीं होती है. धीरे-धीरे अपनापन का वातावरण बनने के बाद बंदी साथ में बैठकर पढ़ना और एक-दूसरे के साथ सहयोग करना शुरू कर देते हैं. तीन माह में उन्हें प्रशिक्षण देकर ट्रेंड कर दिया जाता है.

प्रशिक्षण से कैदियों में आया है बदलाव

आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर और जेल स्किल डेवलपमेंट सेंटर के हेड रूपेश कुमार ने बताया कि श्री श्री रविशंकर जी की प्रेरणा से ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा है. ट्रेनिंग से कैदियों में बदलाव आया है और उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है. इलेक्ट्रीशियन की ट्रेनिंग के साथ उन्हें योग, प्राणायाम और सुदर्शन क्रिया आदि सीखने का मौका मिलता है. इससे कैदियों को जीवन के कटु अनुभवों को भूलने में मदद मिलती है. जेल से बाहर निकलने के बाद बेहतर इंसान बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़कर परिवार और समाज के विकास में योगदान देने की भावना जागृत होती है.

Posted By: Sameer Oraon

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