अब सरकारी अस्पतालों में नहीं होगी एंटी-रैबीज इंजेक्शन की कमी, NHM ने जारी किया सख्त निर्देश

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दफ्तर की तस्वीर

झारखंड के सरकारी अस्पतालों में अब कुत्ता या अन्य जानवरों के काटने पर लगने वाली एंटी-रैबीज वैक्सीन (ARV) की कमी नहीं रहेगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने दवाओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.

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रांची से विपिन सिंह की रिपोर्ट

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Anti Rabies Vaccine in Jharkhand, रांची : झारखंड के सरकारी अस्पतालों में अब कुत्ता या अन्य जानवरों के काटने पर दी जाने वाली एंटी-रैबीज वैक्सीन (ARV) की कमी नहीं होगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में हर वक्त एंटी-रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का बड़ा फैसला लिया है. विभाग ने सभी जिलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने अस्पतालों की मासिक खपत के अनुसार कम से कम तीन महीने का एडवांस बफर स्टॉक अनिवार्य रूप से अपने पास सुरक्षित रखें. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि जैसे ही दवाओं का स्टॉक कम होने लगेगा, संबंधित जिले के सिविल सर्जन बिना देरी किए तुरंत नई खरीद की प्रक्रिया शुरू कर देंगे ताकि मरीजों को खाली हाथ न लौटना पड़े.

एनएचएम सभागार में जुटे कई विभागों के अधिकारी

इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले को लेकर एनएचएम के आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले जानलेवा रैबीज रोग के पूरी तरह खात्मे के लिए कई कड़े निर्देश दिए. इस दौरान खासतौर पर भारत सरकार के राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम की गाइडलाइंस पर विस्तार से चर्चा हुई. इस बैठक की खास बात यह रही कि इसमें केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि पशुपालन, नगर निगम, वन विभाग और पंचायती राज जैसे विभिन्न संबद्ध विभागों के प्रतिनिधि भी एक साथ शामिल हुए.

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आवारा कुत्तों के नियंत्रण और शेल्टर होम के निर्माण पर गंभीर मंथन

बैठक में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रैबीज की मुख्य वजह यानी आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने पर भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया. अधिकारियों ने मानवीय आधार पर आवारा कुत्तों के नियंत्रण, उनके लिए शेल्टर होम (आश्रय गृह) की व्यवस्था करने और उनके भोजन आदि का उचित प्रबंध करने की योजना पर चर्चा की. इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ उनके प्रति होने वाली क्रूरता को भी रोकना है.

नगर निगम और वन विभाग के दिग्गज रहे मौजूद

इस उच्च स्तरीय बैठक में रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह, आईईसी सेल से डॉ. राहुल किशोर सिंह और रांची नगर निगम के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निशांत कुमार सिंह व डॉ. नैना कुमारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे. इनके अलावा पशुपालन निदेशालय से संयुक्त अनुसंधान निदेशक डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, रिम्स के पीएसएम विभाग के अध्यक्ष डॉ. एस सुंदरम, वन विभाग के प्रतिनिधि संजय कुमार सिन्हा, डॉ. प्रवीण कर्ण और डॉ. जिगीशा श्रीवास्तव सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने राज्य को रैबीज मुक्त बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव साझा किए.

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