अलबर्ट एक्का के अलावा 1971 भारत पाक युद्ध में झारखंड के वो कौन कौन से सूरवीर थे जिन्होंने अपनी शहादत दी ?

Published at :03 Dec 2021 12:19 PM (IST)
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अलबर्ट एक्का के अलावा 1971 भारत पाक युद्ध में झारखंड के वो कौन कौन से सूरवीर थे जिन्होंने अपनी शहादत दी ?

आज भारत पाक युद्ध के 50 साल पूरे हो गये. इस युद्ध में अलबर्ट एक्का के अलावा वो कौन से हीरो थे जिन्होंने इस लड़ाई में शहादत दी.

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रांची : आज भारत पाक युद्घ के 50 साल पूरे हो गये हैं, इस लड़ाई में भारतीय सेना के कई जवानों ने अपनी कुर्बानी दी, झारखंड के भी कई वीर जवानों ने भी इस लड़ाई में हिस्सा लिया और अपनी शहादत दी. जिनमें से एक थे अलबर्ट एक्का जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया था. लेकिन इसके अलावा भी कई और लोग थे जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी शहादत दी. तो आईये जानते हैं अलबर्ट एक्का के अलावा वो कौन कौन से सूरवीर थे जिन्होंने पराक्रम दिखाया.

शहीद जोसेफ तिग्गा

गुमला में डुमरी प्रखंड के कपासगुटरा गांव निवासी शहीद सेनानी जोसेफ तिग्गा ने 19 वर्ष की उम्र में अपनी शहादत दी थी. परिवार के लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा शहीद के नाम से पटना में एक आवास मिला था. उस आवास पर दबंगों ने कब्जा कर लिया.

शहीद चामू उरांव

गुमला शहर से सटे पुग्गू घांसीटोली में जन्मे थे चामू उरांव. 1971 के युद्ध में जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के गुसवापाड़ा चौकी पर हमला किया था, तो 12 जवान शहीद हुए थे. इसमें गुमला के चामू उरांव भी शामिल थे.

शहीद डेविड तिग्गा

1971 के भारत-पाक युद्ध में लांसनायक अलबर्ट एक्का के साथ ही अनगड़ा निवासी सैनिक डेविड तिग्गा भी शहीद हुए थे. इन्हें भी अलबर्ट एक्का की कब्र के बगल में ही दफनाया गया था. डेविड में बचपन से देशभक्ति का जुनून था.

शहीद प्रभुदान हेमरोम

प्रभुदान हेमरोम तोरपा प्रखंड के झटनीटोली गांव के रहनेवाले थे. इन्हें भी वहीं पर दफनाया गया है, जहां अल्बर्ट एक्का को दफनाया गया था. शहीद हेमरोम को मरणोपरांत सेवा मेडल दिया गया था.

शहीद पौलुस तोपनो

तोरपा प्रखंड के तुरीगड़ा बड़का टोली के पौलुस तोपनो 1971 की लड़ाई में शहीद हुए थे. शहादत के बाद उन्हें अगरतला में ही दफना दिया गया था. सेना के लोग वहां से मिट्टी व कफन लेकर गांव आये थे. यही परिवार वालों के लिए स्मृति शेष था.

शहीद सिमोन नाग

नामकुम के सोगोद करंजटोली निवासी सिमोन नाग अंतिम बार नवंबर 1971 में छुट्टी लेकर घर आये थे. पत्नी से कहा कि रामगढ़ में कमरा लेकर तुम्हें रखेंगे. लेकिन दूसरे ही दिन युद्ध में जाने का बुलावा आ गया था.

Posted by : Sameer Oraon

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