बोकारो में यूरिया की कालाबाजारी पर प्रशासन सख्त, दोषी दुकानदारों पर होगी कड़ी कार्रवाई

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यूरिया खाद. प्रतीकात्मक फोटो.

यूरिया खाद. प्रतीकात्मक फोटो.

बोकारो प्रशासन यूरिया की कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री की शिकायतों पर सख्त हो गया है. उपायुक्त अजय नाथ झा ने अधिकारियों को सघन जांच के निर्देश दिए हैं. किसी भी दोषी दुकानदार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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बोकारो से सीपी सिंह की रिपोर्ट

Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले में यूरिया उर्वरक की कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री की लगातार मिल रही शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. उपायुक्त अजय नाथ झा ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को जिलेभर में उर्वरक विक्रेताओं की सघन जांच करने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई दुकानदार कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक कीमत पर बिक्री करते हुए पकड़ा गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

किसानों की शिकायतों के बाद हरकत में आया प्रशासन

उपायुक्त को विभिन्न किसानों की ओर से शिकायतें मिली थीं कि कुछ उर्वरक विक्रेता सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर यूरिया बेच रहे हैं. इसके अलावा कुछ स्थानों पर यूरिया की जमाखोरी कर कृत्रिम संकट पैदा करने और बाद में अधिक कीमत पर बिक्री करने की भी शिकायतें सामने आई हैं. इन शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया. उपायुक्त ने कहा कि किसानों के साथ किसी भी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी.

अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर होगी सघन जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने चास और तेनुघाट के अनुमंडल पदाधिकारियों के साथ-साथ जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में यूरिया उर्वरक के भंडारण और बिक्री की सघन जांच करने का निर्देश दिया है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, मूल्य सूची और वितरण व्यवस्था की जांच करें. यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

दोषी पाए जाने पर होगी कानूनी कार्रवाई

उपायुक्त अजय नाथ झा ने साफ कहा कि जांच के दौरान यदि कोई उर्वरक विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करता, जमाखोरी करता या कालाबाजारी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश तथा अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

जिला कृषि पदाधिकारी को नियमित निगरानी का निर्देश

उपायुक्त ने जिला कृषि पदाधिकारी को पूरे मामले की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया है. साथ ही जांच और कार्रवाई से संबंधित समेकित प्रतिवेदन तैयार कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है. इसके अलावा अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि पूरे जिले की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा सके.

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किसानों के हित सर्वोपरि, कालाबाजारी नहीं होगी बर्दाश्त

उपायुक्त ने कहा कि किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. खेती के मौसम में यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने दोहराया कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा. जमाखोरी, कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री जैसी गतिविधियों पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी. जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी पाए जाने वाले उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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