इलाहाबाद हाईकोर्ट से जौहर यूनिवर्सिटी को झटका, याचिका खारिज, अब क्या होगा!

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मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की याचिका को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही विश्वविद्यालय को रामपुर विकास प्राधिकरण के भवनों को गिराने के आदेश पर मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत से अंतरिम रोक मिल गई है. इस घटनाक्रम ने मामले को एक नया मोड़ दिया है.

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UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले में कानूनी घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि याचिका विश्वविद्यालय के किसी अधिकृत अधिकारी की बजाय एक कारोबारी के माध्यम से दाखिल की गई थी, इसलिए यह विचारणीय नहीं है.

विश्वविद्यालय की ओर से कौन दाखिल कर सकता है याचिका?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) ने आपत्ति जताई कि विश्वविद्यालय जैसे संस्थान का प्रतिनिधित्व उसके रजिस्ट्रार या किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए. अदालत ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि बाहरी व्यक्ति विश्वविद्यालय की ओर से याचिका दाखिल नहीं कर सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया.

दूसरी अदालत से मिली अंतरिम राहत

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद जौहर यूनिवर्सिटी को दूसरे मोर्चे पर राहत मिली है. मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. यह रोक अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी.

क्यों जारी हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश?

रामपुर विकास प्राधिकरण ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय परिसर में 40 में से 38 भवन स्वीकृत मानचित्र के बिना बनाए गए हैं. इसी आधार पर प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्धारित समय सीमा के भीतर इन भवनों को स्वयं हटाने का नोटिस जारी किया था. समयसीमा पूरी होने के बाद प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में था.

छात्रों और प्रशासन की नजर अगले आदेश पर

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है. अंतरिम रोक मिलने से फिलहाल तत्काल कार्रवाई टल गई है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक पूरे मामले पर सभी की नजर बनी रहेगी. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि ध्वस्तीकरण का आदेश लागू होगा या नहीं.

मामला क्यों है अहम?

जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से विभिन्न कानूनी विवादों के केंद्र में रही है. भूमि, निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में पहले भी कई न्यायिक कार्यवाहियां हो चुकी हैं. ताजा घटनाक्रम ने इस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.

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Tilak Kumar

लेखक के बारे में

By Tilak Kumar

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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