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जमीन विवादों के आरोपी गिरफ्त से बाहर, रांची में 189 में सिर्फ आठ की गिरफ्तारी

Updated at : 27 May 2024 12:00 PM (IST)
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जमीन विवादों के आरोपी गिरफ्त से बाहर, रांची में 189 में सिर्फ आठ की गिरफ्तारी

जमीन विवाद में रांची जिला में थानों में सबसे अधिक 194 केस दर्ज किये गये

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रांची (वरीय संवाददाता). रांची रेंज के पांच जिलों रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में जमीन विवाद या जमीन के नाम पर ठगी और कब्जा को लेकर वर्ष 2021 से लेकर 2023 तक कुल 287 केस दर्ज हुए. इसमें सबसे अधिक 194 रांची जिले में दर्ज किये गये थे. जिसमें कुल आरोपियों की संख्या 189 थी. लेकिन इनमें पुलिस सिर्फ आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी, जबकि 40 जमानत पर हैं. वहीं दूसरी ओर 141 आरोपियों की गिरफ्ता विभिन्न कारणों से नहीं की गयी है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कैसे जमीन कारोबारी या जमीन माफिया पर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. विभिन्न मामलों में उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाती है. रेंज के अन्य जिलों में भी पुलिस की कार्रवाई की यही स्थिति है. इसके आधार पर यह भी कहा जा सकता है कि आरोपियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है. रांची जिले में 2021 में एक भी गिरफ्तारी नहीं : पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, रांची जिले में जमीन के मामले में 2021 में 55 केस दर्ज हुए. इसमें कुल आरोपी 57 थे. लेकिन एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई. 12 आरोपियों ने जमानत ले ली और छह मामलों में ही सिर्फ न्यायालय में चार्जशीट हुआ. 2022 में दर्ज 73 केस में 67 आरोपियों में सिर्फ दो की गिरफ्तारी हुई और वर्ष 2023 में 66 केस में 65 आरोपियों में छह आरोपी गिरफ्तार किये गये. लोहरदगा में 2021 में एक भी गिरफ्तारी नहीं : लोहरदगा जिले में वर्ष 2021 में नौ केस में 20 आरोपियों में एक की भी गिरफ्तारी नहीं हुई, जबकि 2022 में 12 केस के 55 आरोपियों में 11 की गिरफ्तारी हुई. इसी तरह वर्ष 2023 में 12 केस के 70 आरोपियों में एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. शेष तीन अन्य जिलों में पुलिस की कार्रवाई की आंकड़ा इसी प्रकार है. गिरफ्तारी नहीं होने के मुख्य कारण : पुलिस द्वारा अनुसंधान में अभिलेख के सत्यापन का लंबित रहना, आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य संकलित करने के लिए अनुसंधान लंबित रहना, केस में आरोप सही पाये जाने पर आरोपियों के फरार रहने के कारण, केस में अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय से गिरफ्तारी पर रोक होना, केस के अनुसंधान के बाद आरोप झूठ निकलने या मामला दीवानी होने के कारण.

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