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12 दिन में 6.85 लाख लोगों ने झारखंड वापसी के लिए कराया रजिस्ट्रेशन, 41,673 प्रवासियों ने फोन पर मांगी मदद

Updated at : 14 May 2020 5:40 PM (IST)
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12 दिन में 6.85 लाख लोगों ने झारखंड वापसी के लिए कराया रजिस्ट्रेशन, 41,673 प्रवासियों ने फोन पर मांगी मदद

रांची : कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन में फंसे झारखंड के 41,673 लोगों ने 2 मई से 13 मई के बीच प्रदेश सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके मदद मांगी है. हेमंत सोरेन सरकार ने प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनवाया है, जिसके जरिये लोग अपने घर लौट रहे हैं. मदद मांगने वालों में अधिकतर लोग महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और दिल्ली के प्रवासी हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर यह आंकड़े शेयर किये हैं.

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रांची : कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन में फंसे झारखंड के 41,673 लोगों ने 2 मई से 13 मई के बीच प्रदेश सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके मदद मांगी है. हेमंत सोरेन सरकार ने प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनवाया है, जिसके जरिये लोग अपने घर लौट रहे हैं. मदद मांगने वालों में अधिकतर लोग महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और दिल्ली के प्रवासी हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर यह आंकड़े शेयर किये हैं.

वापसी के लिए 6,85,147 लोगों ने झारखंड सरकार के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया. सिर्फ दो दिन (3-4 मई और 4-5 मई) में 3,64,906 लोगों ने इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया. सबसे ज्यादा 1,93,896 प्रवासियों ने 3-4 मई को खुद को पंजीकृत किया, जबकि 4-5 मई को 1,71,010 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया. इसके बाद धीरे-धीरे रजिस्ट्रेशन की रफ्तार कम होती गयी.

अपने घर लौटने के इच्छुक 88,723 लोगों ने 4-5 मई को रजिस्ट्रेशन करवाया, जबकि 6 मई को इनकी संख्या घटकर 39,332 रह गयी. 7 मई को 33,685 लोगों ने अपने नाम का पंजीकरण कराया, तो 8-9 मई को 35,338 लोगों ने अपने घर लौटने की इच्छा जतायी. सरकार से मदद मांगने वालों की संख्या 9-10 मई को 32,129 हो गयी, तो 10-11 मई को यह संख्या 19,356 रह गयी.

इस पोर्टल पर 11-12 मई को 6,233 लोगों ने खुद को पंजीकृत किया, तो 12-13 मई को 6,573 लोगों ने. इस तरह 12 दिन में 6,85,147 लोगों ने सरकार के पोर्टल पर अपना नाम पंजीकृत कराया और घर लौटने की इच्छा जताते हुए झारखंड की सरकार से मदद मांगी. इसी दौरान 41,673 लोगों ने सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके घर लौटने में मदद की अपील की.

सबसे ज्यादा 5,299 लोगों ने 11-12 मई को फोन किया. 2 मई को 1,500 लोगों ने फोन किया, तो 3-4 मई को 3,014 श्रमिकों ने और 4-5 मई को 4,893 लोगों ने फोन करके अपनी समस्या नोडल ऑफिसर को बतायी.6 मई को 1,800 लोगों ने फोन किया, तो 7 मई को 4,835 लोगों ने, 8-9 मई को 5,212 लोगों ने, 9-10 मई को 5,087 लोगों ने, 10-11 मई को 4,983 लोगों ने, 11-12 मई को 5,299 लोगों ने और 12-13 मई को 5,050 लोगों ने फोन पर सरकार से मदद मांगी.

एक दिन में इतने लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा 976 लोगों ने 13 मई को वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया. गुजरात से 638, राजस्थान से 580, कर्नाटक से 451, तमिलनाडु से 434, दिल्ली से 331, पश्चिम बंगाल से 303, आंध्र प्रदेश से 298, उत्तर प्रदेश से 257, ओड़िशा से 249, बिहार से 234, केरलसे 183, हरियाणा से 177, तेलंगाना से 159, पंजाब से 133, गोवा से 129, अंडमान एवं निकोबार से 118, मिजोरम से 108, छत्तीसगढ़ से 102, मध्यप्रदेश से 75, हिमाचल प्रदेश से 65, उत्तराखंड से 61, दादरा एवं नगर हवेली से 44, जम्मू और कश्मीर से 20, असम से 15, दमन दीव से 10, मणिपुर से 7, पुड्डुचेरी से 6, त्रिपुरा से 5, चंडीगढ़ से 4, सिक्किम से 4 एवं मेघालय से 2 लोगों ने वापसी के लिए सरकार के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया है. अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और लक्षद्वीप तीन ऐसे राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश हैं, जहां से झारखंड के किसी व्यक्ति ने घर लौटने की इच्छा नहीं जतायी है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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