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सरकार की नीतियों की वजह से कोल इंडिया व स्थायी मजदूरों का अस्तित्व खतरे में

Updated at : 24 Jul 2025 6:32 PM (IST)
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सरकार की नीतियों की वजह से कोल इंडिया व स्थायी मजदूरों का अस्तित्व खतरे में

अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ की 14 सूत्री मांगों को लेकर सीसीएल सीकेएस ने गुरुवार को अशोक परियोजना में गेट मीटिंग की.

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अभाखमसं ने अशोक परियोजना में गेट मीटिंग की पिपरवार. अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ की 14 सूत्री मांगों को लेकर सीसीएल सीकेएस ने गुरुवार को अशोक परियोजना में गेट मीटिंग की. अध्यक्षता प्रदीप त्रिपाठी ने की. इस अवसर पर वक्ताओं ने अपने संबोधन में कोल इंडिया में मजदूरों की स्थिति, निजीकरण व सीएमपीएफ राशि पर चर्चा की. वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1984 में कोल इंडिया में स्थायी मजदूरों की संख्या 7.5 लाख व अधिकारियों की संख्या पांच हजार थी. सरकार की निजीकरण की पॉलिसी की वजह से अब मजदूरों की संख्या घट कर दो लाख हो गयी है. वहीं, अधिकारियों की संख्या बढ़ कर 15 हजार हो गयी है. कोल इंडिया में मजदूरों की भर्ती नहीं हो रही है, लेकिन अधिकारियों की भर्ती अब भी जारी है. वक्ताओं ने बताया कि सरकार की नीतियों व सीएमपीएफ घोटाले की वजह से 2030-31 के बाद मजदूरों को पेंशन मिलना मुश्किल हो जायेगा. सरकार मुनाफे के चक्कर भूमिगत खदानों को बंद कर खुली खदानों से जरूरत से ज्यादा कोयला निकाल रही है. वक्ताओं ने कहा कि सरकार की वर्तमान नीति का कोल इंडिया और इसके मजदूरों का अस्तित्व खतरे में पड़ने वाला है. वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सरकार को आइना दिखायें. भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रहित में कोल इंडिया व मजदूरों को बचाने के लिए लंबे आंदोलन की तैयारी की है. यूनियन 17 सितंबर तक इसी तरह आंदोलन चला कर कोल इंडिया व सरकार को सावधान करने की कोशिश करेगी. इसके बाद भी यदि सरकार नहीं चेती, तो संसद भवन का घेराव किया जायेगा. सभा को अभाखमसं के अध्यक्ष एसके चौधरी, संजीव चंद्रा, दिलीप गोस्वामी, महेंद्र केवट, उमेंद्र कुमार आदि ने संबोधित किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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