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रांची : अब 656 एकड़ में बनेगी स्मार्ट सिटी

Updated at : 29 Apr 2017 6:28 AM (IST)
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रांची : अब 656 एकड़ में बनेगी स्मार्ट सिटी

रांची : रांची स्मार्ट सिटी का निर्माण अब 656 एकड़ में होगा. पूर्व में 375 एकड़ में निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी. पर एचइसी के जमीन हस्तांतरण पर केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने भू-राजस्व विभाग को मिलनेवाली जमीन को भी स्मार्ट सिटी में हस्तांतरित करने का फैसला किया है. […]

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रांची : रांची स्मार्ट सिटी का निर्माण अब 656 एकड़ में होगा. पूर्व में 375 एकड़ में निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी. पर एचइसी के जमीन हस्तांतरण पर केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने भू-राजस्व विभाग को मिलनेवाली जमीन को भी स्मार्ट सिटी में हस्तांतरित करने का फैसला किया है. केंद्र सरकार द्वारा एचइसी की कुल 675.13 एकड़ जमीन राज्य सरकार को देने के प्रस्ताव पर मंजूरी दी गयी थी. जिसमें 656.30 एकड़ रांची स्मार्ट सिटी को मिलेगी और शेष पुलिस मुख्यालय को.
नगर विकास विभाग की ओर से जमीन का क्षेत्रफल बढ़ने के बाद अब नये सिरे से संकल्प जारी किया जायेगा. पूर्व में कैबिनेट द्वारा 375 एकड़ जमीन पर स्मार्ट सिटी के निर्माण को मंजूरी दी गयी थी. इसका संकल्प जारी कर दिया गया था. अब पुन: संशोधित संकल्प जारी होगा.
742 करोड़ एचइसी को मिलेगा
656 एकड़ जमीन के एवज में राज्य सरकार द्वारा एचइसी प्रबंधन को 742 करोड़ रुपये दिये जायेंगे. जिसमें डीजीपी द्वारा 19 करोड़ पुलिस मुख्यालय के लिए दिया जायेगा. शेष रकम नगर विकास विभाग द्वारा दिया जाना है. नगर विकास विभाग को ग्रेटर रांची डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा 337 करोड़ रुपये दिये जाने हैं. शेष रकम राज्य सरकार से उधार लिया जायेगा. उल्लेखनीय है कि पूर्व में 375 एकड़ में स्मार्ट सिटी के निर्माण को स्वीकृति दी गयी थी.
लामेयर इंटरनेशनल कंसल्टेंट नियुक्त
रांची स्मार्ट सिटी का विकास जर्मनी की कंपनी करेगी. नगर विकास विभाग ने जर्मन कंपनी लामेयर इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रांची स्मार्ट सिटी के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त किया है. तीन वर्षों तक यह कंपनी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने से लेकर स्मार्ट सिटी की तमाम सुविधाओं का डिजाइन तैयार करेगी. टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरा कराने में भी कंपनी की ओर से सहयोग किया जायेगा़ कंपनी यह काम केपीएमजी के सहयोग से करेगी. गौरतलब है कि तीन वर्षों के लिए कंपनी को लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान कंसलटेंसी चार्ज के रूप में किया जायेगा.
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