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रांची : मेडिकल कॉलेजों की ऑडिट रिपोर्ट जल्द दें, होगी कार्रवाई

Updated at : 23 Feb 2020 8:44 AM (IST)
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रांची : मेडिकल कॉलेजों की ऑडिट रिपोर्ट जल्द दें, होगी कार्रवाई

संजय रिम्स व पीएमसीएच में निविदा घोटाला. स्वास्थ्य सचिव का एजी से आग्रह रांची : स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने महालेखाकार से आग्रह किया है कि मेडिकल कॉलेजों में चल रही अॉडिट रिपोर्ट जल्द उपलब्ध करायी जाये, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके. सूत्रों के अनुसार सचिव ने व्यक्तिगत तौर पर एजी से संपर्क […]

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संजय
रिम्स व पीएमसीएच में निविदा घोटाला. स्वास्थ्य सचिव का एजी से आग्रह
रांची : स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने महालेखाकार से आग्रह किया है कि मेडिकल कॉलेजों में चल रही अॉडिट रिपोर्ट जल्द उपलब्ध करायी जाये, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके. सूत्रों के अनुसार सचिव ने व्यक्तिगत तौर पर एजी से संपर्क कर यह बात कही है. दरअसल रिम्स व पीएमसीएच में मेडिकल उपकरणों की खरीद संबंधी निविदा घोटाला मामले में एजी की अॉडिट चल रही है तथा इसकी प्रक्रिया अंतिम चरणों में है. इससे पहले इस मामले में एनएचएम के निदेशक वित्त नरसिंह खलखो की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि करते हुए किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस मामले की विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की थी.
टीम की जांच रिपोर्ट के अनुसार रिम्स, रांची तथा पीएमसीएच, धनबाद में विभिन्न मेडिकल उपकरणों की खरीद बाजार दर से दोगुनी से भी अधिक कीमत पर की गयी है. करीब 20 करोड़ रुपये के उपकरण 45 करोड़ में खरीदे गये हैं. गौरतलब है कि स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं द्वारा मेडिकल उपकरण की खरीद में गड़बड़ी की शिकायत पर पूर्व स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने 24 अगस्त 2018 को गत पांच वित्तीय वर्ष की निविदा व खरीद की जांच का आदेश दिया था.
अापूर्तिकर्ता कंपनियों के बीच मिलीभगत : बिड के लिए जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त विभाग के नियम के मुताबिक किसी निविदा का टेक्निकल व फाइनेंशियल बिड एक ही कमेटी (परचेज कमेटी) द्वारा खोला जाता है. पर रिम्स में टेक्निकल बिड खोलने के लिए अलग से एक टेक्निकल कमेटी बनायी गयी, जिसने विभिन्न निविदा में दो फर्म के साथ मिल कर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया. यानी एक परचेज कमेटी के बजाय अलग-अलग परचेज कमेटी व टेक्निकल कमेटी बनायी गयी. टेक्निकल कमेटी में अधीक्षक व डीन सहित कई विभागों के अध्यक्ष शामिल थे. वहीं, परचेज कमेटी में तत्कालीन निदेशक, अधीक्षक तथा वित्त, उद्योग, निगरानी व स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में दोनों कमेटी के सदस्यों तथा आपूर्तिकर्ता दो कंपनियों के बीच मिलीभगत की संभावना जतायी है.
दो कंपनियों का पता एक : दरअसल टेक्निकल कमेटी ने एक ही पते (30ए, सीआइटी रोड, कोलकाता, प.बंगाल-700014) वाली दो आपूर्तिकर्ता कंपनियों मेसर्स श्रीनाथ इंजीनियरिंग (पैन सं- एएपीसीएस 2088 ए) तथा मेसर्स डीके मेडिकल्स (पैन सं-इएफजेपीएस 5171 सी) को ज्यादातर निविदाओं के तकनीकी बिड में क्वालिफाइ कराया तथा शेष को रिजेक्ट कर दिया. डेंटल विभाग की एक निविदा (सं-8646. दिनांक-12.12.17) 239 उपकरणों की खरीद के लिए निकाली गयी थी. इसमें से 220 उपकरणों के लिए उपरोक्त दोनों कंपनियों को ही क्वालिफाइ किया गया. विभागीय जांच में इनमें से एक फर्म डीके मेडिकल्स द्वारा निविदा के साथ जमा किये गये ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर (उपकरण बनाने वाली कंपनी) के अधिकृत पत्र (अॉथोराइजेशन लेटर) फर्जी पाये गये.
दोनों कंपनियोें के संचालक एक
जांच कमेटी ने दोनों कंपनियों को एक ही व्यक्ति या ग्रुप द्वारा संचालित या खड़ी की गयी कंपनी बताया है, जिसमें डीके मेडिकल्स ने छद्म कंपनी का रोल निभाया. इन दोनों के टेंडर में भाग लेने से कोई टेंडर सिंगल टेंडर नहीं हुआ तथा निविदा में गड़बड़ी का मकसद भी पूरा हो गया. दरअसल एक सोची-समझी रणनीति के तहत यह काम हुआ. सभी टेंडर में श्रीनाथ इंजीनियरिंग की दर डीके मेडिकल्स से थोड़ी ही कम होती थी. इसलिए आपूर्ति आदेश इसी को मिलता था. डीके मेडिकल्स का चूंकि अधिकृत पत्र फर्जी होता था, इसलिए आपूर्ति आदेश पाने की स्थिति में वह इसे पूरा भी नहीं कर पाता.
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