रिम्स में मरीज की मौत पर हंगामा नर्स-गार्ड ने परिजनों की पिटाई की
Author Prabhat khabar digital desk
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रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टरों के साथ बैठक कर उन्हें धरती का भगवान बता रहे थे. ठीक उसी समय न्यूरो सर्जरी वार्ड में रिम्स के गार्ड व नर्स मरीज की मौत होने पर हो हंगामा कर रहे परिजनों की पिटाई कर रहे थे. ज्ञात हो कि […]
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रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टरों के साथ बैठक कर उन्हें धरती का भगवान बता रहे थे. ठीक उसी समय न्यूरो सर्जरी वार्ड में रिम्स के गार्ड व नर्स मरीज की मौत होने पर हो हंगामा कर रहे परिजनों की पिटाई कर रहे थे. ज्ञात हो कि बोकारो के गोमिया निवासी 17 साल के रोहित की इलाज के दौरान मौत हो गयी. शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद परिजन उसे लेकर रिम्स आये थे.
परिजनों की मानें, तो यहां रोहित को भर्ती कराने के बाद एक बार भी डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आये. इस कारण सोमवार को उसने दम तोड़ दिया.
इलाज में लापरवाही को लेकर जब परिजनों ने विरोध किया, तो मृत मरीज को ही ऑक्सीजन व पानी (स्लाइन) चढ़ा दिया गया. इस पर परिजनों ने कहा कि जब रोहित जिंदा था, तब कोई डॉक्टर झांकने तक नहीं आया. अब जब उसकी मौत हो गयी, तो उसे ऑक्सीजन व पानी क्यों चढ़ाया जा रहा है. इस पर नर्स भड़क गयी. उन्होंने गार्ड को बुला कर परिजनों के साथ मारपीट की.
अब कभी नहीं आयेंगे रिम्स : मृतक की बहन ने रो-रोकर बताया कि उसने रिम्स के बारे में बहुत कुछ सुना था. सुना था कि यह राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है, जहां इलाज की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. यही सुन कर हम रिम्स आये थे. यहां आने पर हमारे साथ जो हुआ, उससे एक बात तो साफ हो गयी कि यहां के डॉक्टरों के पास तो दिल ही नहीं है.
मरीज भेड़-बकरी की तरह यहां जमीन पर लेटे रहते हैं, लेकिन डॉक्टरों को इससे कोई मतलब नहीं है. वे केवल एक बार वार्ड का भ्रमण करने आते हैं. फिर चले जाते हैं. मरीज की हालत कैसी है व क्या इलाज करने से वह जल्दी ठीक होगा, यह देखने का समय यहां के डॉक्टरों के पास नहीं है. रोहित की बहन ने कहा कि वह जिंदगी में अब कभी रिम्स नहीं आयेगी.
इधर… हो रहा था हंगामा, उधर… स्वास्थ्य मंत्री कर रहे थे रिम्स के डॉक्टरों को संबोधित
परिजनों का आरोप
मरीज के मरने के बाद उसे चढ़ाया जा रहा था स्लाइन व ऑक्सीजन
मरीज की हालत कैसी है उसका क्या इलाज किया जाये, इसके लिए डॉक्टरों के पास समय नहीं है
मरीज भेड़-बकरी की तरह यहां जमीन पर लेटे रहते हैं, पर डॉक्टरों को इससे कोई मतलब नहीं है
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