रांची : रंगदारी के शिकार हैं कारोबारी पीड़ित मान जांच करे एनआइए

Updated at : 06 Feb 2020 9:31 AM (IST)
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रांची : रंगदारी के शिकार हैं कारोबारी पीड़ित मान जांच करे एनआइए

वकीलों ने मीडिया के समक्ष रखा पक्ष, कहा रांची : टेरर फंडिंग मामले में नया मोड़ आ गया है. मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किये जाने के बाद उनके वकीलों ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है. मामले में करीब 14 माह पूर्व गिरफ्तार आधुनिक कंपनी के तत्कालीन जीएम […]

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वकीलों ने मीडिया के समक्ष रखा पक्ष, कहा
रांची : टेरर फंडिंग मामले में नया मोड़ आ गया है. मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किये जाने के बाद उनके वकीलों ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है. मामले में करीब 14 माह पूर्व गिरफ्तार आधुनिक कंपनी के तत्कालीन जीएम संजय जैन के वकील प्रवीण गुप्ता और शुभम गुप्ता ने बुधवार को रांची प्रेस क्लब में मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि कंपनी या ट्रांसपोर्टिंग से जुड़े लोग टेरर फंडिंग नहीं करते थे. उनसे रंगदारी के तौर पर लेवी मांगी जाती थी. एक कारोबारी के तौर पर वे पीड़ित थे.
सरकार को चाहिए था कि उन्हें सुरक्षा देती. व्यवसाय करने के लिए कारोबारियों ने भयपूर्वक लेवी या रंगदारी दी, उसको एनआइए टेरर फंडिंग में जेल भेज रही है. अधिवक्ता ने मांग की कि एनआइए अपने जांच का नजरिया बदले. संजय जैन और उनके जैसे लोगों को पीड़ित मानकर जांच करें न कि अपराधी मानकर. उन्होंने कहा कि मामले में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व एनआइए के डीजी को पीड़ित पक्ष की ओर से पत्र लिखा गया है. एक सवाल के जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि एनआइए आतंकवादियों की जगह नक्सलियों से पीड़ित कारोबारियों को पकड़ने में लगी है. अवैध वसूली को टेरर फंडिंग का नाम दिया जा रहा है.
आरोपी संजय जैन की पत्नी पिंकी जैन ने एनआइए जांच में तथ्यों की गलती बताते हुए डीजी एनआइए से इंसाफ की गुहार लगायी है. पिंकी जैन ने पत्र में कहा है कि संजय जैन आधुनिक कंपनी में एक वेतनभोगी कर्मी थे. उन्हें किसी भी मद से राशि निर्गत करने का अधिकार नहीं था. ऐसे में उन्होंने किसी भी नक्सली संगठन को अपने हाथ से या किसी दूसरे के जरिये पैसे का भुगतान नहीं किया है.
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