विद्यार्थियों को ई-सिगरेट व निकोटीन की हानि के प्रति जागरूक करें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Jan 2020 7:31 AM (IST)
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रांची : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विवि, कॉलेजों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ई-सिगरेट के सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है. साथ ही इलेक्ट्रोनिक सिगरेट अौर निकोटीन से होनेवाली हानि के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कहा है. यूजीसी के सचिव प्रो रजनीश जैन ने विवि […]
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रांची : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विवि, कॉलेजों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ई-सिगरेट के सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है. साथ ही इलेक्ट्रोनिक सिगरेट अौर निकोटीन से होनेवाली हानि के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कहा है. यूजीसी के सचिव प्रो रजनीश जैन ने विवि के कुलपतियों व संस्थानों के निदेशक को पत्र भेज कर कहा है कि केंद्र सरकार ने पूरे देश में ई-सिगरेट (सिगार) पर प्रतिबंध लगा दिया है.
इसके लिए सरकार ने इलेक्ट्रोनिक सिगरेट अध्यादेश-2019 भी लाया है. नियमित ई-सिगरेट के प्रयोग से ने केवल हृदय रोग बल्कि श्वसन प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. एक अौसत किशोर के मस्तिष्क के हिस्से को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. प्रतिबंध के बावजूद संस्थान परिसर, हॉस्टल आदि जगहों पर किसी न किसी रूप में इसका प्रयोग हो रहा है.
कुछ मायने में इससे संबंधित विज्ञापन द्वारा विद्यार्थियों को बरगलाया जा रहा है. ऐसे में विद्यार्थियों को जागरूक करना आवश्यक हो गया है. इसके लिए संस्थान में सेमिनार, संगोष्ठी, पोस्टर, पेंटिंग्स, वाद-विवाद के जरिये विद्यार्थियों को जागरूक कर सकते हैं. सचिव ने कैंपस में ई-सिगरेट को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर सख्ती से इसका पालन करने का निर्देश दिया है.
क्या है ई-सिगरेट
एक इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, ई-सिगरेट या फिर वाष्पीकृत सिगरेट एक बैटरी (लिथियम आयन रिचार्जेबल) चालित उपकरण है, साधारण सिगरेट की तरह दिखता है. जो निकोटीन या गैर निकोटीन के वाष्पीकृत होनेवाले घोल को धुएं में परिवर्तित कर सांस के साथ सेवन की जानेवाली खुराक है. यह सिगरेट, सिगार या पाइप जैसे धूम्रपान वाले तंबाकू उत्पादों का एक
विकल्प है.
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