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जानिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ शपथ लेने वाले झारखंड के इन नए ''मंत्रियों'' के बारे में

Updated at : 29 Dec 2019 4:02 PM (IST)
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जानिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ शपथ लेने वाले झारखंड के इन नए ''मंत्रियों'' के बारे में

रांची: रविवार यानी आज रांची के मोरहाबादी मैदान में झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ महागठबंधन में उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस से दो और राष्ट्रीय जनता दल से एक मंत्री ने शपथ ली. कांग्रेस पार्टी से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने […]

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रांची: रविवार यानी आज रांची के मोरहाबादी मैदान में झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ महागठबंधन में उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस से दो और राष्ट्रीय जनता दल से एक मंत्री ने शपथ ली. कांग्रेस पार्टी से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने शपथ ली तो वहीं राजद के एकमात्र विधायक सत्यानंद भोक्ता ने मंत्री पद की शपथ ली. कैबिनेट का विस्तार बाद में होगा.

रामेश्वर उरांव- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ रामेश्वर उरांव ने कांग्रेस पार्टी के कोटे से मंत्री पद की शपथ ली. 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी रामेश्वर उरांव ने इस बार लोहरदगा विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत को हराया. सुखदेव भगत इस बार बीजेपी की तरफ से चुनावी मैदान में थे. रामेश्वर उरांव फिलहाल झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. इससे पहले रामेश्वर उरांव कांग्रेसनीत मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. 72 वर्षीय रामेश्वर उरांव राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन भी रह चुके हैं.

रामेश्वर उरांव राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. रामेश्वर उरांव पहली बार तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने बिहार का डीआईडी रहते हुए बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था.

आलमगीर आलम- आलमगीर आलम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पाकुड़ विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने इस सीट से साल 2000, 2004, 2014 और 2019 की चुनाव जीता. इस बार कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का साथ छोड़कर आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अकील अख्तर को बड़े अंतर से हराया. आलमगीर आलम ने पूर्ववर्ती गठबंधन सरकार में विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली है. इस बार कांग्रेस की तरफ से वो विधायक दल के नेता चुने गए हैं.

सत्यानंद भोक्ता- चतरा विधानसभा सीट से साल 2000 से 2009 तक विधानसभा के सदस्य रहे. इस दौरान वो बीजेपी के टिकट पर यहां से विधायक निर्वाचित होते रहे. लेकिन साल 2014 में बीजेपी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया तब उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा का दामन थाम लिया. उन्होंने झाविमो के टिकट पर चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए.

2019 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया. राष्ट्रीय जनता दल ने उन्हें चतरा विधानसभा सीट से महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया. सत्यानंद भोक्ता ने जीत हासिल की. चूंकि राजद के एक ही उम्मीदवार ने जीत हासिल की है इसलिए सत्यानंद भोक्ता का मंत्री बनना तय किया.

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