संदर्भ : हेमंत का शपथ ग्रहण, यह गुरुजी की तपस्या का फल है

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Dec 2019 6:35 AM

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अनुज कुमार सिन्हा रविवार काे माेरहाबादी मैदान में जब हेमंत साेरेन झारखंड के मुख्यमंत्री के ताैर पर शपथ लेंगे, ताे सबसे ज्यादा जिस व्यक्ति काे खुशी हाेगी, वे हैं शिबू साेरेन (जिन्हें लाेग स्नेह-आदर से दिशाेम गुरु कहते हैं). खुश हाेंगे झगड़ू पंडित आैर उन जैसे हजाराें आंदाेलनकारी, जिन्हाेंने अपना पूरा जीवन झारखंड आंदाेलन में […]

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अनुज कुमार सिन्हा
रविवार काे माेरहाबादी मैदान में जब हेमंत साेरेन झारखंड के मुख्यमंत्री के ताैर पर शपथ लेंगे, ताे सबसे ज्यादा जिस व्यक्ति काे खुशी हाेगी, वे हैं शिबू साेरेन (जिन्हें लाेग स्नेह-आदर से दिशाेम गुरु कहते हैं).
खुश हाेंगे झगड़ू पंडित आैर उन जैसे हजाराें आंदाेलनकारी, जिन्हाेंने अपना पूरा जीवन झारखंड आंदाेलन में लगा दिया. खुश हाेगी झारखंड के शहीदाें की आत्मा, जिनकी शहादत के बल पर झारखंड बना. इसके साथ ही उम्मीदें जगेंगी शहीद परिवार के परिजनाें में. उन्हें संताेष हाेगा कि यह वह सरकार बन रही है जिसे बनाने के लिए उनके पति-पिता, भाई-बेटे ने कभी शहादत दी थी. इसमें उनका भी कुछ न कुछ हिस्सा है.
याद कीजिए 1980 के गुवा गाेलीकांड काे, सेरेंगदा गाेलीकांड काे, तिरूलडीह गाेलीकांड काे, कुड़काे गाेलीकांड काे, जायदा गाेलीकांड काे.
ऐसे सैकड़ाें गाेलीकांड हुए, सैकड़ाें आंदाेलनकारी शहीद हुए. आंदाेलन में गंगााराम कालुंडिया, बीदरनाग जैसे पूर्व सैनिक शहीद हुए. इन लाेगाें ने चीन आैर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. लेकिन इन्हें अपनी ही पुलिस ने झारखंड में मार दिया था. खुद शिबू साेरेन ने आंदाेलन के दाैरान बसंत पाठक आैर सदानंद झा जैसे बेहद करीब साथियाें काे खाेया था. बसंत ताे उनके लेफ्टिनेंट हुआ करते थे. 1987 में निर्मल महताे के ताैर पर गुरुजी ने अपना साथी खाे दिया था. धान सिंह मुंडारी ने अपनी पूरी जवानी शिबू सोरेन के साथ आंदोलन को दे दी. इसे कौन भूल सकता है. कल का दिन उन शहीदाें काे याद करने आैर उनके सपनाें काे साकार करने का है.
यह सूची बहुत लंबी है. याद कीजिए गुवा गाेलीकांड के बाद कैसे पुलिस बहादुर उरांव काे खाेज रही थी. वे फरारी में थे आैर पुलिस ने उनकी पत्नी व चार माह के जुड़वां बच्चाें काे ठंड में घर से बाहर निकाल दिया था. ठंड से दाेनाें बच्चाें की माैत हाे गयी थी. बहादुर बाबू की इस कुर्बानी काे काैन भूल सकता है. मछुआ गागराई, लाल सिंह मुंडा आैर साबुआ हांसदा की शहादत इसी कड़ी में है. ऐसी घटनाआें से भरा रहा है झारखंड आंदाेलन आैर शिबू साेरेन का जीवन. इसी संघर्ष के बल पर एक जमीन तैयार हुई, जिसका परिणाम आज सामने आया है.
अगर कहें कि शिबू साेरेन ने 1972-75 के दाैरान टुंडी के आसपास के गांवाें में महाजनाें आैर शाेषकाें के खिलाफ जाे कार्रवाई की थी, धान काटाे आंदाेलन चलाया था, आदिवासियाें काे उनकी जमीन वापस करायी थी, सामूहिक खेती का फार्मूला बताया था, उसी आंदाेलन ने झारखंड मुक्ति माेरचा के लिए एक बड़ा जनाधार तैयार किया.
वही जनाधार आज काम आया आैर हेमंत साेरेन की अगुवाई में सरकार बन रही है. जब गुरुजी पारसनाथ की पहाड़ियाें में रह कर आंदाेलन चलाते थे, तब हेमंत साेरेन का जन्म भी नहीं हुआ था. तब गुरुजी की समानांतर सरकार चलती थी आैर उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए पुलिस ने इनाम की घाेषणा कर रखी थी. सैकड़ाें आदिवासी उनकी सुरक्षा में तीर-धनुष लेकर तैनात रहते थे आैर उन्हें पुलिस पकड़ नहीं सकी थी.
देश में जब आपातकाल लगा था, उसी दाैरान धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त केबी सक्सेना ने खुद शिबू साेरेन से जंगल में जाकर मुलाकात की थी आैर उन्हें समझाया था. कुछ दिनाें बाद नये उपायुक्त लक्षमण शुक्ला ने उन्हें समर्पण कराया था. उसके बाद शिबू साेरेन ने अपने समर्पित कार्यकर्ताआें की फाैज तैयार की. उनका संघर्ष आैर संगठन का फैलाव आज दिखता है.
झारखंड के सबसे बड़े जननेता, जिन्हें सुनने आैर देखने के लिए 30-40 किलाेमीटर दूर से गांव-जंगल से लाेग पैदल आते हैं आैर घंटाें सुनते हैं. इस चुनाव में भी 76 साल के गुरुजी ने माेरचा संभाला. पुरानी बाताें काे याद कराया. उनके प्रति वही विश्वास लाेगाें में दिखा जाे 1970-80 के दशक में दिखा करता था. यह बात साबित करती है कि गुरुजी का जलवा आज भी कायम है आैर झारखंड उन्हें बेहद चाहता है.
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लद्दाख में पारा शून्य से 20 डिग्री नीचे
नयी दिल्ली : सर्दी के महापड़ाव से पूरा उत्तर भारत कांप उठा है. जनजीवन थम सा गया है, ट्रेनों और उड़ानों की रफ्तार धीमी हो गयी है. दरअसल, लद्दाख की द्रास घाटी से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत पूरा उत्तर भारत ही शीतलहर की चपेट में है. यहां पारा नये रिकॉर्ड बना रहा है. दुनिया के दूसरे सबसे सर्द रिहायशी इलाके द्रास में पारा -20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दिल्ली में शनिवार को यह 2.4 तक चला गया.
राजस्थान के सीकर में तापमान शून्य से -4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया़ मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बताया गया कि पूरे बिहार, झारखंड के साथ-साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले दो दिनों तक हाड़ कंपाने वाली सर्दी रहेगी. वहीं, 31 दिसंबर से एक जनवरी तक उत्तर -पूर्वी और मध्य भारत में बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है. देश के पूर्वी हिस्से मे यह ठंड दो जनवरी तक रहने की संभावना है.
फिलहाल राहत नहीं : मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड के कुछ हिस्सों, सिक्किम और ओड़िशा भी अगले दो दिनों तक घने कोहरे की चपेट में रहेंगे, जबकि 31 दिसंबर के बाद अगले 4-5 दिनों तक उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में घना कोहरा छा सकता है.
शहर तापमान
लद्दाख का द्रास -20 डिग्री
राजस्थान का शेखावटी-4 डिग्री
दिल्ली का लोधी रोड1.7 डिग्री
उत्तर प्रदेश का मथुरा 2 डिग्री
हिमाचल का किलोंग-11.5 डिग्री
एमपी का पंचमढ़ी 1.2 डिग्री
हरियाणा का हिसार 0.2 डिग्री
पंजाब का बठिंडा 2.3 डिग्री
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