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झारखंड विधानसभा परिणाम : पिछली बार के 20 नये विधायकों में केवल 11 ही जीते, तीन मंत्रियों ने अपनी सीट बचायी

Updated at : 24 Dec 2019 9:21 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा परिणाम : पिछली बार के 20 नये विधायकों में केवल 11 ही जीते, तीन मंत्रियों ने अपनी सीट बचायी

रांची : वर्ष 2014 के चुनाव में 20 नये विधायक चुन कर आये थे. इनमें केवल 11 विधायक ही ऐसे हैं, जो इस बार चुनाव जीत सके हैं. 20 नये विधायकों में चार विधायक राज्य में मंत्री भी बने थे. इनमें लुईस मरांडी, रणधीर सिंह, अमर कुमार बाउरी और डॉ नीरा यादव शामिल हैं. इनमें […]

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रांची : वर्ष 2014 के चुनाव में 20 नये विधायक चुन कर आये थे. इनमें केवल 11 विधायक ही ऐसे हैं, जो इस बार चुनाव जीत सके हैं. 20 नये विधायकों में चार विधायक राज्य में मंत्री भी बने थे. इनमें लुईस मरांडी, रणधीर सिंह, अमर कुमार बाउरी और डॉ नीरा यादव शामिल हैं. इनमें से इस बार तीन ही जीतने में सफल रहे.
विरंची नारायण (बोकारो) : बोकारो से भाजपा के विरंची नारायण 2014 में सबसे अधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे. इस बार उतार चढ़ाव के बीच वह जीतने में सफल रहे. वह केवल 13,313 वोट से कांग्रेस की श्वेता सिंह को हरा कर दोबारा विधायक बने.
शशिभूषण सामड ( चक्रधरपुर) : 2014 में पहली बार चुनाव जीते. इस बार टिकट नहीं मिलने पर झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़े, पर सफल नहीं हो सके.
राज सिन्हा (धनबाद) : धनबाद से भाजपा के राज सिन्हा 2014 में पहली बार चुनाव जीते थे. इस बार वह दोबारा 30629 वोटों से कांग्रेस के मन्नान मल्लिक को हरा कर विधायक बने.
राजकुमार यादव (राजधनवार) : पिछली बार राजधनवार से भाकपा माले के राजकुमार यादव ने जीता था. पिछली बार वह झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को हरा कर चर्चा में आये थे. इस बार श्री यादव सफल नहीं हो सके.
अमित कुमार मंडल (गोड्डा, भाजपा) : रघुनंदन मंडल 2014 में भाजपा के टिकट से चुनाव जीते थे. उनके निधन के बाद उपचुनाव में अमित कुमार मंडल पहली बार चुनाव जीते. भाजपा ने उन्हें टिकट दिया था. इस बार भी श्री मंडल जीतने में सफल रहे.
आलोक चौरसिया (डालेटनगंज) : आलोक चौरसिया झाविमो से चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गये. इस बार भाजपा ने टिकट दिया और दोबार वह जीतने में सफल हो गये. कांग्रेस के केएन त्रिपाठी को हराकर वह दूसरी बार विधायक बने.
बबीता देवी (गोमिया) : 2014 में योगेंद्र प्रसाद झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़े थे. सजा होने के बाद उपचुनाव में उनकी पत्नी बबीता देवी झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ी और जीत गयी, पर इस बार वह आजसू के लंबोदर महतो से हार गयीं.
कुशवाहा शिवपूजन मेहता (हुसैनाबाद) : 2014 में कुशवाहा शिवपूजन मेहता हुसैनाबाद से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे 27 हजार से अधिक वोटों से जीते थे. इस बार उन्होंने पार्टी बदल कर आजसू ज्वाइन कर लिया. हुसैनाबाद से एनसीपी के कमलेश सिंह से वह हार गये.
इरफान अंसारी (जामताड़ा) : जामताड़ा से कांग्रेस के टिकट पर इरफान अंसारी भी वर्ष 2014 में चुनाव जीत कर विधायक बने. इस बार फिर वह जामताड़ा सीट से चुनाव जीत गये. 38 हजार 741 वोट से उन्होंने भाजपा के वीरेंद्र मंडल को हराया.
बादल (जरमुंडी) : जरमुंडी से कांग्रेस के बादल 2014 में पहली बार चुनाव जीते थे. वह दोबारा जीतने में सफल रहे.
संजीव सिंह (झरिया) : झरिया से संजीव सिंह 2014 में पहली बार विधायक बने. इस बार उन्हें टिकट न देकर भाजपा ने उनकी पत्नी रागिनी सिंह को टिकट दिया. वह अपनी गोतनी पूर्णिमा से चुनाव हार गयी.
रामकुमार पाहन (खिजरी) : भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक बने. इस बार कांग्रेस के राजेश कच्छप से वह हार गये.
अनंत कुमार ओझा (राजमहल) : 2014 में पहली बार विधायक बने. राजमहल सीट से वह दूसरी बार विधायक बनने में सफल रहे.
सीमा महतो (सिल्ली) : 2014 में सिल्ली से अमित महतो झामुमो के टिकट पर विधायक बने. सजा होने के कारण विधायकी छोड़नी पड़ी. उपचुनाव में उनकी पत्नी सीमा महतो ने आजसू के सुदेश महतो को हराया, पर इस बार चुनाव में सुदेश ने उन्हें हरा दिया.
विकास कुमार मुंडा (तमाड़) : वर्ष 2014 में आजसू के टिकट पर तमाड़ विधानसभा चुनाव जीता. इस बार झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़े और दोबारा जीतने में सफल हो गये.
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