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झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें और अंतिम चरण में संथाल परगना की 16 सीटों पर 70.87 फीसदी मतदान

रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें और अंतिम चरण में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गढ़ माने जाने वाले संथाल परगना क्षेत्र के 6 जिलों की 16 विधानसभा सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया. 70.87 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. हेमंत सोरेन, डॉ लुईस मरांडी, […]

रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव के पांचवें और अंतिम चरण में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गढ़ माने जाने वाले संथाल परगना क्षेत्र के 6 जिलों की 16 विधानसभा सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया. 70.87 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. हेमंत सोरेन, डॉ लुईस मरांडी, प्रदीप यादव और रणधीर कुमार सिंह जैसे दिग्गज नेता और मंत्री समेत 236 उम्मीदवारों की किस्मत इवीएम में लॉक हो गयी. अब सबकी नजरें 23 दिसंबर पर टिकी हैं, जिस दिन चुनाव परिणाम आयेंगे और मालूम होगा कि इस बार किसकी सरकार बनेगी. रघुवर बरकरार रहेंगे या विरोधी दलों की सरकार अस्तित्व में आयेगी.

जामताड़ा जिला में सबसे ज्यादा 76.22 फीसदी वोटिंग हुई, तो सबसे कम 68.43 फीसदी वोटिंग गोड्डा में हुई. शाम पांच बजे तक साहेबगंज में 69.43 फीसदी, पाकुड़ में 74.07, दुमका में 67.03, जामताड़ा में 76.22, देवघर में 75.97 और गोड्डा में 68.43 फीसदी मतदान हुआ.

विधानसभा क्षेत्र की बात करें, तो सबसे ज्यादा 78.01 फीसदी वोटिंग नाला में हुई. राजमहल में 67.23, बोरियो में 71.58, बरहेट में 70.07, लिट्टीपाड़ा में 70.01, पाकुड़ में 76.10, महेशपुर में 74.81, शिकारीपाड़ा में 72.50, नाला में 78.01, जामताड़ा में 74.77, दुमका में 59.73, जामा में 65.27, जरमुंडी-71.53, सारठ में 75.97, पोड़ैयाहाट में 69.61, गोड्डा में 68.54 और महगामा में 67.23 फीसदी मतदान हुआ. संथाल परगना की इन सीटों पर पुराने ट्रेंड के हिसाब से ही मतदान हुआ.

सभी 16 सीटों पर मतदाताओं में अच्छा-खासा उत्साह देखा गया. कुछ सीटों पर इवीएम मशीन में खराबी आयी, जिससे मतदाताओं को परेशानी हुई, लेकिन बाद में इवीएम को बदलकर मतदान कराया गया. मतदान केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखी गयीं. युवा वोटरों में जितना जोश था, उससे ज्यादा जोश महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों ने दिखाया. कड़ाके की ठंड में भी सुबह सात बजे से ही मतदान केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग गयीं.

नक्सल प्रभावित बोरियो, बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर और शिकारीपाड़ा में मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की भारी भीड़ देखी गयी. नक्सल प्रभावित इलाकों में दोपहर तीन बजे मतदान संपन्न हो गया, जबकि शेष 11 विधानसभा सीट राजमहल, पाकुड़, नाला, जामताड़ा, दुमका, जामा, जरमुंडी, सारठ, पोड़ैयाहाट, गोड्डा एवं महगामा में शाम 5 बजे तक लोगों ने वोट किये. शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के काठीकुंड के सरुआपानी में कुख्यात नक्सली कमांडर ताला दा उर्फ शहदेव राय के पिता बदरी राय ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

838 दिव्यांग और 80 साल से ज्यादा उम्र के 802 मतदाताओं यानी कुल 1640 वोटर्स ने पोस्टल बैलेट से मतदान किया. ये मतदाता पाकुड़, राजमहल, गोड्डा और जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र के हैं. इसके पहले, देवघर, बोकारो और धनबाद में भी पोस्टल बैलेट की सुविधा दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं को दी गयी थी.

आमतौर पर चुनाव शांतिपूर्ण रहा. किसी भी क्षेत्र में किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई. हां, एक-दो जगहों पर स्थानीय कारणों से वोट बहिष्कार जरूर किया गया. चुनाव से पहले एक पुलिसकर्मी की और मतदान करने के बाद एक मतदाता की मृत्यु हो गयी.

बोरियो विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र पर सूरज साहू नामक मतदाता की मृत्यु हो गयी. 65 साल के सूरज साहू ने बोरियो प्रखंड मुख्यालय के बूथ संख्या 146 पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और मतदान केंद्र से बाहर आते ही वह बेहोश हो गये. उन्हें तत्कालीन पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इससे पहले, जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हवलदार सुद्धेश्वर प्रसाद सिंह का निधन हो गया. करीब 50 साल के सुद्धेश्वर प्रसाद सिंह बिहार के वैशाली जिला के हाजीपुर के रहने वाले थे. जामताड़ा में पीसीआर वैन में ड्यूटी पर थे. चुनाव आयोग ने कहा है कि मृतक के परिवार को सरकारी प्रावधान के अनुसार मुआवजा मिलेगा.

पाकुड़ जिला में महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के महेशपुर प्रखंड मुख्यालय में प्लस टू उच्च विद्यालय के मतदान केंद्र संख्या 88 के बाहर निर्वाचन पदाधिकारियों ने जेएमएम के एजेंट को झंडा के साथ देखा, तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया. यह कार्रवाई सुबह-सुबह हुई. सभी पार्टियों के एजेंटों को पोलिंग बूथ से तय दूरी पर ही बैठने की हिदायत दी गयी.

पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार सिन्हा का चुनाव से दो दिन पहले निधन हो गया. उनका चुनाव चिह्न आलमीरा छाप था. अब इस सीट पर सिर्फ 7 उम्मीदवार रह गये हैं.

तालझारी प्रखंड के मनोहरपुर गांव में मतदाताओं ने वोट बहिष्कार कर दिया. प्रशासन ने मतदाताओं को काफी समझाया, लेकिन लोग नहीं माने और यहां एक भी मत नहीं पड़ा.

पाकुड़ विधानसभा अंतर्गत बूथ नंबर 32 उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिमलतला में वीवीपैट, सीपीयू एवं इवीएम मशीनों में तकनीकी खराबी आ गयी, तीनों मशीनों को बदल कर नया सेट लगाया गया. करीब 1 घंटे की देरी से मतदान शुरू हो पाया.

लिट्टीपाड़ा के धोपहाड़ी में लोगों ने वोट बहिष्कार किया. रोड नहीं बनने के विरोध में उन्होंने मतदान से इन्कार कर दिया. उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 884 वोटर थे. बताया गया है कि रैयत अपनी जमीन पर सड़क नहीं बनाने दे रहे. इसके विरोध में ग्रामीणों ने वोट का बहिष्कार कर दिया.

-अंतिम चरण में 4 हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल हुआ. एक एयर एंबुलेंस की भी की गयी थी व्यवस्था

5,389 पोलिंग बूथ बनाये गये थे

-राज्य पुलिस और आर्म्ड फोर्स के 41,000 जवानों ने संभाली थी सुरक्षा-व्यवस्था

4 हेलीकॉप्टर से कुल 28 मतदान केंद्रों के कर्मियों को पहुंचाया गया.

-दूर-दराज के 84 इलाकों में सैटेलाइट फोन की व्यवस्था की गयी थी.

पांचवें चरण में बरहेट व दुमका (हेमंत सोरेन), दुमका (लुईस मरांडी), पोड़ैयाहाट (प्रदीप यादव) और सारठ (रणधीर कुमार सिंह) पर लोगों की नजर रहेगी.

पांचवें और आखिरी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी और जेएमएम के अध्यक्ष शिबू सोरेन तक ने अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में जमकर प्रचार किया. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और जेवीएम के प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने भी अपना पूरा जोर लगा दिया था.

हेमंत सोरेन ने पांचवें और अंतिम चरण के प्रचार के अंतिम दिन 18 दिसंबर को प्रियंका गांधी के साथ आयोजित एक संयुक्त रैली में पाकुड़ में एक विवादित बयान दे दिया. इस मुद्दे पर भाजपा ने चुनाव आयोग में शिकायत की, जिसकी जांच की जा रही है. हेमंत ने भी आनन-फानन में मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ दुमका में अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत पुलिस में मामला दर्ज करा दिया. इससे दोनों पार्टियों और नेताओं में तल्खी बहुत बढ़ गयी है.

बरहेट, लिट्टीपाड़ा, शिकारीपाड़ा, महगामा और गोड्डा सीट पर बड़े अंतर से जीत या हार होती है. पिछली बार इन सीटों पर विजेता और पराजित प्रत्याशियों के मतों का अंतर 15 प्रतिशत तक था. कई सीटें ऐसी भी हैं, जहां एक-दो फीसदी वोट खिसकने से ही परिणाम उलट जाते हैं. राजमहल, बोरियो, महेशपुर, दुमका, जामा और जरमुंडी ऐसी ही सीटें हैं.

30 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच झारखंड विधानसभा चुनाव के आम चुनाव संपन्न हुए. 30 नवंबर को पहले चरण की 13 सीटों पर, 7 दिसंबर को 20 सीटों पर, 12 दिसंबर को 17 सीटों पर और 16 दिसंबर को 15 सीटों पर मतदान हुआ था. अब निगाहें 23 दिसंबर पर है, जिस दिन सारे इवीएम एक साथ खुलेंगे. उसी दिन शाम तक पता चल जायेगा कि राज्य की नयी आलीशान विधानसभा में कौन 81 लोग बैठेंगे.

Prabhat Khabar Digital Desk
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