रांची : पांच मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी का बहिष्कार
Updated at : 05 Nov 2019 9:29 AM (IST)
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रांची : राज्य के सभी पांच मेडिकल कॉलेज (एमजीएम, पीएमसीएच, दुमका, हजारीबाग व पलामू) के सीनियर रेजीडेंट की कलमबंद हड़ताल सोमवार से शुरू हो गयी. ओपीडी में सीनियर रेजीडेंट ने सेवाएं नहीं दी. इससे दूर-दराज से आये मरीज परेशान हुए. सबसे ज्यादा परेशानी तीनों नये मेडिकल कॉलेजों में आये मरीजों को हुई. यहां का ओपीडी […]
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रांची : राज्य के सभी पांच मेडिकल कॉलेज (एमजीएम, पीएमसीएच, दुमका, हजारीबाग व पलामू) के सीनियर रेजीडेंट की कलमबंद हड़ताल सोमवार से शुरू हो गयी. ओपीडी में सीनियर रेजीडेंट ने सेवाएं नहीं दी. इससे दूर-दराज से आये मरीज परेशान हुए. सबसे ज्यादा परेशानी तीनों नये मेडिकल कॉलेजों में आये मरीजों को हुई. यहां का ओपीडी सीनियर रेजीडेेंट के भरोसे ही चलता है और मेडिसीन ओपीडी में सबसे अधिक मरीज आते हैं. इस दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी के बाहर प्रदर्शन भी किया. सभी कम वेतन मिलने की बात पर आंदोलन शुरू किये हैं.
सरकार ने तीन नये मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में फैकल्टी के तहत सीनियर रेजीडेंट काे नियुक्त किया था. नियुक्ति के बाद अब ये कम वेतनमान ( 60,000 रुपये) मिलने की बात कह रहे हैं. इनका कहना है कि रिम्स में एसआर को एक लाख रुपये, पड़ोसी राज्य बिहार में 80,000 रुपये व पश्चिम बंगाल में 75,000 रुपये दिये जा रहे हैं. सरकार झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों (रिम्स को छोड़कर) में दिये जा रहे वेतन में वृद्धि करे. इधर, सीनियर रेजीडेंटों का कहना है कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. सरकार उनकी मांग पर विचार नहीं करती है तो इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित कर दी जायेंगी.
इमरजेंसी सेवाओं पर भी पड़ा असर
सीनियर रेजीडेंट ने इमरजेंसी सेवा को आंदोलन से अलग रखा था. इससे इमरजेंसी में सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रही. सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को अगले दिन आने की बात कर लौटा दिया गया, जिससे मरीज निजी अस्पताल व क्लिनिक में परामर्श लेने को विवश रहे. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अन्य दिनों की अपेक्षा 40 से 50 ज्यादा मरीजों को इमरजेंसी में परामर्श दिया गया.
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