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रांची : हेमंत की पत्नी के नाम हरमू में ली गयी जमीन की होगी जांच

Updated at : 25 Oct 2019 6:51 AM (IST)
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रांची : हेमंत की पत्नी के नाम हरमू में ली गयी जमीन की होगी जांच

रांची : राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी के नाम पर हरमू में सोहराय भवन की जमीन खरीद के मामले की जांच करने का निर्देश दिया है. विभाग के संयुक्त सचिव सुनील कुमार सिंह ने 22 अक्तूबर को पत्र लिखकर रांची उपायुक्त से इसकी रिपोर्ट मांगी है. इसके […]

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रांची : राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी के नाम पर हरमू में सोहराय भवन की जमीन खरीद के मामले की जांच करने का निर्देश दिया है.
विभाग के संयुक्त सचिव सुनील कुमार सिंह ने 22 अक्तूबर को पत्र लिखकर रांची उपायुक्त से इसकी रिपोर्ट मांगी है. इसके साथ ही बोकारो व धनबाद के उपायुक्त को भी पत्र लिखा गया है. उनसे कहा गया है कि भाजपा सांसद समीर उरांव व अन्य द्वारा लगाये गये आरोपों की पूरी जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाये.
सांसद ने झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन व हेमंत सोरेन पर गलत सूचनाअों के आधार पर कई डीड के माध्यम से विभिन्न जगहों पर जमीन खरीदने का आरोप लगाया है. कहा है कि जमीन खरीद में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 का उल्लंघन किया गया है.
सांसद ने 10 अक्तूबर को मुख्य सचिव को पत्र देकर सभी मामलों की जांच कराने को कहा था. मुख्य सचिव ने पूरा मामला राजस्व, निबंधन एवं सुधार विभाग को जांच के लिए भेजा है. इसके बाद जांच के लिए तीनों डीसी को लिखा गया है.
क्या है आरोप : सांसद ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2009 में हरमू में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के नाम से 48 डिसमिल आदिवासी जमीन (सोहराय भवन वाली जमीन) खरीदी गयी थी. जमीन का खाता नंबर 233 व प्लॉट संख्या 1975 है.
इसमें गलत सूचना दी गयी थी कि कल्पना सोरेन अरगोड़ा थाना क्षेत्र की निवासी हैं. वर्ष 2009 में उस इलाके में जमीन की दर कम से कम 20 लाख रुपये प्रति डिसमिल थी, लेकिन जमीन के एवज में संबंधित आदिवासी परिवार को केवल नौ लाख रुपये ही दिये गये. इतना ही नहीं, वर्ष 2009 में खरीदी गयी भूमि का सरकारी मूल्य करीब 80 लाख रुपये था.
सरकारी रेट से भी काफी कम दाम में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन ले ली गयी. आरोप है कि हेमंत सोरेन ने 33 डीड के माध्यम से राज्य के कई जिलों में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बड़ी संख्या में जमीन खरीदी है. आदिवासियों से औने-पौने दाम में जमीन ली गयी. जमीन लेने के क्रम में अपने स्थानीय निवासी होने के संबंध में लगातार गलत सूचनाएं भी दी गयीं.
महाधिवक्ता के परामर्श पर कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं मिली विधायक सह भाजपा जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राम कुमार पाहन व अन्य द्वारा मामले में जांच प्रतिवेदन 20 मई को समर्पित किया गया था.
इस प्रतिवेदन व महाधिवक्ता के विधिक परामर्श पर कार्रवाई करने का अनुरोध दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त से किया था. विभाग ने तीनों उपायुक्तों को लिखा है कि अब तक आयुक्त व आप सबसे प्रतिवेदन नहीं मिला है. ऐसे में अपने-अपने जिलों से साक्ष्य सहित प्रतिवेदन उपलब्ध करायें.
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